27/08/2026
क्या सिर्फ स्कूल की बिल्डिंग बनाने से शिक्षा का स्तर बढ़ जाता है?
क्या नई दीवारों के साथ बच्चों का ज्ञान भी बढ़ जाता है?
क्या बड़े गेट से बच्चों का भविष्य बड़ा हो जाता है?
और अगर स्कूल की बिल्डिंग तो शानदार है, लेकिन उसमें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो उस बिल्डिंग का क्या फायदा?
बिल्डिंग विकास का हिस्सा हो सकती है, लेकिन शिक्षा का प्रमाण नहीं।
शिक्षा का स्तर इस बात से तय होगा कि हमारे बच्चे क्या सीख रहे हैं, कैसे सोच रहे हैं और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए कितने तैयार हैं।
राजनीति में अक्सर हम देखते हैं कि सरकारें अपने कार्यकाल में बनी इमारतों की गिनती बताती हैं।
जनता को अब सवाल पूछना चाहिए—
स्कूल कितने बने, यह तो बताया;
शिक्षक कितने मिले?
भवन कितने बने, यह तो बताया;
लेकिन बच्चों की पढ़ाई कितनी सुधरी?
उद्घाटन कितने हुए, यह तो बताया;
लेकिन कितने बच्चों का भविष्य बदला?
यही असली सवाल है।
हमें ऐसी राजनीति नहीं चाहिए जिसमें शिक्षा सिर्फ उद्घाटन और शिलान्यास का विषय बनकर ना रह जाए।
भवन निर्माण सरकार कर सकती है,
लेकिन बच्चे का भविष्य एक अच्छी शिक्षा बनाती है।
स्कूल बनाइए, लेकिन सिर्फ स्कूल की बिल्डिंग मत बनाइए।
शिक्षक दीजिए।
संसाधन दीजिए।
बिल्डिंग की ऊंचाई से शिक्षा का स्तर नहीं मापा जाता,
बच्चों की योग्यता और उनके भविष्य से शिक्षा का स्तर मापा जाता है।
ईंटों से इमारत बनती है,
लेकिन शिक्षा से राष्ट्र बनता है।
यही हाल कुछ अस्पतालों का भी है।