27/09/2025
कल तक राजपूत समाज भारतीय जनता पार्टी के पिछे पुरे मुस्तैदी से खड़ा था, तो आज उसका वजूद बचा हुआ है।
लेकिन आज वही भाजपा अपने ग्रास रूट समाज को दरकिनार कर रहा है । आज पुरे बिहार के राजपूत समाज देख रहा है कि किस प्रकार से एक साजिश के तहत राजपूत समाज को दरकिनार करने का कार्य किया जा रहा है ।
भारतीय जनता पार्टी को राजपूत समाज का वोट चाहिए, लेकिन राजनीति ओबीसी और पिछड़ों की करेंगे।
राजपूत समाज के सभी लोगों से कहना चाहता हूं कि वे ऐसा करने की हिमाकत इस लिए कर रहे हैं, कि हमलोगों का वोट विधानसभा चुनाव मे सत्यनारायण भगवान के प्रसाद की तरह बंट जाता है । हमलोग कभी भी एकजुटता दिखाते हुए किसी एक दल या क्षेत्र मे अच्छा कार्य करने कि मंशा लेकर चुनावी मैदान मे खड़े अपने समाज के व्यक्ति को चूनने का कार्य नही करते हैं ।
हमें भुमिहारों से सिखना चाहिए कि पाटलिपुत्र लोकसभा चुनाव मे नौबतपुर के एक नौजवान भुमिहार भाई निर्दलीय चुनाव लड़ें और आश्चर्य की बात यह है कि भुमिहार समाज सारे दलों को छोड़कर उस निर्दलीय को एकमुश्त वोट देने का कार्य किए ।
आज परिणाम आपके सामने है कि राजपूत समाज के पांच सांसद बिहार से जीतने के बाद भी न ही उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दिया गया और न ही भाजपा के बड़े - बड़े आयोजन मे किसी राजपूत नेता को मंच मिलता है ।
आज हमारे बिखराव के कारण किसी भी दल मे हमारे नेता की स्वीकार्यता नही है । लेकिन वहीं अगर भुमिहारों को देखा जाए, तो करिब - करिब सभी दलों मे चाहे जनता दल यूनाइटेड मे ललन सिंह, विजय चौधरी हों या भाजपा में विजय सिंह हों, कि स्वीकार्यता है ।
आज जो हमारे समाज कि हालत है, उसके जिम्मेदार भी कहीं न कहीं हम स्वयं हैं । ऐसा मै इसलिए कह रहा हूं कि जब बात अपने समाज कि आती है, तो अपने समाज के ही कुछ लोग नियम - कानून की बात करने लगते हैं । लेकिन जब दूसरे समाज का विषय आता है, तो हम सारे नियम कानून भुलकर उनके पिछलग्गू बन जाते हैं ।
मेरा मानना है कि अगर अपना समाज सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत रखेगा, तो हम और हमारे समाज का विकास होगा । सत्ता मे हमारी मजबूती बनाना और दूसरे समाज के प्रति नरमी और अपने समाज के प्रति रुखापन को खत्म करना होगा ।
वो समय अलग था, जब हम अपने प्रजा के लिए अपने समाज के लोगों का गला काटने का कार्य करते थे । आज का समय अपने समाज को किस प्रकार से विकसित किया जाए और किस प्रकार से सत्ता मे हमारी भागीदारी सुनिश्चित हो, इस पर चिंतन और मंथन करने की आवश्यकता है ।
जय वीर कुंवर सिंह
राजपूत महासभा बिहार ✍️