30/10/2023
(आधी रात का दर्द )
कपास का उत्पादन इस साल बहुत कम हुआ है ।
मज़दूरी की रेट बढ़ गई है ।
लेकिन कपास के भाव भी इस साल बहुत कम हो गए हैं ।
जबकि कॉटन के कपड़े महेंगे हुए जा रहे हैं ।
दुनिया में Demand और Supply का इतना घटिया उदाहरण नहीं मिलेगा ।
माल कम पैदा हुआ और भाव भी कम हो गए हैं । 7 हज़ार से नीचे ! क्या बचेगा किसान के पास ?
जबकि माल कम होने पर भाव चढ़ते हैं । इस केस में यह क्यों नहीं हुआ ? क्यों कपास 11 हज़ार तक नहीं पहुँची ?
यह कौनसा बाज़ार है ? यह कैसी Economics है ?
कोई राजनैतिक पार्टी, कोई राजनेता खेत की तरफ़ झांक नहीं रहा है । ऐसे मुद्दों पर कोई नहीं बोलता । उनके लिए किसान का यह दर्द कोई मायने नहीं रखता ।
मेरे किसान, मैं जानता हूँ कि यह क्या है । कौन खेल रहा है तुम्हारे वर्तमान और भविष्य से । कौन कपास बाहर से मंगवाकर तेरा हौसला तोड़ रहा है ।
अपना ध्यान हटा गंदी राजनीति से, मेरी लोकनीति को समझ - सब साफ़ हो जाएगा । फिर तुम अपने ही क़ातिलों के गीत नहीं गाओगे ।
अब मेरी इस आवाज़ को संवैधानिक मंच चाहिए । बात जयपुर दिल्ली में गूँजे तो बात बने ।
क्रांति जैसा साथ चाहिए मुझे ।
मेरी बात पल्ले पड़ रही है तो चुप मत बैठो । मुझसे काम लो ।
डॉ. अशोक चौधरी
अभिनव राजस्थान पार्टी