Mission SAVE GIRL Chaild

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सिर्फ 16 साल की उम्र… और पूरी दुनिया की नज़रें एक कॉपी पर टिक गईं। नेपाल के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाली एक सामान्य-स...
21/12/2025

सिर्फ 16 साल की उम्र… और पूरी दुनिया की नज़रें एक कॉपी पर टिक गईं। नेपाल के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाली एक सामान्य-सी दिखने वाली छात्रा, प्रकृति मल्ला…
ना कोई महंगा पेन, ना कोई खास कॉपी…
बस लिखने का ऐसा जादू, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।
जब उसने परीक्षा में अपना उत्तर लिखा, तो टीचर कुछ देर तक कॉपी को देखते ही रह गए।
हर अक्षर इतना साफ, इतना संतुलित और इतना सुंदर था कि लगता था जैसे किसी कलाकार ने ब्रश से शब्द बना दिए हों।
यह सिर्फ लिखावट नहीं थी, यह धैर्य, एकाग्रता और मेहनत की तस्वीर थी।
धीरे-धीरे उसकी कॉपी सोशल मीडिया तक पहुँची…
और फिर दुनिया ने कहा —
“यह दुनिया की सबसे खूबसूरत लिखावट है।”
महज़ 16 साल की उम्र में प्रकृति मल्ला को मिला Global Appreciation,
और एक साधारण छात्रा बन गई लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा।
यह कहानी बताती है कि
टैलेंट उम्र नहीं देखता,
और मेहनत कभी छोटी नहीं होती।
अगर लगन सच्ची हो,
तो एक कॉपी और एक पेन भी इतिहास बना सकते हैं। ❤️✍️
#प्रेरणा #प्रकृति_मल्ला #दुनिया_की_सबसे_खूबसूरत_लिखावट

Arha ने शतरंज (Chess) सीखकर 30 पज़ल्स सॉल्व किए और 50 बच्चों को ट्रेनिंग भी दी।इतनी मेहनत और टैलेंट की वजह से उसका नाम N...
11/12/2025

Arha ने शतरंज (Chess) सीखकर 30 पज़ल्स सॉल्व किए और 50 बच्चों को ट्रेनिंग भी दी।
इतनी मेहनत और टैलेंट की वजह से उसका नाम Noble Book of World Records में दर्ज हो गया।
सोचिए…इतनी छोटी बच्ची, लेकिन काम इतने बड़े कि बड़े–बड़े लोग भी गर्व महसूस करें।
Allu Arjun की बेटी होने के साथ-साथ, Arha अब हजारों बच्चों की inspiration बन गई है।

उसने साबित कर दिया कि मेहनत की कोई उम्र नहीं होती…
बस दिल से कोशिश होनी चाहिए।

♟️🌟❤️

यह कहानी किसी साधारण सफलता की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो मिट्टी से उठकर आसमान को छूना चाहता है। मुक्केंद्र कुमार, एक...
11/12/2025

यह कहानी किसी साधारण सफलता की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो मिट्टी से उठकर आसमान को छूना चाहता है। मुक्केंद्र कुमार, एक ट्ठा `मज़दूर के बेटे, जि`नके घर में रोज़ की मेहनत की धूल, प`सीने की गंध, और उम्मी`दों की हल्की-सी लौ जलती थी—उसी लौ ने उन्हें UP`SC की 819वीं रैंक तक पहुँ`चाया।

मुक्केंद्र की कहानी किताबों में नहीं मिलती, यह उन दीवारों पर लि`खी रहती है जिन पर उनके पिता सुबह-सुब`ह चूना-सीमें``ट पोतते थे। जहां दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, वहीं मुक्कें`द्र ने ईंटों के बीच सपनों को ज`न्म लेते हुए देखा। पिता के हाथों की द`रारों में जमी सफ़ेद धूल, माँ की आँ`खों की चिंता, और घर के बाहर खड़ी टूटी बा`ल्टी—यही उनकी प्रेरणा बन गई।

उन्होंने प`ढ़ाई को कभी “ज़िम्मेदारी” नहीं मा`ना, बल्कि “मुक्ति” की सीढ़ी सम`झा। गरीब परि`वार में अक्सर सपनों का बजट सबसे छोटा होता है, पर मुक्केंद्र ने अपनी हिम्मत से इस बजट में इजा`फ़ा किया। वह अक्सर कहते हैं—“पढ़ाई मेरे लिए रास्ता नहीं, रोशनी थी।”

दिन में पिता के काम में हाथ बँटा`ना, शाम को गाँव की लाइब्रेरी में घंटों बै`ठना, और रात को नींद और थकान से लड़`ते हुए पन्ने पलटना—यह उनकी दिन`चर्या थी, जो किसी फिल्म की स्क्रि`प्ट जैसी लगती है पर सच उससे भी कठिन थी।

UPSC में 819वीं रैंक हासि`ल करके उन्होंने सिर्फ़ अपनी स`फलता नहीं पाई, बल्कि` हजारों उन बच्चों के लिए उम्मीद ज`गाई है, जो सोचते हैं कि गरीबी सपनों का अंत है। मुक्केंद्र ने सा`बित किया कि सपने अगर ईमानदार हों तो हा`लात कभी रास्ता नहीं रोकते।

🚨 ढूंढने में सहयोग करेंक्षेत्र के सभी लोग ध्यान दें — एक व्यक्ति लापता है।कृपया जानकारी मिलने पर तुरंत संपर्क करें।आपका ...
11/12/2025

🚨 ढूंढने में सहयोग करें
क्षेत्र के सभी लोग ध्यान दें — एक व्यक्ति लापता है।
कृपया जानकारी मिलने पर तुरंत संपर्क करें।
आपका छोटा-सा सहयोग बड़ी मदद बन सकता है।

📞 संपर्क नंबर: 084400 08243

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प्रतीक्षा का जीवन काफ़ी कठिनाइयों भरा रहा है। महज 17 साल की उम्र में आर्थिक मजबूरियों के चलते उन्होंने 10वीं की पढ़ाई बी...
26/11/2025

प्रतीक्षा का जीवन काफ़ी कठिनाइयों भरा रहा है। महज 17 साल की उम्र में आर्थिक मजबूरियों के चलते उन्होंने 10वीं की पढ़ाई बीच में छोड़कर शादी कर ली। लेकिन महज 20 साल की उम्र में प्रतीक्षा विधवा हो गईं। इस दुखद घटना के बाद उनके सामने आजीविका और बेटे की परवरिश की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

शिक्षा पूरी न होने के कारण प्रतीक्षा को अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल हो गया. उन्होंने SBI में सफाईकर्मी के रूप में काम करना शुरू किया, जहां उनका काम शौचालय और फर्नीचर की सफाई करना था. इस मेहनत के बदले उन्हें मात्र 60-65 रुपये महीना वेतन मिलता था. साथ ही वे घर की जिम्मेदारियां और बेटे की देखभाल भी अकेले संभाल रही थीं।

इस दौरान प्रतीक्षा दिन में बैंक में सफाई का काम करती थी और रात में पढ़ाई करती थी. फिर SBI में उन्हें कई पोस्ट मिले और अब प्रतीक्षा तोंडवलकर 38 सालों बाद SBI की AGM अधिकारी बन गई है।

प्रतीक्षा की लगन और समर्पण ने उन्हें सीजीएम और फिर एजीएम (Assistant General Manager) जैसे ऊंचे पद तक पहुंचा दिया। उनकी कहानी उन लाखों लोगों के लिए मिसाल हैं। जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ने के बजाय, उन्हें साकार करने के लिए संघर्ष करते हैं। अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, तो को किसी भी ऊंचाई को छू सकता है 💐💐

42,000 बहनों को टेलर बनाया और फीस एक रुपया ली, दिल से इस भाई को सलाम है।
26/11/2025

42,000 बहनों को टेलर बनाया और फीस एक रुपया ली, दिल से इस भाई को सलाम है।

95 वर्षीय सावित्री माझी ने अपने गाँव में खेल के मैदान के लिए अपनी 5 एकड़ ज़मीन दान कर दी है। आपको बता दें सावित्री पहले ...
25/11/2025

95 वर्षीय सावित्री माझी ने अपने गाँव में खेल के मैदान के लिए अपनी 5 एकड़ ज़मीन दान कर दी है। आपको बता दें सावित्री पहले भी स्कूल, कॉलेज और मंदिर निर्माण के लिए अपनी ज़मीन दान कर चुकी हैं, और अब सावित्री ने अपने गाँव में खेल का मैदान बनाने के लिए अपनी 5 एकड़ ज़मीन दान कर दी।

सावित्री की इच्छा है कि समाज में दूसरों को वे कष्ट न सहने पड़ें जो उसने झेले हैं। वह खेलों में भी बहुत रुचि रखती हैं। हालाँकि वह अपनी बढ़ती उम्र के कारण बच्चों के साथ नहीं खेल पातीं, फिर भी वह हमेशा उनका होसला बढ़ाती हैं।सावित्री को अपने घर के पास बच्चों को क्रिकेट और अन्य खेल खेलते देखना बहुत अच्छा लगता है।

सावित्री के गाँव के युवा अपने गाँव में एक स्टेडियम बनाकर वहाँ प्रतियोगिताएँ आयोजित करना चाहते थे। लेकिन गाँव में इसके लिए ज़मीन नहीं है। इसलिए 95 वर्षीय सावित्री ने स्टेडियम बनाने के लिए अपनी 5 एकड़ ज़मीन गाँव को दान कर दी है। जैसे ही गाँव के युवाओं को इसका पता चला उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।💐💐

कई लोग कहते हैं—“उम्र निकल गई, अब क्या होगा?”कई कहते हैं—“शादी के बाद ज़िंदगी बदल जाती है, सपने नहीं पूरे होते…”और कुछ ल...
25/11/2025

कई लोग कहते हैं—“उम्र निकल गई, अब क्या होगा?”
कई कहते हैं—“शादी के बाद ज़िंदगी बदल जाती है, सपने नहीं पूरे होते…”और कुछ लोग तो एक-दो बार फेल होते ही हार मान लेते हैं।लेकिन…केरल की निसा उज़ीराजन ने साबित कर दिया कि अगर दिल में हिम्मत हो,
तो उम्र, हालात और जिम्मेदारियाँ भी आपको रोक नहीं सकतीं।

दिन में नौकरी…
घर और दो बेटियाँ…
थकान, टेंशन, जिम्मेदारियाँ—सब कुछ संभालते हुए भी
वो हर रात किताब खोलकर बैठ जाती थीं।

6 बार UPSC में फेल।
लेकिन हार नहीं मानी—क्योंकि उन्हें अपनी बेटियों के लिए
एक मिसाल बनना था।

कभी लगा छोड़ दूँ…
कभी लगा किस्मत साथ नहीं…
लेकिन हर सुबह बेटियों का एक ही सवाल—
“मम्मी, आप हीरो बनोगी ना?”

और वही सवाल उनकी ताकत बन गया।

40 साल की उम्र में,
जब लोग रिटायरमेंट सोचने लगते हैं,
उन्होंने UPSC क्लियर कर दिखाया।

आज वह सिर्फ IAS Officer नहीं—
बल्कि उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं
जो जिम्मेदारियों में घिरी होने के बावजूद सपने नहीं छोड़तीं।

बारिश में भीगी मिट्टी, स्टेडियम का शोर… और बीच मैदान में खड़ी कुछ बेटियाँ, जिनकी आँखें दुनिया को नहीं देख सकतीं—लेकिन सप...
23/11/2025

बारिश में भीगी मिट्टी, स्टेडियम का शोर… और बीच मैदान में खड़ी कुछ बेटियाँ, जिनकी आँखें दुनिया को नहीं देख सकतीं—लेकिन सपने?वो पूरे भारत को रोशन कर सकते हैं।
उस दिन बल्ला नहीं, हिम्मत गूँजी थी…
और भारत का तिरंगा हवाओं में नहीं—दिलों में लहराया था। 🇮🇳🔥
ये जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं,
उन लाखों बेटियों का संदेश है जिनके सपनों को समाज ने कभी कम आँका।
इन खिलाड़ियों ने दुनिया को बता दिया—
कि आँखों से नहीं,
दिल से देखने वाले ही सबसे बड़ी मंज़िलें जीतते हैं।
आज भारत की हर बेटी थोड़ा और ऊँचा सपने देख सकती है…
क्योंकि रास्ता किसी ने नहीं रोका—
बस हिम्मत किसी ने दिखाई। 🇮🇳✨







एक अख़बार की कटी हुई सी पन्नी… उस पर लेटा एक नवजात बच्चा…और उसके पास बैठी एक माँ, जिसके चेहरे पर चिंता भी थी और उम्मीद भ...
23/11/2025

एक अख़बार की कटी हुई सी पन्नी… उस पर लेटा एक नवजात बच्चा…और उसके पास बैठी एक माँ, जिसके चेहरे पर चिंता भी थी और उम्मीद भी।
लोगों ने कहा—“ये बच्चा कैसे जी पाएगा?”
माँ ने सिर्फ मुस्कुराकर इतना कहा—“मेरे होते हुए, मेरा बच्चा दुनिया में कुछ भी कर सकता है।”
कहते हैं, माँ सिर्फ जन्म नहीं देती—वह जीवन को दिशा भी देती है।
अगर माँ ठान ले तो किस्मत भी उसके सामने सिर झुका देती है।
इस कहानी में जीत सिर्फ बेटे की नहीं,
उस माँ की भी है जिसने दुनिया की परवाह किए बिना अपने बच्चे को उड़ना सिखाया।
ये कहानी हर उस इंसान के लिए है जो अपनी कमजोरी को बहाना बनाता है—
क्योंकि ये बच्चा साबित कर चुका है कि चैंपियन हाथों से नहीं… दिल से बनते हैं।








उत्तराखंड के ऊँचे और खतरनाक पहाड़ों के बीच एक ऐसा इंसान रहता है, जिसकी कहानी सुनकर यकीन होता है कि असली हीरो फिल्मों में...
23/11/2025

उत्तराखंड के ऊँचे और खतरनाक पहाड़ों के बीच एक ऐसा इंसान रहता है, जिसकी कहानी सुनकर यकीन होता है कि असली हीरो फिल्मों में नहीं, ज़मीन पर चलते हैं। नाम है हल्क मोहन सिंह नेगी, जो हर दिन अपने कंधों पर चार-चार भरे हुए सिलेंडर बाँधकर पाँच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ते हैं, सिर्फ इसलिए कि दूर बसे पहाड़ी घरों में भी चूल्हा जलता रहे। रास्ते टूटे हुए, हवा ठंडी, सांसें तेज़... लेकिन उसके इरादों का वजन कभी नहीं टूटता। उसकी पीठ पर सिर्फ सिलेंडर नहीं बंधे होते, पूरी एक बस्ती की उम्मीदें बंधी होती हैं। कोई कैमरा नहीं, कोई तालियाँ नहीं-फिर भी वो चलता है, क्योंकि उसे पता है कि उसकी थकान से कई घरों में रौशनी और गर्माहट पहुँचेगी। सच में, ऐसे लोग ही देश की असली रीढ़ होते हैं, जो बिना नाम और शोहरत के भी पूरा पहाड़ संभाले रखते हैं। Heroes

सोचिए… 17 साल की उम्र में ज़्यादातर बच्चे बस एग्ज़ाम, मोबाइल और दोस्तों की टेंशन लेते हैं।लेकिन हैदराबाद का एक लड़का, सि...
22/11/2025

सोचिए… 17 साल की उम्र में ज़्यादातर बच्चे बस एग्ज़ाम, मोबाइल और दोस्तों की टेंशन लेते हैं।
लेकिन हैदराबाद का एक लड़का, सिद्धार्थ मंडल, चुपचाप बैठकर देश की बेटियों के लिए ढाल बनाने में लगा हुआ था। 💔
उसे हर रोज़ न्यूज़ में दिखती ख़बरें परेशान करती थीं – बस में छेड़छाड़, सड़क पर बदतमीज़ी, रात में घर लौटती लड़की का डर।
एक दिन उसने सोचा – “जब हर चीज़ के लिए ऐप और गैजेट बन रहे हैं, तो बेटियों की सुरक्षा के लिए क्यों नहीं?”
यहीं से जन्म हुआ एक छोटे से लेकिन ज़बरदस्त आइडिया का – ElectroShoe नाम की चप्पल। 👟⚡

ये कोई साधारण चप्पल नहीं है।
इसमें ऐसे सेंसर लगे हैं कि अगर लड़की को खतरा महसूस हो या कोई जबरदस्ती करे,
तो ये तुरंत एक्टिव होकर हमलावर को तेज़ झटका दे सकती है ⚡
और साथ ही लड़की की लोकेशन परिवार या मदद के लिए भेज सकती है,
ताकि किसी की ज़िंदगी सिर्फ़ कुछ सेकंड की देरी से बर्बाद न हो जाए।

सोचिए, 17 साल का एक बच्चा… न कोई बड़ी कंपनी, न करोड़ों की लैब,
बस दिमाग में दर्द, दिल में हिम्मत और हाथ में कुछ तार–चिप्स।
उसने वो काम शुरू कर दिया, जो कई बड़े–बड़े लोग सिर्फ़ भाषणों में करते हैं –
बेटियों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बनाना। 🙏

आज ज़रूरत है कि हर परिवार, हर स्कूल–कॉलिज और हर सरकार
ऐसे बच्चों की सोच को सलाम करे, उनके सपनों को हकीकत बनाने में साथ दे।
क्योंकि जिस दिन भारत की हर बेटी बेखौफ चल सकेगी,
उसी दिन हम सच में कह पाएंगे – “देश आगे बढ़ रहा है।” 🇮🇳

सलाम है इस युवा सोच को,
जिसने अपनी उम्र से बड़ा सपना देखा – बेटियों को डर नहीं, सुरक्षा का हथियार देना। ❤️

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