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12/11/2024
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11/05/2022

संस्कृत जगत के भाती मे भारतं आदरणीय रमाकान्त शुक्ला जी की स्मृतियाँ स्थाई होगी, सरल व्यक्तित्व के धनी होने के साथ ही वे माँ भारती के अट्टू उपासक रहें, संस्कृत काव्य को जन-जन तक पहुचाने में उनके योगदान को तमगे कमतर ही रहें, स्वाभिमान प्रतिष्ठित शुक्ला जी को भावभीनी श्रद्धांजलि, सतत अभिनंदन।

दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा मंदारिन (चीनी) के देश चीन में इन दिनों संस्कृत भाषा के प्रति विद्वानों ...
24/04/2021

दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा मंदारिन (चीनी) के देश चीन में इन दिनों संस्कृत भाषा के प्रति विद्वानों में रुचि बढ़ रही है। आम भारतीयों इस बात पर रोमांचित हो सकते हैं, लेकिन चीनी विद्वानों में संस्कृत के प्रति अनुराग लगभग दो हजार साल पुराना है। चौथी सदी में बौद्ध धर्म के सूत्र समझाने आए कुमारजीव ने यहां के विद्वानों में संस्कृत का ऐसा चाव पैदा किया कि आज भी वहां बड़ी तादाद में लोग संस्कृत पढ़ना और समझना चाहते हैं।

संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान और चीन-भारत बौद्ध अध्ययन संस्थान, पेकिंग विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल के निदेशक वांग बांगवेई ने कहा कि भारतीय संस्कृति को जानने-समझने के लिए बहुतेरे विद्वान और छात्र संस्कृत के पाठ्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।

वांग ने कहा कि पेकिंग विश्वविद्यालय चीन के सबसे पुराने विश्वविद्यालय में से एक है। यहां संस्कृत की पढ़ाई के लगभग सौ साल पूरे होने जा रहे हैं। चीन में संस्कृत के प्रसार के लिए वांग चौथी सदी में चीन आए भारतीय विद्वान कुमारजीव को इसका श्रेय देते हैं।

उन्होंने बताया कि करीब दो हजार साल पहले आए कुमारजीव ने चीन में 23 साल बिताए थे। उनका कुछ समय कैदी के रूप में और कुछ समय सम्मानित विद्वान की तरह बीता। उन्होंने बौद्ध सूत्रों का चीनी भाषा में अनुवाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वांग ने बताया चीन में बहुत से लोग भारतीय संस्कृति में रुचि रखते हैं। संस्कृत ऐसी भाषा है जिसके माध्यम से चीनी लोगों ने हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, प्राचीन भारतीय चिकित्सा, खगोल विज्ञान और गणित के बारे में सीखा।

पेकिंग विवि में संस्कृत के एसोसिएट प्रोफेसर वाई.ई. श्याओंग ने कहा कि चीन में संस्कृत खूब फलफूल रही है। उनके विभाग में संस्कृत विशेषज्ञता हासिल करने वाले 10 विद्वान हैं। वहीं 200 अन्य स्नातक कार्यक्रम के लिए विषय के रूप में संस्कृत पढ़ रहे हैं।

नयनाभिराम झीलों और पहाड़ियों का शहर हांगझाऊ अपनी आइटी कंपनियों के अलावा इस समय संस्कृत की पढ़ाई के लिए भी विख्यात हो रहा है। ऑनलाइन रिटेल कंपनी अलीबाबा के शहर के नाम से मशहूर इस शहर का बौद्ध संस्थान इस समय 120 चीनी विद्वानों, शोधार्थियों, छात्रों और कलाकारों की संस्कृत पढ़ने की ललक को पूरा कर रहा है।

मेंज विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंडोलॉजी के डीन कोनराड मीसिग ने बताया कि हर साल आम तौर 20 छात्र ही संस्कृत पढ़ने के लिए प्रवेश लेते हैं, लेकिन इस बार 120 लोगों के सामने आने से हम काफी उत्साहित हैं। इस संस्थान में चीनी विद्वान ली वेई संस्कृत पढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि 2004 में जब इस संस्थान ने संस्कृत की कक्षाएं शुरू कीं तो बहुत कम लोगों ने रुचि ली। दुनिया की दूसरी संस्कृतियों के बारे में जानने की ललक में संस्कृत को लेकर लोगों में रुझान बढ़ा है।

संस्कृत जगत के लिए सराहनीय कदम।
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संस्कृत भाषा एवं उसके साहित्य का संरक?

श्री ऋषिकुल विद्यापीठ(Sri Rishikul Vidyapeeth Alumni Meet-2020)Lachhmangarh, Sikar, RajasthanOnline Form:-https://docs.g...
02/04/2020

श्री ऋषिकुल विद्यापीठ
(Sri Rishikul Vidyapeeth Alumni Meet-2020)
Lachhmangarh, Sikar, Rajasthan

Online Form:-
https://docs.google.com/forms/d/1iBg6jTzF8R37f6j8A5gazKz6K2kMqQdBrmOfy8VbHg8

श्री ऋषिकुल विद्यापीठ में अध्यापन-अध्ययनरत से संयुक्त रहें, तदरिक्त जो आयोजन, खेलकूद, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े सभी सद्भावी महानुभावों को समवेत करने, उनके विचारों को साँझा करने, पुनश्च एक बार उसी गुरुकुल की स्मृतियों को चिरजीवन्त-चिरस्थाई करने के भाव से यह प्रक्रम आरम्भ किया जा रहा है।

श्री ऋषिकुल विद्यापीठ में अध्ययन, उसकी सांस्कृतिक-खेलकूद-प्रकाशन आदि से जुड़े, वहां के आचार्यों से सम्पर्कित महानुभावों के संस्मरण, पुराने फोटोज जो आपके संरक्षण में है, सभी प्रकाशन हेतु वांछित है। आदरणीय गुरुवर आचार्य नटवरलाल जोशी जी (सम्पर्क सूत्र +91-9610612980 +91-9828665353) के सानिध्य में आगामी श्रीऋषिकुल स्नातक सम्मेलन, प्रकाश्य स्मारिका हेतु आपका सहयोग महती योगदान होगा।

जो जहाँ है वहां से अपने, पुराने साथियों तक यह सन्देश प्रसारित करें, विभिन्न सोश्यल मीडिया माध्यमों से उन तक सन्देश पहुँचाये, जो इस मातृ संस्था से जुड़े, जिनको लगाव रहा, जो पुनः एक बार फिर से अपने विचारों को, अपने आलेख, फोटो आदि को प्रकाशन के आकार में सम्मिलित करना चाहते हैं।

इस आयोजन को गति देने के सन्दर्भ में आप समन्वयक श्री छगन शास्त्री जी +91 94140 37785 अथवा श्री कौशल शर्मा जी +91 94144 67988 से सम्पर्क कर सकते हैं।

संस्था के पूर्व शिक्षक, स्नातक सहित शुभचिन्तकों को आमंत्रण।
आप भी इस अनुष्ठान-यज्ञ में आमन्त्रित है, शेष को भी संयुक्त करें।
प्रणाम,
आशुतोष जोशी, पूर्व स्नातक -श्री ऋषिकुल विद्यापीठ
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