Shveta Mashiwal

Shveta Mashiwal Here to raise a voice for all that demands us to break our silence. Here to raise a voice for all th

22/08/2026

He did win many hearts today. True feminism. What an evolution .

22/08/2026
22/08/2026

कोई यूँ ही नहीं बनता राहुल गांधी।
2011 के अन्ना आंदोलन के वक्त राहुल गांधी की राजनैतिक समझ कच्ची थी। भारत के सबसे शक्तिशाली राजनैतिक परिवार से होने के बावजूद माँ भारतीय ना होने की वजह से भारत के आम अवाम के साथ जुड़ने का भाव कम दिखता था। उस वक्त केंद्र में बेहद निपुण प्रधानमंत्री थे लेकिन उनका संवाद जनता से कम था। इसी मौन कार्यशैली को anti incumbency बनाया और एक बेहद वाचाल प्रधानमंत्री जनता ने अपने लिए चुन लिया। पहले पहल नेहरू जी का घेराव और set narrative के लिए बहुत लोग अचानक बेहद प्रभावित हो गए। साथ में जुड़ा हिंदू सेंटीमेंट।
सनातन से भला कौन प्रभावित नहीं होगा ? राम मंदिर किस के मन से नहीं जुड़ेगा। साथ में आया एक बेहद प्रभावशाली tool सोशल मीडिया। IT Cell और अमित मालवीय। हर चीज़ को सेट नैरेटिव के साथ जोड़ा जाने लगा और गोदी मीडिया ने हर चीज़ में assumptions का ज़हर घोला। फिर वो थूक जिहाद हो ,सुशांत राजपूत की आत्महत्या। दक्षिणपंथी को राम की सेना और बाक़ी न्यूट्रल से वाम पंथ को सीधा लाहौर और लंका भेज दिया गया। कोरोना में ट्रंप को मोदी से प्रभावित नैरेटिव के साथ पेश किया गया और कितनी लाशों का मौन दहन हुआ ये सिर्फ़ उन लोगो को पता था जो उस वक्त थाली पीटने और दिया जलाने वाली जनता के लिए देवदूत बनकर अस्पतालों और समाज में काम कर रहे थे। ऐसे लोगो की ID सीधा हेडक्वार्टरस से ब्लॉक करवायी गई (मेरी आईडी भी इस में शामिल थी)
मौत के आंकड़े छिपाए गए। और इलाज की लाचार व्यवस्था भी। पहले लहर में सोनू सूद को उतारा गया जो सिर्फ उन प्रदेश में काम कर रहा था था जहाँ भाजपा की सरकार नहीं थी। पहली प्रवासी ट्रेन और सुशांत केस से झूझते बॉम्बे के कई कारनामे उस वक्त इतने घिनौने थे कि बयान करने में शर्म आती है। और ये सब मैं फर्स्ट हैंड निजी अनुभवों के आधार पर कह रही हूँ। सरकारें तोड़ी गई। जनता के सेंटीमेंट को भुनाया गया।

इस बीच वाचाल प्रधानमंत्री अपने मन की बात कहता रहा और लोगो के मन के हाल लेने छोड़ दिए। यहाँ तक की पुलवामा वाले आक्रमण के दिन सफेद झूठ बोला गया की वो तो कॉर्बेट के जंगल में नेटवर्क में नहीं थे। कॉर्बेट में सरकारी व्यवस्था में वॉकी taaki चलता है ये सबको मालूम है। लेकिन साहब अपने शूट में बिजी रहे और इस बीच राहुल गांधी लगातार लोगो के बीच जाते रहे। जनता से जुड़ते रहे। खामोशी से निर्भया के भाई को शिक्षा दिलवाते रहे (और ऐसे कई कार्य जो मीडिया में नहीं आए ) करते रहे।

फिर आया २०२६।

राम मंदिर चंदा घोटाला जिस पर ढोंगी सनातनी चुप साध लेते है।
कुंभ में हुई मौतों को आंकड़े को जनता से तो छिपा लिया लेकिन महादेव के दरबार में हर आत्मा से शरीर और वापसी का हिसाब होता है। ये सनातनी सरकार भूल गई।
इसी बीच सामिष निरामिष भोजन पर मानव हत्या करवाने वाले संघटन इस बात को भी डकार गए की बीफ एक्सपोर्ट में हम नंबर एक पर आ गए।

छा गए विश्वगुरु। समय का पहिया पलट चुका है। जनता से जुड़ाव संघ को संघ बनाता था। आज वही जनता खास तौर पर युवा राहुल गांधी की सहजता से जुड़ रहे है।
चुनाव में दखल
परीक्षा में नकल
कितने मुद्दे गिनाऊँ ???

मैं संघी परिवार से आती हूँ और मेरे परिवार ने कुमाऊँ में गांधी जी की यात्रा करवाई।

मेरे संस्कार मुझे देश प्रेम और सनातन से जोड़ते है।
मेरे राम और महादेव के प्रेम ने मुझे इतना बाँध रखा है की मुझे मौत के नाम पर झूठ और राम के नाम पर समाज में फ़ूट चुभती है।

और ये वाचाल प्रधानमंत्री और राहुल गांधी नहीं बदले
ये वक्त है। बदल रहा है।
वक्त के साथ जब कांग्रेस नहीं चल पायी तो जनता ने जड़ से उखाड़ फेंका था। उसी की वजह से राहुल गांधी आज का राहुल गांधी बन रहा है। और इसी जनता और उनके मुद्दों से दूरी महामानव को दानव बना रहे है।

माफ कीजिएगा सिस्टम बर्बाद है। कल अस्पताल में मेरे घर में मेरी बिटिया को देखने वाली बच्ची के पापा के इलाज के वक्त सरकारी सिस्टम की दुर्गंध ने मुझे फिर उद्वेलित किया। अब जनता के बीच जाने की सामर्थ्य और क्षमता मुझमें नहीं है। लेकिन दिल हल्का करने की आज़ादी सबको है।

देश पहले। राष्ट्र प्रेम पहले। सरकारे आती जाती रहेंगी। महादेव राम के भक्त झूठ का साथ नहीं देते। वो अपने धर्म का पालन करते है।
लंका में भी -त्रिजटा नाम राक्षसी एका
राम चरण रही निपुण विवेका
और अवध में भी मंथरा थी जिस पर -नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि।अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि

आप कहाँ हो फ़र्क़ नहीं पड़ता। आप क्या हो इस से फ़र्क़ पड़ता है।

आप अगर वाचाल प्रधानमंत्री के समर्थन में हो आप राम के और महादेव के समर्थक नहीं हो सकते।

मैं कांग्रेस भाजपा के चक्कर में नहीं पड़ती लेकिन समय सबका चरित्र गढ़ रहा है। ये दिख रहा है।

IT cell से फ़िलहाल अमित मालवीय को हटा दिया गया है। genz ने सोशल मीडिया डिकोडिंग कर ली है। अब कोई मेरे उम्र की महिला gen zee बनने का प्रयास कर रही है तो उसकी वजह से आप पूरी युवा पीढ़ी को ग़लत नहीं कह सकते।
समीक्षाएँ और सम्मिश्रण आवश्यक है। समय का पहिया गतिमान ही रहेगा।

सांब सदाशिव!

28/07/2026

रामनगर परिवहन को अपनी जिम्मेदारी उठाने चाहिए।
सड़क पर सबका अधिकार होता है विशेषकर स्कूल के बच्चो आदि के लिए समय तय होना चाहिए।

किसी भी व्यक्ति के ऊपर आक्षेप लगाना उचित नहीं है

विभागीय असफलता और तालमेल बैठाने का कार्य कोई महिला करे और आरोप लगे तो ग़लत है।

निधि मेहरा एक सम्मानित महिला हैं और इस तरह के विवाद में उनका नाम आना उचित नहीं लगता।

25/07/2026

इस वीडियो को गौर से देखिए

क्या हल्द्वानी काशीपुर में हड्डी से कोई डॉक्टर इलाज कर सकते है।

पैसा वगेरह सब व्यवस्था मिल कर कर लेंगे।

कांटेक्ट 9927555889.

24/06/2026

पेड़ अपनी छाया में
ख़ुद विश्राम नहीं कर पाता था।
इसका कोई दुःख उसे होता,
तो वह कब का सूख गया होता

-नरेश सक्सेना (एक अनाम पत्ती का स्मारक)

किताब अमेज़ॉन और फ़्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। लिंक के लिए DM करें।

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