Jharkhand Council of Educational Research and Training-JCERT

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Jharkhand Council of Educational Research and Training-JCERT Official page- Jharkhand Council of Educational Research and Training(JCERT), GoJ

झारखण्ड  शैक्षिक  अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) राँची में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण के संकल्प और हर्षाेल्लास के...
17/08/2026

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) राँची में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण के संकल्प और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस ; निदेशक शशि रंजन ने किया ध्वजारोहण

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची के प्रांगण में 80 वाँ स्वतंत्रता दिवस अत्यंत गरिमामय वातावरण, देशभक्ति के जज्बे और हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) राँची, के निदेशक शशि रंजन (भा.प्र.से.) ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को सलामी दी एवं परिषद् परिवार को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निदेशक महोदय ने पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देने के उद्देश्य से परिसर में वृक्षारोपण किया। इस दौरान निदेशक शशि रंजन, उप सचिव, सम्प्रति प्रतिनियुक्त जेसीईआरटी, संजय कुमार प्रसाद एवं जयवंती देवगम ने पौधा रोपण किया और हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण का सन्देश दिया परिषद् के पदाधिकारियों एवं संकाय सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
इस अवसर पर जेसीईआरटी के उप निदेशक विंध्याचल पाण्डेय, सहायक निदेशक बांके बिहारी सिंह सहित परिषद् के अन्य अधिकारी, संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

राज्य के सभी 24 जिलों से  02-02 शारीरिक शिक्षकों के लिए दिनांक 10 से 12 अगस्त 2026 तक झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशि...
17/08/2026

राज्य के सभी 24 जिलों से 02-02 शारीरिक शिक्षकों के लिए दिनांक 10 से 12 अगस्त 2026 तक झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची , में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय आवासीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं बाल-केंद्रित शारीरिक शिक्षा को सुदृढ़ करना तथा प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से राज्य के सभी जिलों तक प्रभावी प्रशिक्षण पहुँचाना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन श्री बांके बिहारी सिंह, सहायक निदेशक, JCERT द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समग्र समन्वय श्री रजनीकांत मिश्र, SRG, JCERT द्वारा सुचारू रूप से संपन्न किया गया।

प्रशिक्षण के प्रमुख विषय
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षित किया गया :
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 एवं NCF-SE 2023 के संदर्भ में शारीरिक शिक्षा पाठ्यक्रम एवं पाठ्यचर्चा।
शारीरिक साक्षरता (Physical Literacy) एवं खेल आधारित जीवन कौशल।
‘खेलो झारखंड’ एवं अन्य खेल प्रतियोगिताओं में लैंगिक समानता।
खिलाड़ियों का मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण।

विशेषज्ञ सत्र
प्रशिक्षण के दौरान देश एवं राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा सत्र संचालित किए गए, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल रहे :
डॉ. अतुल दुबे (NCERT)
श्री धीरसेन सोरेंग (SPO, JEPC)
श्री स्वप्निल जाधव एवं दीपिका राणा (Magic Bus, मुंबई)
श्री ओम प्रकाश सिंह (Centre for Catalyzing Change)
श्री हस्सान (Piramal Foundation)
World Being India की विशेषज्ञ टीम

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में शारीरिक शिक्षा के स्तर को उन्नत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। सभी 24 जिलों के प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अब अपने-अपने जिलों में जाकर प्रशिक्षण देंगे, जिससे जमीनी स्तर पर स्कूली बच्चों तक खेलकूद, शारीरिक साक्षरता और जीवन कौशल का लाभ प्रभावी रूप से पहुँच सकेगा।

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, राँची में जनजातीय भाषाओं की कक्षा 6 - 8 हेतु भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेख...
12/08/2026

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, राँची में जनजातीय भाषाओं की कक्षा 6 - 8 हेतु भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्यशाला (द्वितीय चरण) का आयोजन
झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची द्वारा राज्य की जनजातीय भाषाओं—संथाली, मुण्डारी, कुड़ुख, हो और खड़िया—के संरक्षण, संवर्धन एवं विद्यालयों में जनजातीय भाषा के पठन-पाठन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कक्षा 6, 7 एवं 8 हेतु भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्यशाला के द्वितीय चरण का आयोजन किया जा रहा है। यह 12-दिवसीय आवासीय कार्यशाला 10 अगस्त 2026 से 21 अगस्त 2026 तक संचालित होगी।

प्रथम चरण की सफलता : कार्यशाला के प्रथम चरण में कक्षा 6 की भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तकों की पाण्डुलिपि (Manuscript) को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।
वर्तमान चरण का उद्देश्य : द्वितीय चरण के तहत मुख्य रूप से कक्षा 7 के लिए संथाली, मुण्डारी, कुड़ुख, हो एवं खड़िया भाषाओं में मानक एवं गुणवत्तापूर्ण भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तकों के लेखन, संशोधन एवं सामग्री विकास पर कार्य किया जा रहा है।
इस कार्यशाला में राज्य भर से आमंत्रित जनजातीय भाषा( संथाली, मुण्डारी, कुड़ुख, हो और खड़िया) शिक्षक भाग ले रहे हैं, जो स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं का समावेश करते हुए पाठ्यसामग्री तैयार कर रहे हैं।

माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के ऑफलाइन सतत पेशेवर विकास (CPD) हेतु मास्टर ट्रेनर्स का पांच दिवसीय राज्य स्तरीय ...
10/08/2026

माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के ऑफलाइन सतत पेशेवर विकास (CPD) हेतु मास्टर ट्रेनर्स का पांच दिवसीय राज्य स्तरीय आवासीय प्रशिक्षण

कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षकों के ऑफलाइन सतत पेशेवर विकास (CPD) हेतु मास्टर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण 08 अगस्त 2026 से 12 अगस्त 2026 तक (पांच दिवसीय आवासीय), झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची द्वारा किया जा रहा है । CENTA (Center for Teacher Accreditation), स्कूलनेट इंडिया (Schoolnet India), एवं वर्ल्डबीइंग इंडिया फाउंडेशन (WorldBeing India Foundation) इस प्रशिक्षण में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं ।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) में आयोजित होने वाले आगामी तीन दिवसीय ऑफलाइन आवासीय CPD प्रशिक्षण के लिए राज्य स्तर के चयनित मास्टर ट्रेनर्स ,डायट संकाय सदस्यों और JCERT के मास्टर प्रशिक्षकों को सशक्त एवं दक्ष बनाना, ताकि वे प्रतिभागी शिक्षकों को प्रभावी ढंग से प्रशिक्षित कर सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत 08 अगस्त 2026 को दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
कार्यक्रम का उद्घाटन उप सचिव श्री संजय कुमार प्रसाद (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड, सम्प्रति प्रतिनियुक्त JCERT) एवं सहयोगी संस्थाओं (CENTA, स्कूलनेट इंडिया, एवं वर्ल्डबीइंग इंडिया फाउंडेशन) के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
उप सचिव श्री संजय कुमार प्रसाद ने शिक्षकों को "समाज निर्माता" के रूप में संबोधित करते हुए उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण राज्य की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव लाएगा ।

प्रमुख गतिविधियाँ :
मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में वर्ल्डबीइंग इंडिया फाउंडेशन की टीम द्वारा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विस्तृत परिचर्चा की गई :
उद्देश्य : प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य विद्यालय के वातावरण को तनावमुक्त एवं बाल-अनुकूल बनाना है।
कक्षा अनुप्रयोग: प्रतिभागियों को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों को कक्षा में कैसे लागू करें, जिससे विद्यार्थी अपनी समस्याओं को जो मानसिक रूप से उन्हें परेशान कर रही हैं,अपने शिक्षकों को बता सकें और समस्या समाधान के बाद कक्षा में तनावमुक्त हो कर विषयों को समझ सकें ।

शिक्षण कौशल एवं प्रभावी संप्रेषण
उत्तरवर्ती सत्रों में CENTA के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रायोगिक एवं ऑफलाइन माध्यम से निम्नलिखित विषयों पर सत्र संचालित किए गए :
कक्षा में आत्मविश्वास और प्रभावी उपस्थिति : मास्टर ट्रेनर्स को कक्षा प्रबंधन और अपने प्रभाव को बढ़ाने की तकनीकों से अवगत कराया गया,मास्टर ट्रेनर्स ने इसपर अपने अनुभव भी साझा किये ।
प्रभावी संचार कौशल : कक्षा में स्पष्ट, प्रभावी और दो-तरफा संवाद स्थापित करने की रणनीतियों पर बल दिया गया।
माइक्रो-टीचिंग सेटअप एवं डेमो : प्रतिभागी मास्टर प्रशिक्षकों के लिए माइक्रो-टीचिंग (Micro-Teaching) सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें तीन मुख्य बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया :
स्पष्टता : विषय-वस्तु को सरल एवं बोधगम्य रूप से प्रस्तुत करना।
एंगेजमेंट : कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
मैनेजमेंट : समय, संसाधन एवं कक्षा अनुशासन का प्रभावी समन्वय।
इस तरह के अन्य सत्र में भी प्रतिभागी पूर्ण तन्मयता और सहभागिता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
यह राज्य स्तरीय पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर्स के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक सिद्ध हो रहा है। यहाँ प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगामी चरणों में राज्य के विभिन्न DIETs में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ऑफलाइन CPD प्रशिक्षण कार्यक्रमों में माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

कक्षा 3 से 8 की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया के अंतर्गत डिजाइन, समेकन एवं समीक्षा  के लिए आयोजित कार्यशाला का स...
07/08/2026

कक्षा 3 से 8 की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया के अंतर्गत डिजाइन, समेकन एवं समीक्षा के लिए आयोजित कार्यशाला का सफल समापन

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), रांची, द्वारा कक्षा 3 से 8 की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया के अंतर्गत डिजाइन, समेकन एवं समीक्षा के लिए 03 अगस्त 2026 से 07 अगस्त 2026 तक पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया गया ।इस कार्यशाला में विभिन्न जिलों से आमंत्रित शिक्षक एवं JCERT के नामित संकाय सदस्यों ने भाग लिया ।इस कार्यशाला में अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन, लैंग्वेज एंड लर्निंग फ़ाउंडेशन, रूम टू रीड, पीरामल फ़ाउंडेशन, सेंटर फॉर कैटलाइज़िंग चेंज तथा वर्ल्ड बीइंग के विषय विशेषज्ञों ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
पाण्डुलिपि समीक्षा : कक्षा 3 से 8 के लिए तैयार की जा रही पाठ्यपुस्तकों की पाण्डुलिपियों (Manuscripts) की तकनीकी, विषयगत और भाषागत गहन समीक्षा की गई ।
समेकन एवं डिजाइन : विषय-सामग्री का राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) और राज्य के स्थानीय संदर्भों के अनुसार समेकन एवं लेआउट/डिजाइन को अंतिम रूप देना।
शब्दशः आकलन : पाठ्यसामग्री के प्रत्येक पृष्ठ, पाठ, शब्दावली, व्याकरण और अभ्यास प्रश्नों का बारीकी से आकलन किया गया ।
संशोधन एवं परिमार्जन : समीक्षा के दौरान पाई गई त्रुटियों, दोहराव या अस्पष्टताओं का तत्काल संशोधन कर पाठ्यपुस्तकों को अंतिम रूप प्रदान किया गया ।
कार्यशाला की प्रमुख गतिविधियाँ
विषयवार समूह निर्माण :
समीक्षा कार्य को सुगम बनाने के लिए प्रतिभागी शिक्षकों और JCERT के नामित सदस्यों को कक्षावार एवं विषयवार (भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन/विज्ञान, सामाजिक विज्ञान) विभिन्न समूहों में विभाजित किया गया।

प्रत्येक समूह ने संबंधित कक्षा और विषय की पाण्डुलिपियों की गहनता से जाँच की। इस दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया :
आयु-अनुकूल सामग्री : कक्षा 3 से 8 के विद्यार्थियों के मानसिक स्तर के अनुरूप भाषा एवं अवधारणाओं का चयन।
समावेशी दृष्टिकोण : पाठ्यसामग्री और चित्रों में लिंग-समानता, समावेशी शिक्षा और स्थानीय संदर्भों का समावेश।
आवश्यक संशोधन एवं अद्यतनीकरण :
समीक्षा के दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर पाण्डुलिपियों में आवश्यक संशोधन किए गए, ताकि पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए बोधगम्य, रोचक और बाल-केंद्रित बन सकें।
विषय-सामग्री, डिजाइन और लेआउट में एकरूपता और गुणवत्ता का समावेश।
इस पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला में विभिन्न जिलों से आए अनुभवी शिक्षकों और JCERT के नामित संकाय सदस्यों के साझा प्रयास एवं समीक्षा से तैयार की जा रही यह पाठ्यपुस्तकें न केवल गुणवत्तापूर्ण होंगी, बल्कि राज्य के बच्चों में सीखने की प्रक्रिया को और अधिक सहज एवं प्रभावकारी बनाएंगी।

झारखण्ड शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT ),राँची द्वारा ‘जिला आकलन कोषांग‘ के सदस्यों के क्षमता संवर्धन के ...
06/08/2026

झारखण्ड शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT ),राँची द्वारा ‘जिला आकलन कोषांग‘ के सदस्यों के क्षमता संवर्धन के लिए 5 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक गैर आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इन तीन दिनों में प्रत्येक दिन 8 - 8 जिलों के नामित प्रतिभागी भाग ले रहे हैं ।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी 24 जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों एवं आकलन कोषांग के सदस्यों की क्षमता का संवर्धन करना है, ताकि :

छात्रों की अधिगम (सीखने की) प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, प्रगतिशील और परिणामोन्मुखी बनाया जा सके।
विद्यालय आधारित आकलन तथा मानकीकृत आकलन (Standardized Assessment) की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।

कार्यशाला के अंतर्गत राज्य के सभी 24 जिलों के नामित जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), डायट (DIET) प्राचार्य एवं जिला आकलन कोषांग के सदस्य अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।
प्रथम दिवस (05 अगस्त 2026):
कार्यशाला का सफलतापूर्वक शुभारंभ हुआ, जिसमें प्रथम दिवस में 8 जिलों—बोकारो, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, पलामू, गढ़वा, राँची और सिमडेगा के प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज की।
द्वितीय दिवस (06 अगस्त 2026):
द्वितीय दिवस के सत्र में अगले 8 जिलों—रामगढ़, गुमला, चतरा, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, लातेहार और लोहरदगा के जिला आकलन कोषांग के सदस्यों ने भाग लिया।
अंतिम दिवस में शेष 8 जिलों के प्रतिनिधि भाग लेंगे ।
झारखण्ड में शिक्षा की समग्र गुणवत्ता, मूल्यांकन प्रक्रिया के संवर्धन और छात्रों के सीखने के प्रतिफलों (Learning Outcomes) में सुधार की दिशा में JCERT का यह आयोजन एक और सशक्त कदम है । कार्यशाला के उपरांत सभी जिलों में मानक आकलन प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से लागू किया जा सकेगा।

राज्य में स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और डिजिटल शिक्षा (Digital Education) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से  झा...
06/08/2026

राज्य में स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और डिजिटल शिक्षा (Digital Education) को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची द्वारा 05 अगस्त 2026 से 14 अगस्त 2026 तक 10-दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
इस कार्यशाला का मुख्य ध्येय 'दीक्षा' (DIKSHA) पोर्टल पर उपलब्ध ई-सामग्री (e-Content) का गुणात्मक संवर्धन करना तथा राज्य की क्यूआर कोड (QR Code) युक्त पाठ्यपुस्तकों को और अधिक समृद्ध, व्यावहारिक एवं उपयोगी बनाना है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी शिक्षक एवं JCERT के नामित संकाय सदस्य निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर कार्य कर रहे हैं :
मानक डिजिटल पाठ योजना (Standard Digital Lesson Plans) : राज्य पाठ्यक्रम और अधिगम प्रतिफलों के सटीक संरेखण में उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल पाठ योजनाओं का निर्माण।
इंटरैक्टिव मूल्यांकन सामग्री : छात्रों के स्व-मूल्यांकन हेतु क्विज़, कार्य-पत्रक (Worksheets) और अभ्यास प्रश्नों का समावेश।
शिक्षण-अधिगम वीडियो : कठिन अवधारणाओं को सरल बनाने के लिए एनिमेटेड एवं विषय-आधारित शिक्षण वीडियो का निर्माण ।
दीक्षा पोर्टल मैपिंग एवं टैगिंग : तैयार की गई समस्त ई-सामग्री को दीक्षा पोर्टल पर अपलोड कर संबंधित पाठ्यपुस्तकों के QR कोड के साथ सफलतापूर्वक टैग करना।
इस 10-दिवसीय आवासीय कार्यशाला से राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक मानक डिजिटल अध्ययन सामग्री की पहुँच आसान होगी। शिक्षक कक्षा-शिक्षण के दौरान इन ई-सामग्री का उपयोग कर पठन-पाठन को अधिक रोचक और परिणामोन्मुखी बना सकेंगे।

-NCERT

लैंगिक समता एवं समानता पाठ्यक्रम की समीक्षा हेतु 5 अगस्त से 9 अगस्त 2026 तक आवासीय  कार्यशाला का आयोजन  झारखण्ड  शैक्षिक...
05/08/2026

लैंगिक समता एवं समानता पाठ्यक्रम की समीक्षा हेतु 5 अगस्त से 9 अगस्त 2026 तक आवासीय कार्यशाला का आयोजन झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची ,द्वारा किया जा रहा है ।

कार्यशाला का आयोजन झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में किया जा रहा है:
श्री संजय कुमार प्रसाद (उप सचिव,स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग,झारखण्ड,सम्प्रति प्रतिनियुक्त जे सी ई आर टी, राँची )
श्रीमती जयवंती देवगम (उप सचिव,स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग,झारखण्ड,सम्प्रति प्रतिनियुक्त जे सी ई आर टी, राँची )
श्री विंध्याचल पाण्डेय (उप निदेशक,झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), रांची
श्री बांके बिहारी सिंह (सहायक निदेशक,झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), रांची

कार्यशाला का कुशल नेतृत्व श्री अश्विनी कान्त मिश्र कर रहे हैं , जिसमें ICRW की ओर से नसरीन जमाल एवं अजा शर्मा तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही हैं।
पाठ्यक्रम को प्रासंगिक, समावेशी और व्यावहारिक बनाने हेतु निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रतिभागी गहन समीक्षा कर रहे हैं :-
शिक्षण पद्धतियों की समीक्षा : करिकुलम में शामिल अवधारणाओं (Concepts) और शिक्षण पद्धतियों की समीक्षा कर आयु और परिप्रेक्ष्य के अनुकूल तैयार करना।
सामग्री व विषय-वस्तु का विश्लेषण : पाठ्य-सामग्री में प्रयुक्त कहानियों, गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, चित्रों तथा चर्चा के प्रश्नों का जेंडर-संवेदी दृष्टिकोण से मूल्यांकन।
संवेदनशील भाषा एवं दृष्टिकोण : पाठ्यक्रम की भाषा को जेंडर-तटस्थ (Gender-Neutral) और सकारात्मक दृष्टिकोण से समृद्ध करना।
मूल्य संवर्द्धन : बच्चों में सामाजिक समानता, परस्पर सम्मान, सहयोगात्मक भावना और भेदभाव रहित व्यवहार को बढ़ावा देने वाले घटकों का समावेश।
कार्यशाला के दौरान अध्यापकों की भूमिका और कक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
सहज संवाद प्रक्रिया : शिक्षक कक्षा में जेंडर संबंधी संवेदनशील विषयों पर विद्यार्थियों से सरल, स्वाभाविक और बिना किसी झिझक के संवाद स्थापित कर सकें।
समान अवसर की गारंटी: कक्षा में लैंगिक भेद किए बिना सभी बच्चों को बोलने, अभिव्यक्ति, खेलकूद, अधिगम (Learning) तथा नेतृत्व/जिम्मेदारी में समान सहभागिता सुनिश्चित करना।
पाँच दिवसीय समीक्षा कार्यशाला के उपरांत प्राप्त सुझावों के आधार पर लैंगिक समता एवं समानता पाठ्यक्रम का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। अंतिम रूप से परिमार्जित एवं स्वीकृत पाठ्यक्रम को झारखण्ड के सरकारी विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे राज्य के विद्यालयों में समावेशी व समतामूलक शिक्षा का वातावरण निर्मित हो सके।

-NCERT

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् द्वारा जनजातीय भाषा सचित्र शब्दकोश निर्माण हेतु छः दिवसीय आवासीय कार्यशाला...
29/07/2026

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् द्वारा जनजातीय भाषा सचित्र शब्दकोश निर्माण हेतु छः दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन

झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), रांची के तत्त्वावधान में राज्य की जनजातीय भाषाओं—संथाली, कुड़ुख, मुण्डारी , हो एवं खड़िया—में 'सचित्र शब्दकोश' के निर्माण हेतु 26 जुलाई 2026 से 31 जुलाई 2026 तक छः दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
इस कार्यशाला में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के संकाय सदस्यों सहित राज्य के विभिन्न जिलों के विषय-विशेषज्ञ शिक्षक एवं शिक्षिकाएं सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

कार्यशाला के मुख्य बिंदु :
पाठ्यपुस्तकीय शब्दों का चयन: राज्य के सरकारी विद्यालयों के कक्षा 1 से 10 तक की पाठ्यपुस्तकों में प्रयुक्त मुख्य अवधारणाओं और तकनीकी/सामान्य शब्दावलियों को चिह्नित एवं सूचीबद्ध किया जा रहा है।
त्रिभाषीय स्वरूप : यह शब्दकोश त्रिभाषीय होगा, जिसमें प्रत्येक शब्द हिंदी, अंग्रेजी एवं संबंधित जनजातीय भाषा में अर्थ व संदर्भ के साथ दर्ज किया जाएगा।
सचित्र प्रस्तुतीकरण: प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की रुचि और समझ को ध्यान में रखते हुए शब्दकोश को दृश्यात्मक रूप देने हेतु चित्रों का समावेश किया जाएगा।
भाषाई एवं सांस्कृतिक संरक्षण: इस पहल का मुख्य उद्देश्य जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, भाषा-अधिगम को सहज बनाना और राज्य की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित करना है।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों द्वारा वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करते हुए सटीक अनुवाद और मानकीकृत वर्तनी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कक्षा 6, 7 एवं 8 के लिए  जनजातीय भाषाओं (संथाली ,मुण्डारी, कुड़ुख, हो और खड़िया) की  भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्य...
27/07/2026

कक्षा 6, 7 एवं 8 के लिए जनजातीय भाषाओं (संथाली ,मुण्डारी, कुड़ुख, हो और खड़िया) की भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्यशाला का आयोजन झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची द्वारा 23 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक आवासीय व्यवस्था के तहत किया जा रहा है ।
उद्देश्य
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—विद्यालयी शिक्षा (NCF-SE) 2023 की अनुशंसाओं के प्रकाश में,झारखण्ड की भाषायी एवं सांस्कृतिक धरोहर को विद्यालयी शिक्षा से सुदृढ़ रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है । इसका प्राथमिक उद्देश्य कक्षा 6, 7 एवं 8 के विद्यार्थियों के लिए तृतीय भाषा (R3) की निर्धारित दक्षताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, समावेशी तथा भाषिक दृष्टि से प्रामाणिक पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करना है।
यह पहल केवल एक पाठ्यपुस्तक तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक ध्येय झारखण्ड की भाषायी विविधता, जीवंत मौखिक साहित्य और समृद्ध सामुदायिक ज्ञान को सम्मानपूर्वक कक्षा तक पहुँचाना है, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा/स्थानीय भाषा में संवाद, चिंतन, सृजन एवं अभिव्यक्ति के भरपूर अवसर प्राप्त कर सकें।
कार्यशाला के दौरान भाषा-विशेषज्ञ शिक्षकों के गहन विचार-विमर्श से ऐसे विषयों व विधाओं का चयन किया गया जो विद्यार्थियों के परिवेश और आयु के अनुकूल हों:
विषय-क्षेत्र: स्थानीय लोककथाएँ, लोकगीत, कविताएँ, मौखिक परंपराएँ, सामुदायिक एवं पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति, स्थानीय आजीविका तथा समकालीन बाल-जीवन।
समीक्षा के मानक: प्रत्येक निर्मित पाठ को निम्नलिखित पाँच मुख्य कसौटियों पर परखा एवं समीक्षित किया जा रहा है:
आयु-अनुकूलता: विद्यार्थियों के मानसिक एवं संज्ञानात्मक स्तर के अनुरूप।
भाषिक प्रामाणिकता: भाषा की शुद्धता और स्वाभाविक प्रवाह।
सांस्कृतिक संवेदनशीलता: स्थानीय परंपराओं और मूल्यों का आदर।
समावेशन: सभी वर्गों और क्षमताओं के बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
अधिगम प्रतिफल : NCF 2023 द्वारा तय दक्षताओं की प्राप्ति।
तृतीय भाषा (R3) के अंतर्गत विद्यार्थियों में भाषायी प्रवीणता के क्रमिक विकास हेतु तीन वर्षों का सुनियोजित खाका तैयार किया गया है:

कक्षा 6 (आधार एवं परिचय): भाषा की बुनियादी समझ और प्राथमिक अभिव्यक्ति पर बल।
कक्षा 7 (विस्तार एवं प्रयोजनमूलक प्रयोग): व्यावहारिक संदर्भों में भाषा का प्रयोग, पठन-लेखन का विस्तार और विविध विधाओं से परिचय।
कक्षा 8 (सुदृढ़ीकरण एवं प्रगतिशील प्रवीणता): भाषा पर सुदृढ़ पकड़, स्वतंत्र चिंतन, उच्च स्तरीय अभिव्यक्ति और रचनात्मक लेखन।
पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया
कार्यशाला में पाठ्यपुस्तक विकास के लिए एक व्यवस्थित और चरणबद्ध कार्यप्रणाली को अपनाया गया है:
1.R3 साझा पाठ्यचर्या रूपरेखा एवं पाठ्यक्रम निर्धारण:प्रारंभिक चरण.
NCF-SE 2023 के आलोक में R3 के लिए साझा पाठ्यचर्या ढाँचा तैयार करना और भाषा-विशिष्ट पाठ्यक्रम की सीमा तय करना।
2.कक्षा-वार दक्षता मानचित्रण (Skill Mapping):संरचना निर्माण.
कक्षा 6, 7 और 8 के लिए अपेक्षित भाषिक दक्षताओं और अधिगम प्रतिफलों का स्पष्ट वर्गीकरण।
3.अध्याय-लेखन :रचनात्मक कार्य.
भाषा विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा चयनित विषयों (लोककथाएँ, कविताएँ, सामुदायिक ज्ञान आदि) पर पाठों का लेखन।
4.भाषिक समीक्षा :गुणवत्ता जाँच.
व्याकरण, शब्दावली, आयु-अनुकूलता और भाषिक सहजता की दृष्टि से सामग्री का सूक्ष्म परीक्षण।
5.सांस्कृतिक सत्यापन :अंतिम स्वीकृति.
यह सुनिश्चित करना कि विषय-वस्तु स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों का प्रामाणिक प्रतिनिधित्व करती हो।
राज्य के विभिन्न जिलों से आए संथाली, खड़िया, हो, मुण्डारी एवं कुड़ुख भाषाओं के विशेषज्ञ शिक्षक इस भाषा विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्यशाला में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को सहेजने और समृद्ध करने और विद्यालयी शिक्षा से इसे जोड़ने के इस पुनीत प्रयास में सभी शिक्षक पूर्ण समर्पण के साथ जुटे हुए हैं।

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DIET Campus, Kathitand, Ratu
Ranchi
835222

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