09/07/2026
"कुमाऊँ मंडल में हॉस्पिटल, या सिर्फ रिफर सेंटर"
सीमांत उत्तराखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई पिछले कई महीनों से लगातार सामने आ रही है। कहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, कहीं सीएमएस तक नहीं हैं, करोड़ों की मशीनें और भवन बिना स्टाफ के बेकार पड़े हैं, तो कहीं गंभीर मरीजों को हल्द्वानी या देहरादून रेफर करना ही व्यवस्था बन गया है। हर साल समस्याएँ वही रहती हैं, लेकिन दावे किए जाते हैं कि स्वास्थ्य सेवाएँ मजबूत हो रही हैं।
मोहल्ला क्लिनिक खोलने की बात कर रहे हैं जबकि बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा नहीं है.
सरकार को जवाब देना चाहिए कि रिक्त पद कब भरेंगे, तबादले के बाद डॉक्टर जॉइन क्यों नहीं करते, बिना विशेषज्ञों के महंगे उपकरण क्यों पड़े हैं और हर साल वही समस्याएँ क्यों दोहराई जाती हैं? यदि हर गंभीर मरीज को रेफर ही करना है, तो जिला और बेस अस्पतालों पर करोड़ों रुपये खर्च करने का उद्देश्य क्या है?
इसी बीच एक और बड़ा झटका कुमाऊँ के मरीजों को लगा है
राममूर्ति अस्पताल,भोजीपुरा बरेली जहाँ सीमांत क्षेत्र के गंभीर मरीज आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए जाते थे, वह विकल्प भी बंद हो गया। जब जिला अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, बेस अस्पतालों में विशेषज्ञ नहीं और रेफर होने पर राममूर्ति जैसा विकल्प भी खत्म हो जाए, तो आखिर सीमांत का आम आदमी इलाज के लिए जाए कहाँ?
सीमांत क्षेत्र के लोगों को घोषणाएँ नहीं, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ चाहिए।
पर कुमाऊँ खासकर अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गया है..