ICAR Research Complex for Eastern Region

ICAR Research Complex for Eastern Region Office page of the ICAR Research Complex for Eastern Region (ICAR RCER) a constituent establishment

ICAR Research Complex for Eastern Region,Patna

Towards the end of IX plan, the ICAR Research Complex for Eastern Region (ICAR-RCER), Patna was established with a mandate to address diverse issues relating to agricultural production in eastern states of India. The institute came into existence on 22nd February, 2001 with its headquarter at Patna and its regional stations at Darbhanga, Bihar and Ra

nchi, Jharkhand. Two KVKs at Buxar, Bihar and Ramgrah, Jharkhand are also attached to the Complex. Since establishment, the institute has undertaken research work in the areas of land and water resources management, crop, horticulture, aquatic crops, fishery, livestock and poultry, agro-processing and socio-economic aspects for agricultural development in the region so as to improve the livelihood of resource poor farmers.

संस्थान अनुसंधान परिषद की तीन दिवसीय बैठक का शुभारंभआईसीएआर-आरसीईआर, पटना में 5–7 अगस्त 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय संस्था...
06/08/2026

संस्थान अनुसंधान परिषद की तीन दिवसीय बैठक का शुभारंभ

आईसीएआर-आरसीईआर, पटना में 5–7 अगस्त 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय संस्थान अनुसंधान परिषद (IRC) की बैठक का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास की अध्यक्षता में हुआ। बैठक का उद्देश्य संस्थान में संचालित अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, नई अनुसंधान परियोजनाओं का मूल्यांकन तथा पूर्वी भारत के लिए आगामी पाँच वर्षों की अनुसंधान प्राथमिकताओं का निर्धारण करना है।

बैठक के उद्घाटन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए डॉ. राकेश कुमार, सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), आईसीएआर ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बहु-विषयक एवं सहयोगात्मक अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करने पर बल दिया, ताकि जलवायु-सहिष्णु, किसान-केंद्रित एवं प्रभावशाली कृषि प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके।

इस अवसर पर डॉ. बिकास दास, निदेशक, आईसीएआर-एनआरसी लीची, मुजफ्फरपुर, डॉ. पी. के. मिश्रा, निदेशक, बामेती, पटना, डॉ. राघवेंद्र सिंह, एमजीआईएफआरआई, मोतिहारी तथा डॉ. अर्नब सेन, प्रभारी, आईवीआरआई, कोलकाता केंद्र विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और अनुसंधान परियोजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ वृक्षारोपण से हुआ, जो पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उद्घाटन सत्र में गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी प्रसार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।

बैठक में 100 से अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारी भाग ले रहे हैं। विभिन्न तकनीकी सत्रों में बागवानी फसलों का आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन एवं उन्नत उत्पादन तकनीक, पुनर्योजी एवं एकीकृत कृषि प्रणाली, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पशुधन एवं मत्स्य उत्पादन प्रणाली तथा सामाजिक-आर्थिक, प्रसार एवं नीति अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है। वैज्ञानिक अपनी वर्तमान उपलब्धियों के साथ-साथ नई अनुसंधान परियोजनाओं को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत की कृषि को नई दिशा मिल सके।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर के वित्तीय सलाहकार श्री संदीप सरकार ने आज संस्थान का ...
31/07/2026

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर के वित्तीय सलाहकार श्री संदीप सरकार ने आज संस्थान का दौरा कर अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास एवं वित्तीय प्रबंधन गतिविधियों की समीक्षा की।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं चल रही अनुसंधान परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसान-केंद्रित, जलवायु-सहिष्णु एवं संसाधन-कुशल कृषि प्रौद्योगिकियों पर संस्थान के कार्यों को रेखांकित करते हुए राइस फैलो मैनेजमेंट कार्यक्रम, समेकित कृषि प्रणाली , स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकें, पशुधन एवं मत्स्य आधारित मॉडल, बागवानी आधारित भूमि उपयोग मॉडल तथा धान-गेहूं प्रणाली के सतत सघनीकरण जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य पूर्वी भारत में भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाना तथा लघु एवं सीमांत किसानों की आय एवं आजीविका में सुधार करना है।

श्री संदीप सरकार ने अपने सम्बोधन में किसान-केंद्रित अनुसंधान, जलवायु-सहिष्णु एवं संसाधन-कुशल कृषि प्रौद्योगिकियों, वित्तीय अनुशासन, तकनीकी व्यवसायीकरण, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, प्रभावी मीडिया प्रबंधन तथा अनुसंधान परिणामों के व्यापक प्रसार पर विशेष बल दिया। उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली आधारित बहुविषयक मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे नवाचार किसानों की आय बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दौरे के दौरान उन्होंने संस्थान के प्रायोगिक खेतों, समेकित कृषि प्रणाली मॉडलों, पशुधन इकाइयों एवं स्वर्ण वाटिका नॉलेज पार्क का अवलोकन किया, वृक्षारोपण किया तथा संस्थान के प्रकाशन का विमोचन भी किया।

25/07/2026
कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में 22वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक शुरू, पूर्वी भारत की कृषि को मजबूत बनाने पर विशेषज्ञो...
24/07/2026

कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में 22वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक शुरू,
पूर्वी भारत की कृषि को मजबूत बनाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 23 जुलाई, 2026 को 22वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक शुरू हुई। बैठक का उद्देश्य संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों की समीक्षा करना तथा पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार और झारखंड के किसानों के लिए उपयोगी अनुसंधान एवं नई कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए सुझाव प्राप्त करना है।
बैठक के अध्यक्ष एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि लघु और सीमांत किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने वाली तथा किसान-केंद्रित तकनीकों का विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने जल उपयोग दक्षता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता, अम्लीय मृदा पर अनुसंधान तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. राकेश कुमार ने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य के अनुसंधान राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होने चाहिए। उन्होंने जलवायु-स्मार्ट गांवों के विकास, कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनुरुद्धार तथा लघु किसानों के लिए उपयोगी तकनीकों के विकास पर जोर दिया।
आरएसी के अन्य सदस्यों डॉ. सी. एल. आचार्य (पूर्व निदेशक, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल; डॉ. आजाद सिंह पंवार (पूर्व निदेशक, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम; डॉ. रंजीत कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद; डॉ. महेश गाथाला (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सिस्टम्स एग्रोनॉमिस्ट, सिमिट) तथा डॉ. के. के. बरुआ, पूर्व प्रभागाध्यक्ष, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियाम ने भी संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों, प्रगतिशील अनुसंधान कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संस्थान केवल गुणवत्तापूर्ण कृषि अनुसंधान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रसार एवं क्षमता निर्माण गतिविधियों के माध्यम से विकसित एवं प्रमाणित प्रौद्योगिकियों को प्रभावी ढंग से किसानों के खेतों तक पहुँचाने के लिए भी पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
बैठक से पहले अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्यों ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ धान की रोपाई की। इसके बाद उन्होंने संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्रों का भ्रमण कर समेकित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती, धन-परती भूमि प्रबंधन, पोषण वाटिका, ओपन टॉप चैंबर सहित विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने आम और अमरूद के पौधे भी लगाए। सदस्यों के लिए संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों एवं उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के दौरान चार प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। साथ ही, कृषि अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु सूक्ष्मजीवी इनोकुलेशन कल्चर के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जी-बायोम प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए |
तकनीकी सत्रों में संस्थान के विभिन्न प्रभागों तथा बक्सर एवं रामगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुखों ने अनुसंधान उपलब्धियों, नई तकनीकों, कृषि प्रसार कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्य सचिव डॉ. पी. सी. चंद्रन ने किया।

संस्थान द्वारा "कृषि अनुसंधान में जेंडर मुख्यधाराकरण: नीति, व्यवहार एवं जेंडर उत्तरदायित्व आकलन" विषय पर एक दिवसीय कार्य...
21/07/2026

संस्थान द्वारा "कृषि अनुसंधान में जेंडर मुख्यधाराकरण: नीति, व्यवहार एवं जेंडर उत्तरदायित्व आकलन" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 20 जुलाई,2026 को किया गया । कार्यशाला का उद्देश्य वैज्ञानिकों एवं अनुसंधान पेशेवरों को कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा संस्थागत कार्यप्रणालियों में जेंडर दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से समाहित करने के प्रति संवेदनशील बनाना था।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. अनुप दास, निदेशक, आईसीएआर-आरसीईआर, पटना ने कृषि क्षेत्र में जेंडर की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान में महिलाओं एवं पुरुष किसानों की विशिष्ट भूमिकाओं, आवश्यकताओं, चुनौतियों तथा अवसरों को समुचित रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि कृषि विकास अधिक न्यायसंगत, समावेशी एवं सतत बन सके।
कार्यशाला में विभिन्न विषयों के वैज्ञानिकों ने सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर डॉ. कुमारी शुभा द्वारा जेंडर-उत्तरदायी प्रौद्योगिकी मूल्यांकन का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें कृषि प्रौद्योगिकियों का महिलाओं एवं पुरुष किसानों के लिए उनकी सुगमता, समावेशिता, उपयोगिता तथा लाभप्रदता के आधार पर मूल्यांकन करने के व्यावहारिक तरीकों का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम का समन्वयन आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के जेंडर सेल के नोडल अधिकारी डॉ. रजनी कुमारी द्वारा किया गया।

Demonstration on Canopy Management in Old Mango OrchardsA demonstration programme on Canopy Management in Old Mango Orch...
17/07/2026

Demonstration on Canopy Management in Old Mango Orchards

A demonstration programme on Canopy Management in Old Mango Orchards was conducted at Village Telia, Block Raidih, District Gumla, Jharkhand, by ICAR RCER, Farming System Research Centre for Hill and Plateau Region in collaboration with PRADAN NGO.

The programme included practical demonstrations on pruning for canopy rejuvenation, nutrient management, pest and disease management, and intercropping in mango orchards. Farmers actively participated in the hands-on sessions and interacted with the resource persons.

A total of 65 tribal farmers from 7 villages attended the programme and benefited from the technical guidance on scientific orchard management practices. Council of Agricultural Research

अनुसंधान केन्द्र, प्लांडु में 98वें आईसीएआर स्थापना दिवस का गरिमामय आयोजनदिनांक 16 जुलाई, 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान प...
16/07/2026

अनुसंधान केन्द्र, प्लांडु में 98वें आईसीएआर स्थापना दिवस का गरिमामय आयोजन
दिनांक 16 जुलाई, 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प.) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केन्द्र, प्लांडु, राँची में आज 98वें आईसीएआर स्थापना दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में केन्द्र प्रधान डॉ. अवनि कुमार सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की स्थापना, उपलब्धियों एवं भारतीय कृषि के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर डॉ. पी. के. सिंह, निदेशक (अनुसंधान), बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, राँची ने कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता एवं कृषि में आधुनिकीकरण पर बल दिया। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, राँची के डीन एवं निदेशक (विस्तार) डॉ. डी. के. शाही ने किसानों तक उन्नत कृषि तकनीकों के प्रभावी प्रसार की आवश्यकता पर जोर देते हुए वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच निरंतर संवाद को महत्वपूर्ण बताया। अनुसंधान परामर्शदात्री समिति के पूर्व सदस्य एवं पूर्व-प्रधान डॉ. शिवेन्द्र कुमार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की लंबी यात्रा, उपलब्धियों एवं महत्व पर प्रकाश डाला।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का 98वाँ स्थापना दिवस : कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में "कृषि में सूखाड़ प्रबंधन" विष...
16/07/2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का 98वाँ स्थापना दिवस : कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में "कृषि में सूखाड़ प्रबंधन" विषय पर कृषक–वैज्ञानिक संवाद का आयोजन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 16 जुलाई, 2026 को "कृषि में सूखाड़ प्रबंधन" विषय पर कृषक–वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बिहार कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (बामेती), बिहार सरकार के निदेशक डॉ. पी. के. मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूली विद्यार्थियों के लिए भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति तथा देश के कृषि विकास में आईसीएआर के अमूल्य योगदान पर जागरूकता सत्र के साथ हुआ, जिसके उपरांत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने एल नीनो एवं उसके मौसम तथा कृषि पर प्रभाव, वर्षा जल संचयन तथा सूखाड़ के प्रभावी प्रबंधन हेतु कृषि संबंधी उपायों पर व्याख्यान दिए। कृषक–वैज्ञानिक संवाद के दौरान किसानों ने खेतों में आने वाली विभिन्न समस्याओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखा, जिनके समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों, धान की सीधी बुआई, फसल विविधीकरण तथा वर्षा जल के कुशल प्रबंधन संबंधी व्यावहारिक सुझाव दिए, ताकि सूखे के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके। वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा अपनाई जा रही देशी तकनीकी ज्ञान की सफल पहल का भी उल्लेख किया।
डॉ. पी. के. मिश्रा ने आईसीएआर की 97 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर बधाई देते हुए देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में इसके अतुलनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने बिहार में सतत् कृषि विकास को बढ़ावा देने तथा किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने संस्थान के सभी कर्मचारियों एवं किसानों को कृषि उत्पादन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में उनके सामूहिक योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने सभी हितधारकों से सतत् कृषि को बढ़ावा देने तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर भी उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं किसानों ने नई दिल्ली से प्रसारित आईसीएआर स्थापना दिवस समारोह का वर्चुअल प्रसारण भी देखा।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों ने संस्थान की समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, 250 वर्गमीटर एवं 125 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले माइक्रो एवं नैनो होमस्टेड कृषि मॉडल, हरित खाद बीज उत्पादन इकाइयों तथा जलवायु-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियों के विभिन्न प्रदर्शन क्षेत्रों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में लगभग 120 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 50 स्कूली विद्यार्थी भी शामिल थे। इस अवसर पर कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र , रांची, कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ (झारखंड) तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर (बिहार) में भी इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में भाग लेने वाले किसानों को आम के पौधे एवं सब्जियों के बीज वितरित किए गए, ताकि वृक्षारोपण को प्रोत्साहन मिले तथा सतत कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।

ICAR-RCER, Farming System Research Centre for Hill and Plateau Region (FSRCHPR) Ranchi, organized a three-day skill-orie...
15/07/2026

ICAR-RCER, Farming System Research Centre for Hill and Plateau Region (FSRCHPR) Ranchi, organized a three-day skill-oriented training programme on "Establishment and Management of Multitier Agroforestry Model" from 13–15 July 2026 for 26 progressive tribal farmers from Lohardaga district, Jharkhand. Farmers received hands-on training on establishing and managing multitier agroforestry systems and were provided with improved vegetable seeds and planting materials of mango, guava, and mahogany. These inputs will support the establishment of a 5-acre multitier agroforestry demonstration in farmers' fields, promoting sustainable livelihood and wider technology adoption. Council of Agricultural Research

राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस 2026: प्रौद्योगिकी एवं नवाचार से मत्स्य कृषकों का सशक्तीकरणराष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस के अवसर...
10/07/2026

राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस 2026: प्रौद्योगिकी एवं नवाचार से मत्स्य कृषकों का सशक्तीकरण

राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस के अवसर पर 10 जुलाई 2026 को भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर द्वारा “प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से मत्स्य कृषकों का सशक्तीकरण” विषय पर प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बक्सर जिले के कुल 58 प्रगतिशील मत्स्य कृषकों ने भाग लिया, जिनमें तीन महिला मत्स्य कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत जलीय कृषि प्रबंधन पद्धतियों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से मत्स्य उत्पादन क्षमता एवं कृषकों की आय में वृद्धि करना था।

तकनीकी सत्रों में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने प्रमुख कार्प मछलियों के वैज्ञानिक पालन, आधुनिक तालाब प्रबंधन, जल गुणवत्ता नियंत्रण, मछलियों में रोगों की पहचान एवं वैज्ञानिक उपचार, संतुलित आहार प्रबंधन तथा अधिक उत्पादन हेतु उन्नत तकनीकों पर विस्तृत जानकारी साझा की। साथ ही, सरकारी अनुदान योजनाओं, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG), मूल्य संवर्धन एवं प्रभावी विपणन के माध्यम से मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

Address

ICAR Parisar Veterinary College Post
Patna
800014

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Tuesday 9am - 5:30pm
Wednesday 9am - 5:30pm
Thursday 9am - 5:30pm
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