26/01/2018
गणतंत्र दिवस समारोह में राहुल गांधी की बैठने की जगह के बारे में कांग्रेस द्वारा विवाद पैदा करना निंदनीय
2018 के गंणतंत्र दिवस समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बैठने के बारे में कांग्रेस ने जो विवाद खड़ा किया है वह बेबुनियाद व निंदनीय है।
देश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया और राज्यों में भी एक के बाद एक जनता कांग्रेस को रिजेक्ट करती रही है। लेकिन कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं के दिमाग से सत्ता का नशा अभी भी उभर रहा है।
लोकतंत्र में सत्ता सेवा का माध्यम है लेकिन परिवारवाद में पली हुई कांग्रेस और उसके नेताओं में लोकतंत्र की भावना का कोई स्थान नहीं है। इसलिए अपने आपको और परिवार को देश का शासक मानते हैं और उनमें शासक का अहंकार और सत्ता का नशा कूट कूटकर भरा हुआ है। कांग्रेस में और कांग्रेस के नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को किस प्रकार का पास मिलना चाहिए और बैठने के लिए उनको कहां स्थान मिलना चाहिए, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने बहुत बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया। जैसे ये बहुत बड़ी राष्ट्रीय घटना हो। कांग्रेस और उनके ही गीत गाते हुए कुछ लोगों ने उनके स्वर में स्वर मिलाकर राहुल गांधी के स्थान के बारे में बवंडर खड़ा कर दिया।
यही कांग्रेस के नेता और कांग्रेस के सुर में सुर मिलाकर गीत गाने वाले कुछ लोगों को याद दिलाना है कि यूपीए के शासनकाल में 2013 और 2014 में भाजपा के अध्यक्ष को कैसा पास मिलना चाहिए और कहां बैठाना चाहिए उसके बारे में भाजपा ने कभी भी मुद्दा नहीं उठाया था। यूपीए के शासनकाल में 2013 और 2014 में भाजपा के तत्कालीन अध्यक्षों श्रीमान नितिन गडकरी जी और श्रीमान राजनाथ सिंह जी को वीवीआईपी एन्क्लोजर में भी स्थान नहीं दिया गया था और जहां सरकारी अधिकारियों का बाक्स था वहीं उनको जगह दी गई थी। लेकिन भाजपा के लिए गणतंत्र पर्व एक राष्ट्रीय पर्व है और उनकी गरिमा का बहुत बड़ा महत्व है इसलिए भाजपा ने इसके बारे में कभी नाराजगी नहीं जतायी थी और कभी भी मुंह नहीं खोला था।
जहां तक प्रोटोकाल का सवाल है, हमने 2015, 2016 और 2017 में राज्यसभा के विपक्ष के नेता श्री गुलाम नबी आजाद और लोकसभा के सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता श्री मल्लिकार्जुन खड़गे को पास दिया है और उचित स्थान भी दिया है। लेकिन पांच-पांच दशक से देश पर राज करने वाली कांग्रेस पार्टी देशहित में और लोकतंत्र के हित में जब आसियान के दस देशों के मुखिया गणतंत्र समारोह में आए हैं तो उनका गौरव करना देश का सम्मान बढ़ाने के अवसर से चूक गई है। और अलोकतांत्रिक ढांचा, सत्ता का नशा और शासन के अहंकार में डूबी हुई कांग्रेस को, देश का सम्मान दिखाई नहीं देता, यह निंदनीय है।