Department of Environment, Forest & Climate Change, Govt. of Bihar

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Department of Environment, Forest & Climate Change, Govt. of Bihar Dept. of Environment, Forest & Climate Change, is the nodal agency in the administrative structure of the Bihar Govt.

for planning, promotion, coordination and overseeing the implementation of Bihar's environmental and forestry policies and programmes.

अद्भुत रफ्तार और बेमिसाल फुर्ती का प्रतीक- एशियाई चीताअपनी तेज रफ्तार, फुर्ती और खास शारीरिक बनावट के कारण चीता धरती के ...
12/08/2026

अद्भुत रफ्तार और बेमिसाल फुर्ती का प्रतीक- एशियाई चीता

अपनी तेज रफ्तार, फुर्ती और खास शारीरिक बनावट के कारण चीता धरती के सबसे अनोखे वन्यजीवों में से एक है। पलभर में तेज गति पकड़ लेना इसकी सबसे बड़ी खासियत है। प्रकृति ऐसे ही कई अद्भुत जीवों से भरी है, जो हमारी जैव-विविधता को समृद्ध बनाते हैं।

आइए, वन्यजीवों को करीब से जानें, समझें और उनके अनुकूल वातावरण बनाए रखने में अपना सहयोग दें।

Ram Chandra Prasad
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार की ओर से विश्व हाथी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।Ram Chandra Prasad Informat...
12/08/2026

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार की ओर से विश्व हाथी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Ram Chandra Prasad
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

अगर आपको इस प्रश्न का सही उत्तर पता है, तो कमेंट में अपना जवाब जरूर लिखें।Ram Chandra PrasadInformation & Public Relatio...
11/08/2026

अगर आपको इस प्रश्न का सही उत्तर पता है, तो कमेंट में अपना जवाब जरूर लिखें।

Ram Chandra Prasad
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

10/08/2026

बिहार की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और मनोरम पर्यटन स्थलों की एक अलग पहचान है।

राजगीर के ग्लास ब्रिज से कैमूर के तेलहड़ कुंड और करमचट डैम, रोहतासगढ़ किला व तुतला भवानी झरने से लेकर मुंगेर की खड़गपुर झील तक बिहार का हर पड़ाव प्रकृति और विरासत की अनूठी कहानी कहता है।

आइए, बिहार को जानें, देखें और उसकी प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सहभागी बनें।

Ram Chandra Prasad
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

विश्व शेर दिवस पर राजगीर जू सफारी में गूंजा वन्यजीव संरक्षण का संदेश'मिनी जू कीपर' कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने करीब स...
10/08/2026

विश्व शेर दिवस पर राजगीर जू सफारी में गूंजा वन्यजीव संरक्षण का संदेश

'मिनी जू कीपर' कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने करीब से जाना वन्यजीवों की देखभाल, व्यवहार और संरक्षण का विज्ञान

विश्व शेर दिवस के अवसर पर युवा पीढ़ी को वन्यजीव संरक्षण से जोडने एवं उनमें प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से राजगीर जू सफारी में विशेष 'मिनी जू कीपर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल वन्यजीवों को देखने का अवसर ही नहीं मिला, बल्कि उन्हें जू कीपर की भूमिका निभाते हुए वन्यजीयों की देखभाल, आहार, व्यवहार, स्वास्थ्य एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की बारीकियों को नजदीक से समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के तहत 05 विद्यालयों (विवेकानंद विद्यालय, राजगीर, कस्तूरबा गाँधी विद्यालय, राजगीर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, नई पोखर, राजगीर, आदर्श मध्य विद्यालय, राजगीर, एवं डॉ० भीमराय अम्बेडकर विद्यालय, राजगीर के विद्यार्थियों के बीच क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रत्येक विद्यालय से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 02-02 विद्यार्थियों का बयन गिनी जू कीपर के रूप में किया गया। कुल 15 चयनित विद्यार्थियों के लिए राजगीर जू सफारी के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विशेष शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया।

मिनी जू कीपर्स को सर्वप्रथम हार्नियोर इन्चलोजर का भ्रमण कराया गया। यहां विद्यार्थियों ने शाकाहारी वन्यजीवों के दैनिक आहार, पोषण, स्वच्छता तथा उनके वैज्ञानिक प्रबंधन की प्रक्रिया को समझा। डॉ० संजीत कुमार, पशुचिकित्सा पदाधिकारी ने विद्यार्थियों को बताया कि वन्यजीवों की स्वस्थ जीवनशैली सुनिश्चित करने में संतुलित आहार एवं उचित प्रबंधन की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इसके पश्चात विद्यार्थियों ने एवियरी का भ्रमण किया, जहां उन्हें विभिन्न पक्षी प्रजातियों के व्यवहार, आहार, आवास, स्वास्थ्य एवं रख-रखाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार को करीब से देखा और यह जाना कि चिड़ियाघर में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक एवं अनुकूल वातावरण तैयार करना कितना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक चरण वन्यजीव अस्पताल का भ्रमण रहा। यहां विद्यार्थियों को राजगीर जू सफारी में हैंड-रियरिंग के माध्यम से पाली गई शावक 'लक्ष्मी' की सफलता की कहानी बताई गई। इस दौरान उन्हें यह समझाया गया कि संकट की स्थिति में यन्यजीवों के जीवन को बचाने के लिए किस प्रकार निरंतर देखभाल, विशेषज्ञता और वैज्ञानिक उपचार की आवश्यकता होती है।

विद्यार्थियों ने वन्यजीव अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सीय उपकरणों एवं आधुनिक प्रयोगशाला का भी अवलोकन किया तथा वन्यजीवों के उपचार, स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर राजगीर जू सफारी के निदेशक श्री राम सुन्दर एम ने कहा कि-
'वन्यजीव संरक्षण की शुरुआत जागरूकता से होती है और जागरूकता की सबसे मजबूत नींव बच्चों के मन में रखी जा सकती है। 'मिनी जू कीपर कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीवों के करीब लाकर उनमें उनके प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और संरक्षण की जिम्मेदारी का भाव विकसित करना है। उन्होंने आगे कहा कि राजगीर जू सफारी केवल वन्यजीवों के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि वन्यजीव शिक्षा और जन-जागरूकता का भी महत्वपूर्ण मंच है। हमारा प्रयास है कि नई पीढी प्रकृति को समझे, वन्यजीवों का सम्मान करे और उनके संरक्षण में अपनी भूमिका को पहचाने। आज के ये मिनी जू कीपर्स आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण के सशक्त संदेशवाहक बन सकते हैं।"

कार्यक्रम के समापन पर सभी चयनित मिनी जू कीपर्स को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही लायन रिटायरिंग रूम में कार्यरत एनिमल कीपर्स को भी वन्यजीवों की निरंतर देखभाल, समर्पण एवं जिम्मेदारीपूर्ण कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. संजीत कुमार, पशुचिकित्सा पदाधिकारी, श्री अजय कुमार, सहायक वन संरक्षक, श्री सूरज कुमार एवं श्री शिवम सिन्हा, वनों के क्षेत्र पदाधिकारी, सहित वनपाल एवं वनरक्षी उपस्थित रहे।

Ram Chandra Prasad
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गुड़हल सिर्फ खूबसूरत फूल ही नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक उपयोगों के लिए भी जाना जाता है। लाल, गुलाबी, पीले और सफेद जैसे कई ...
10/08/2026

गुड़हल सिर्फ खूबसूरत फूल ही नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक उपयोगों के लिए भी जाना जाता है। लाल, गुलाबी, पीले और सफेद जैसे कई रंगों में खिलने वाला गुड़हल गर्मियों में तेजी से बढ़ता है। इसके फूलों से बनी हर्बल चाय गर्म और ठंडी दोनों रूपों में पी जाती है और पारंपरिक रूप से इसे श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना गया है।

आइए, प्रकृति में मौजूद ऐसे खूबसूरत और उपयोगी पौधों के बारे में जानें और अपने घर-आँगन में इसे जगह दें।

Ram Chandra Prasad
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10/08/2026

पेड़ों की ऊँची शाखाओं पर रहने वाली इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल अपनी खास ग्लाइडिंग क्षमता से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुँचती है।

निशाचर जीवनशैली और वन पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यह अनोखी उड़न गिलहरी स्वस्थ वनों और समृद्ध जैव विविधता की पहचान भी है।

आइए, इसके प्राकृतिक आवास यानी वनों को सुरक्षित रखें और जैव विविधता के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएँ।

Ram Chandra Prasad
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India

09/08/2026
09/08/2026

कैमूर की हरी-भरी वादियों के बीच बसा एक ऐसा मनमोहक जलप्रपात, जो प्रकृति की अद्भुत खूबसूरती को अपने में समेटे हुए है। नाम है — तेलहड़ कुंड। इस झरने की कल-कल करती जलधारा और चारों ओर फैली हरियाली, यहाँ आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के करीब होने का एहसास कराती है।

Ram Chandra Prasad
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार की ओर से आप सभी को बिहार पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।Ram Chand...
08/08/2026

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार की ओर से आप सभी को बिहार पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Ram Chandra Prasad
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