22/05/2026
“एक सवाल — क्या हम आज भी उम्मीदवार की योग्यता, ईमानदारी और जनसेवा से ज़्यादा प्रचार और प्रभाव देखकर निर्णय लेते हैं?”
“हम न अंध-विरोध में हैं, न अंध-समर्थन में। जो जनता के हित में होगा उसका समर्थन करेंगे, और जहाँ जनता की समस्या होगी वहाँ समाधान की आवाज़ उठाएँगे।”
आजकल सोशल मीडिया पर कई विषय और अभियान बहुत तेजी से वायरल होते हैं। हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। लेकिन मेरा मानना है कि केवल कुछ दिनों की लोकप्रियता, पोस्ट या भाषण से जनता की वास्तविक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं होता।
देश के करोड़ों लोग आज भी रोजगार, शिक्षा, किसानों की चुनौतियों, बाढ़-सूखा, भ्रष्टाचार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों से जुड़े सवालों का सामना कर रहे हैं। इन मुद्दों का समाधान केवल चर्चा से नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम, जनसेवा, ईमानदार प्रयास और प्रभावी नीतियों से निकलता है।
मेरे लिए वह व्यक्ति अधिक सम्मान का पात्र है जो अपने गाँव, पंचायत, वार्ड या समाज के लोगों के बीच रहकर उनके सुख-दुख में साथ खड़ा होता है, उनकी समस्याओं को सुनता है और उन्हें हल करने की कोशिश करता है। क्योंकि जनसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने से सिद्ध होती है।
मैं अपने युवा साथियों से कहना चाहता हूँ — केवल नारों, भीड़ या सोशल मीडिया की लोकप्रियता देखकर निर्णय मत लीजिए। पढ़े-लिखे, ईमानदार, योग्य और जनहित में काम करने वाले लोगों को पहचानना और आगे बढ़ाना शुरू कीजिए। जिस दिन राजनीति में योग्यता और ईमानदारी को अधिक महत्व मिलेगा, उस दिन शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव और मजबूत होंगे।
हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि लोकतंत्र केवल नेताओं से नहीं चलता, बल्कि जनता की सोच और भागीदारी से भी मजबूत होता है। यदि हम उम्मीदवार की योग्यता, कार्यशैली और जनसेवा को प्राथमिकता देंगे, तो अच्छे लोगों के लिए आगे आने का रास्ता और मजबूत होगा।
जब से देश स्वतंत्र हुआ है, अलग-अलग समय पर बनी सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर देश के विकास के लिए योगदान दिया है और आज भी प्रयास जारी हैं। जहाँ अच्छे कार्य हो रहे हैं, उनकी सराहना होनी चाहिए और जहाँ सुधार की आवश्यकता है, वहाँ सरकार और जनता दोनों को मिलकर सकारात्मक प्रयास करना चाहिए।
यदि हम नफरत से ऊपर उठकर शिक्षा, योग्यता, ईमानदारी और सही नेतृत्व को महत्व देंगे, तो हमारा देश और अधिक मजबूत और विकसित बन सकता है।
एक बार व्यक्ति नहीं, उसकी योग्यता, ईमानदारी और जनसेवा को महत्व देकर देखिए — बदलाव की शुरुआत यहीं से हो सकती है।
“मजबूत सरकार और जागरूक जनता — यही मजबूत राष्ट्र की सबसे बड़ी पहचान है।”
— Md. Shahbaz Alam
Public Rights Activist & Social Worker