29/05/2025
कला दिल से निकलती है, और दिल तक ही पहुँचती है। यह सच साबित कर दिखाया है तुलसीपट्टी गांव के संजय झा जी के पुत्र प्रशांत झा और पुत्री लक्ष्मी झा ने। आर्थिक तंगी और सीमित साधनों के बावजूद इन दोनों ने अपनी कला को मरने नहीं दिया, बल्कि उसे संजोया, निखारा और आज वह रंग दिखाया कि हर सुनने वाला भावविभोर हो गया। प्रशांत की तबले पर थाप और लक्ष्मी की आवाज़ में जो मिठास थी, उसने यह साबित कर दिया कि सच्ची प्रतिभा न हालात की मोहताज होती है, न साधनों की।
जब वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री संजीव मिश्रा जी को इन बच्चों की प्रतिभा की जानकारी मिली, तो वे स्वयं उनके घर पहुंचे। उन्होंने प्रशांत और लक्ष्मी के हुनर को न सिर्फ दिल से सराहा, बल्कि उन्हें आर्थिक सहायता भी दी और भविष्य में हरसंभव सहयोग देने का वादा किया। यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था—जहाँ संघर्ष, मेहनत और प्रतिभा को उसका पहला सच्चा सम्मान मिला।
यह कहानी न केवल प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि जब हौसले बुलंद हों, तो राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं।