27/07/2026
कक्षा 6, 7 एवं 8 के लिए जनजातीय भाषाओं (संथाली ,मुण्डारी, कुड़ुख, हो और खड़िया) की भाषा-विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्यशाला का आयोजन झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची द्वारा 23 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक आवासीय व्यवस्था के तहत किया जा रहा है ।
उद्देश्य
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—विद्यालयी शिक्षा (NCF-SE) 2023 की अनुशंसाओं के प्रकाश में,झारखण्ड की भाषायी एवं सांस्कृतिक धरोहर को विद्यालयी शिक्षा से सुदृढ़ रूप से जोड़ने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है । इसका प्राथमिक उद्देश्य कक्षा 6, 7 एवं 8 के विद्यार्थियों के लिए तृतीय भाषा (R3) की निर्धारित दक्षताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, समावेशी तथा भाषिक दृष्टि से प्रामाणिक पाठ्यपुस्तकों का निर्माण करना है।
यह पहल केवल एक पाठ्यपुस्तक तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक ध्येय झारखण्ड की भाषायी विविधता, जीवंत मौखिक साहित्य और समृद्ध सामुदायिक ज्ञान को सम्मानपूर्वक कक्षा तक पहुँचाना है, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा/स्थानीय भाषा में संवाद, चिंतन, सृजन एवं अभिव्यक्ति के भरपूर अवसर प्राप्त कर सकें।
कार्यशाला के दौरान भाषा-विशेषज्ञ शिक्षकों के गहन विचार-विमर्श से ऐसे विषयों व विधाओं का चयन किया गया जो विद्यार्थियों के परिवेश और आयु के अनुकूल हों:
विषय-क्षेत्र: स्थानीय लोककथाएँ, लोकगीत, कविताएँ, मौखिक परंपराएँ, सामुदायिक एवं पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति, स्थानीय आजीविका तथा समकालीन बाल-जीवन।
समीक्षा के मानक: प्रत्येक निर्मित पाठ को निम्नलिखित पाँच मुख्य कसौटियों पर परखा एवं समीक्षित किया जा रहा है:
आयु-अनुकूलता: विद्यार्थियों के मानसिक एवं संज्ञानात्मक स्तर के अनुरूप।
भाषिक प्रामाणिकता: भाषा की शुद्धता और स्वाभाविक प्रवाह।
सांस्कृतिक संवेदनशीलता: स्थानीय परंपराओं और मूल्यों का आदर।
समावेशन: सभी वर्गों और क्षमताओं के बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
अधिगम प्रतिफल : NCF 2023 द्वारा तय दक्षताओं की प्राप्ति।
तृतीय भाषा (R3) के अंतर्गत विद्यार्थियों में भाषायी प्रवीणता के क्रमिक विकास हेतु तीन वर्षों का सुनियोजित खाका तैयार किया गया है:
कक्षा 6 (आधार एवं परिचय): भाषा की बुनियादी समझ और प्राथमिक अभिव्यक्ति पर बल।
कक्षा 7 (विस्तार एवं प्रयोजनमूलक प्रयोग): व्यावहारिक संदर्भों में भाषा का प्रयोग, पठन-लेखन का विस्तार और विविध विधाओं से परिचय।
कक्षा 8 (सुदृढ़ीकरण एवं प्रगतिशील प्रवीणता): भाषा पर सुदृढ़ पकड़, स्वतंत्र चिंतन, उच्च स्तरीय अभिव्यक्ति और रचनात्मक लेखन।
पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया
कार्यशाला में पाठ्यपुस्तक विकास के लिए एक व्यवस्थित और चरणबद्ध कार्यप्रणाली को अपनाया गया है:
1.R3 साझा पाठ्यचर्या रूपरेखा एवं पाठ्यक्रम निर्धारण:प्रारंभिक चरण.
NCF-SE 2023 के आलोक में R3 के लिए साझा पाठ्यचर्या ढाँचा तैयार करना और भाषा-विशिष्ट पाठ्यक्रम की सीमा तय करना।
2.कक्षा-वार दक्षता मानचित्रण (Skill Mapping):संरचना निर्माण.
कक्षा 6, 7 और 8 के लिए अपेक्षित भाषिक दक्षताओं और अधिगम प्रतिफलों का स्पष्ट वर्गीकरण।
3.अध्याय-लेखन :रचनात्मक कार्य.
भाषा विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा चयनित विषयों (लोककथाएँ, कविताएँ, सामुदायिक ज्ञान आदि) पर पाठों का लेखन।
4.भाषिक समीक्षा :गुणवत्ता जाँच.
व्याकरण, शब्दावली, आयु-अनुकूलता और भाषिक सहजता की दृष्टि से सामग्री का सूक्ष्म परीक्षण।
5.सांस्कृतिक सत्यापन :अंतिम स्वीकृति.
यह सुनिश्चित करना कि विषय-वस्तु स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों का प्रामाणिक प्रतिनिधित्व करती हो।
राज्य के विभिन्न जिलों से आए संथाली, खड़िया, हो, मुण्डारी एवं कुड़ुख भाषाओं के विशेषज्ञ शिक्षक इस भाषा विशिष्ट पाठ्यपुस्तक लेखन कार्यशाला में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को सहेजने और समृद्ध करने और विद्यालयी शिक्षा से इसे जोड़ने के इस पुनीत प्रयास में सभी शिक्षक पूर्ण समर्पण के साथ जुटे हुए हैं।