Statue Of Honesty

Statue Of Honesty In The Memory Of Dr Shree Krishna Singh (Shree Babu)

गोह के पूर्व भाजपा विधायक श्री मनोज कुमार एवं स्वामी सहजानंद सरस्वती न्यास समिति के सचिव श्री अशोक कुमार के मध्य विचार व...
04/05/2022

गोह के पूर्व भाजपा विधायक श्री मनोज कुमार एवं स्वामी सहजानंद सरस्वती न्यास समिति के सचिव श्री अशोक कुमार के मध्य विचार विमर्श के बाद विद्यापति मार्ग पटना स्थित स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम मे कार्य प्रारंभ के लिए स्थल निरीक्षण एवं मापी।

रोजगार पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एन एस एस ओ) के 68वें चरण में यह अनुमान लगाया गया है कि लगभग 48.9 प्रतिशत क...
09/07/2020

रोजगार पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एन एस एस ओ) के 68वें चरण में यह अनुमान लगाया गया है कि लगभग 48.9 प्रतिशत कामगारों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है। 2011 की जनगणना के अनुसार हमारी 70 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रह्ती है जिसकी आय में वृद्धि सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिये। लेकिन सबसे अधिक रोजगार की गारंटी देने वाले कृषि क्षेत्र में आय बढ़ाने के लिए मूल्य आधारित वृद्धि की रणनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती, इसलिए शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों कलस्टर-पद्धति पर कृषि का उद्योगीकरण ही इकलौता रास्ता है।
मात्र इसी से 2022 तक किसानों की आय दुगुनी हो सकती है।

07/12/2019
13/12/2018

श्रीकृष्ण सिंह : यादों के चिलमन से
याद आती है गुलाम फरीद की कविता की चन्द पंक्तियाँ 'लाल गुलाबों के मौसम में,फूलों का रंग काला पड़ गया है।'
श्रीबाबू की याद के साथ ये लाइनें कितनी जुड़ी सी लगती है।हजारों वर्षों के इतिहास के पन्ने इस बात के गवाह हैं कि बिहार में कई बार फूलों का रंग काला पड़ा है-- धर्म सम्प्रदाय, छुआछूत के कुहासे ने कई बार कालिमा से ढँक लिया है बिहार के बहार को। पर हमेशा ही कोई न कोई व्यक्तित्व उभरा है, एक दीपशिखा बनकर और उस कालिमा को हटाने में समर्थ हुआ है।
उन्होंने एक बार भाषण देते हुए कहा था कि हर युग में एक महापुरुष पैदा होता है जो समय से आगे का स्वप्न देखता है।लेकिन जनसाधारण, उसके पीछे चलने का दावा करने वाले, अपनी कमजोरियों के कारण जमीन से ऊपर उठकर नहीं देखते। फल यह होता है कि पैगम्बर संदेश देता है पर लोग पुरानी धारा में ही बहते रहते हैं। कितने सच हैं आज उनके वे शब्द । यह कैसा संयोग है कि श्रीबाबू के बिहार में हिंसा, रक्तपात संगठित गिरोह, भूपतियों और भूमिहीनों में युद्ध जैसी स्थिति तथा उच्च मध्यम और छोटी जातियों में द्वन्द्व भरा अलगाव, इन सबका नाम बिहार हो गया है।इनमें सबसे विचित्र बात है कि श्रीबाबू का अपना समाज सबसे ज्यादा हिस्सा लेता है।
श्रीबाबू के नेतृत्व में बिहार की जनता ने सिर्फ आजादी की लड़ाई ही नहीं लड़ी ,बल्कि सदियों से उपेक्षित और पीड़ित मानव , आर्थिक और सामाजिक मुक्ति के लिए संगठित होकर जुझारू लड़ाई लड़ने को तैयार हो गया था।जमींदारी प्रथा को समाप्त करने के लिए बिहार की किसान सभा ने 1936 में आवाज उठाई और 1946 में श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने जमींदारी उन्मुलन की घोषणा अपने घोषणा पत्र में की तथा चुनाव में विजय प्राप्त की।

12/12/2018

"बिहार केसरी" Dr.Sri Krishna Sinha (श्रीबाबू) was among those who were "heavyweights in their own right and brought into political administration a texture of Nationalism, Federalism, Realism, and even some touch of pragmatic Socialism", and that he "lived Poor, died Poor and identified himself with the Poor."
काश की आज श्रीबाबू होते तो मुंगेर और दीघा(पटना) का पुल 10 वर्ष पहले ही बन गया होता।
विदित है कि बिहार केसरी के शासन काल में निर्मित राजेन्द्र सेतु, मोकामा का निर्माण मात्र 06 वर्षों में ही हो गया था। जबकि उस समय बड़ा-बड़ा जेसीबी और क्रेन नहीं होता था, इंजीनियर को एक फोन कॉल करने के लिये भी 3-3 दिन का इंतजार करना पड़ता था, चौड़ी सड़कें नहीं थीं जिस कारण पुल के स्टील गार्टरस को स्टीमर/जहाज से लाना पड़ता था । बावजूद इसके राजेंद्र पुल का निर्माण मात्र 06 वर्ष में पुरा कर लिया गया था।

क्या थे वो लोग और क्या था वह जज्बा,जोश और जज्बात !

"बिहार केसरी" श्रीबाबू ने बेगूसराय को "मिनी कलकत्ता" और "दूसरा टाटा" बनाने का सपना देखा था । इसी सोच के तहत विभिन्न तरह के दबाब के बावजूद उन्होंने इसे एक बेहतर सोच-समझ व दूरदर्शिता के साथ विश्वप्रसिद्ध इंजीनियर विश्वेश्वरैया के निर्देशन में इसे पटना के बजाय मोकामा-बरौनी के बीच निर्मित करवाया। इस पुल का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री महोदय ने व उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति महोदय ने किया था।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजेंद्र सेतु आजादी के बाद गंगोत्री से गंगासागर के बीच गंगा नदी पर निर्मित, यह प्रथम रेल सह सड़क पुल है।

इस पुल के निर्माण से उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर बिहार व पुर्वोत्तर के राज्यों के करोड़ों लोगों का दक्षिण भारत से सीधा सड़क व रेल संपर्क स्थापित हो सका था। इसी पुल के निर्माण के साथ बरौनी में रिफाइनरी, फर्टिलाईजर, थर्मल, डेयरी, गढहरा यार्ड, बरौनी औद्योगिक क्षेत्र, एनएच-28 & 31 इत्यादि के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था।

03/09/2017

आज के बदले परिवेश में श्री बाबू के आदर्शों पर चलकर समाज को जोड़ा जा सकता है।जिस तरह से उन्होंने कमजोर वर्गों के लिए कार्यो को किया । उन्हीं के कदम के निशान पर चलते हुए एक समीकरण बनाया जा सकता है। जी हाँ मेरा ईशारा है दलित सवर्ण गठजोड़।

12/01/2017

अब तक हम लोग ये मानते आये हैं कि राजनीतिक गलियारा काजल की कोठरी है । इसमें जो भी जाएगा कालिख लगे बिना बच नहीं पायेगा। इसलिये हम अपने संगठन को सक्रिय राजनीति से रखे। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इसमें आने के बिना अपने देश एवम् समाज में सकारात्मक बदलाव संभव ही नहीं है।
अतः आप सबों से नम्र निवेदन है की अपना बहुमूल्य सुझाव दें कि शुरुआत कहाँ से की जाए।
धन्यवाद

26/04/2016

Late Sri Krishna Singh
Sri Krishna Singh (Sri Babu) (1887–1961), known as Bihar Kesari, was the first Chief Minister of the Indian state of Bihar (1946–1961). Along with the nationalists Dr. Rajendra Prasad and Dr. Anugrah Narayan Singh, Singh is regarded among the Architects of Modern Bihar. Barring the war years (Second World War 1939–1945), Singh was chief minister of Bihar from the time of the first Congress Ministry in 1937 until his death in 1961." It was Singh who led Dalit’s entry into the Baidyanath Dham temple (Vaidyanath Temple, Deoghar), reflecting his commitment to the upliftment and social empowerment of dalits. Singh was the first Chief Minister in the country to abolish zamindari system in Bihar. He underwent different terms of imprisonment for a total of about eight years in British India.

File Photo: Sri Krishna Singh, Chief Minister, Bihar in a meeting on 11th Nov 1960.
The Former President of India, Pratibha Patil released a book on the letters of exchange between Singh and the First Prime minister of India Jawaharlal Nehru titled Freedom and Beyond.The Nehru-Singh correspondence touches on subjects such as Indian democracy in the making in early years of Independence, Centre-state relations, role of governor, turbulence in Nepal, Zamindari abolition and education scenario. Singh was known for his scholarship and erudition and he had given his personal collection of 17,000 books to the public library in Munger in 1959 which is now named after him as Sri Krishna Seva Sadan.

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Patna
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9431126599

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