06/01/2015
उत्तर प्रदेश
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हाईकोर्ट खंडपीठ पर राय को पांच जजों की कमेटी
Tue, 06 Jan 2015 05:03 PM (IST)
लखनऊ। खंडपीठ के संबंध में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पत्र को लेकर गरमाए माहौल के बीच अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड़ से मुलाकात की। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि खंडपीठ पर राय के लिए आया केंद्रीय मंत्री का पत्र पांच जजों की कमेटी के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि खंडपीठ पर राज्य सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव अभी तक नहीं प्राप्त हुआ है।
पश्चिम में खंडपीठ की मांग के विरोध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने मंगलवार को भी हड़ताल जारी रखी। इस बीच मुख्य न्यायाधीश से अधिवक्ताओं का 45 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मिला। मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, न्यायमूर्ति वीके शुक्ला, न्यायमूर्ति एपी साही, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की उपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। इस दौरान हाईकोर्ट बार की ओर से अध्यक्ष राकेश पांडेय ने उन्हें एक लिखित ज्ञापन देकर केंद्रीय मंत्री के पत्र पर हुई कार्यवाही की जानकारी चाही। मुख्य न्यायमूर्ति ने बताया कि गत 25 अगस्त को बतौर विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद की ओर से प्रेषित पत्र रिमाइंडर के रूप में आया था। उसमें मई, 2013 को तत्कालीन विधि मंत्री कपिल सिब्बल की ओर से भेजे गए पत्र का हवाला दिया गया था। मुख्य न्यायाधिपति होने के नाते व्यावहारिता के आधार पर मैंने कोई राय देनी उचित नहीं समझी। इसके लिए न्यायमूर्ति विनीत सरन की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी गई है।
इस दौरान कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विनीत सरन ने बताया कि अभी तक सदस्यों की बैठक नहीं हुई है और न ही कोई रिपोर्ट तैयार की गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि हाईकोर्ट बार को विश्वास में लिए बगैर कमेटी कोई भी रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को नहीं सौंपेगी। न्यायमूर्तियों के आश्वासन के बाद भी अधिवक्ताओं की हड़ताल पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका। हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी।
अच्छे दिन की आहट
उच्च न्यायालय खंडपीठ के लिए दशकों से संघर्ष कर रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए ये अच्छे दिन की आहट है। लंबी खामोशी तोड़ते हुए केंद्र सरकार ने तर्क और दलीलों के साथ पश्चिमी उप्र को खंडपीठ देने की पैरवी की है। दरअसल, तत्कालीन विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने 25 अगस्त को उच्च न्यायालय खंडपीठ के संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ की मांग काफी समय से की जा रही है। इसका समर्थन राज्य सरकार भी कर चुकी है। इसके बावजूद इस मुद्दे का हल निकाला नहीं जा सका है।
ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन में 17 जिले लामबंद
पश्चिम के बीस जिलों में प्रदेश की पचीस फीसद आबादी रहती है, जिन्हें मुकदमों की पैरवी के सिलसिले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की दौड़ लगाने में परेशानी होती है। इन स्थितियों को देखते हुए इनकी मांग विचारणीय है।
ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार के लिए हाईकोर्ट की राय जरूरी है, इसलिए इस पर मुख्य न्यायाधीश से राय मांगी गई है। कल उप्र बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष पीके सिंह ने इस संबंध में पूर्व विधि मंत्री के पत्र की प्रति देते हुए यह जानकारी दी। रविशंकर प्रसाद के बाद विधि मंत्रालय नवंबर में सदानंद गौड़ा के हवाले कर दिया गया है, मगर पश्चिम उत्तर प्रदेश की पैरवी में केंद्र सरकार द्वारा लिखा गया वह पत्र अब उजागर हुआ है। सरकार के सकारात्मक रुख को देखते ग्रेटर आगरा बार एसोसिएशन 17 जिलों को लामबंद करने के लिए बांहें चढ़ा चुकी है।