03/09/2026
घाट अलग-अलग, गंगा एक… और तस्वीर में ‘निरंतरता’ बरकरार!
बिहार में बाढ़ आती है तो गंगा सिर्फ पानी नहीं बढ़ाती, राजनीतिक स्मृतियां भी ताजा कर देती है। इस बार की दो तस्वीरें इसी स्मृति की दिलचस्प कहानी कह रही हैं।
एक तस्वीर में वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गंगा के किनारे बाढ़ का जायजा ले रहे हैं। दूसरी तस्वीर में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गंगा के दूसरे घाट पर बाढ़ की स्थिति देख रहे हैं।
दोनों के बीच समय का अंतर है, सत्ता का अंतर है, पद का अंतर है और घाट का भी अंतर है।
लेकिन प्रशासनिक निरंतरता देखिए—दीपक कुमार आज भी मुख्यमंत्री के आसपास दिखाई देते हैं।
यानी बिहार में सत्ता बदल सकती है, मुख्यमंत्री बदल सकता है, सरकार का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है, लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनकी ‘गंगा-यात्रा’ सत्ता परिवर्तन से भी लंबी है!
नीतीश कुमार के साथ अधिकारी रहे दीपक कुमार अब सम्राट चौधरी के साथ हैं। यह तस्वीर किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था की उस खासियत की तस्वीर है जिसमें राजनीतिक कुर्सी पर बैठने वाला बदलता रहता है, मगर कुर्सी के आसपास के कुछ चेहरे स्थायी भाव से खड़े रहते हैं।
इसे बिहार की राजनीति का ‘सत्ता-संतुलन’ कहें या प्रशासनिक अनुभव की निरंतरता—व्याख्या के लिए सब स्वतंत्र हैं।
और बाढ़ के समय तो यह व्यवस्था और भी सुंदर दिखाई देती है।गंगा पूछती नहीं कि मुख्यमंत्री कौन है। पानी सबके सामने बराबर बढ़ता है।
लेकिन तस्वीरें जरूर बता देती हैं कि सत्ता के साथ कौन-कौन चलता है।
नीतीश कुमार के समय भी बाढ़ थी, निरीक्षण था, अधिकारी थे।आज सम्राट चौधरी के समय भी बाढ़ है, निरीक्षण है, अधिकारी हैं।
बस फर्क इतना है कि पहले तस्वीर में मुख्यमंत्री के साथ नीतीश कुमार थे और अधिकारी उनके साथ; आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं और अधिकारी उनके साथ।
इसे ही शायद बिहार की प्रशासनिक परंपरा कहते हैं—
“सरकार नई, चेहरा नया… व्यवस्था वही पुरानी।”
बाढ़ का पानी उतर जाएगा।
घाट सूख जाएंगे।
राजनीतिक बयान भी बदल जाएंगे।
लेकिन सवाल यह रहेगा कि क्या बिहार में सिर्फ मुख्यमंत्री बदलते हैं, या शासन चलाने का तरीका भी कभी बदलता है?