31/05/2025
त्याग की प्रतिमूर्ति, संस्कृति की संरक्षिका पुण्यश्लोक ‘लोकमाता’ अहिल्याबाई होल्कर जी की त्रिशताब्दी जन्म जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन!
अपने विलक्षण प्रशासनिक कौशल, दूरदर्शिता और लोककल्याणकारी दृष्टिकोण से उन्होंने ‘राजसत्ता’ को बनाया जनसेवा का माध्यम और स्वयं को जनमानस की ‘लोकमाता’ के रूप में प्रतिष्ठित किया। देशभर में काशी विश्वनाथ से लेकर के अनेकानेक तीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार, मंदिरों के निर्माण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
उनकी जयंती केवल एक स्मरण नहीं वरन् यह प्रेरणा है उस सेवा, त्याग और संकल्प की, जो भारत को बार-बार अपने मूल से जोड़ता है।