24/09/2019
पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला आंगनबाड़ी सेविकाओं पर बरसायी लाठियां, थप्पड़ मारे
राँची: करीब 44 दिनों से हड़ताल पर बैठी आंगनबाड़ी सेविकाओं का आज सब्र का बांध टूट गया. जिसका नतीजा सेविकाओं को बेतरतीब तरीके से भुगतना पड़ा. रांची के हथछुट्टे पुलिस कर्मियों ने अपना सारा गुस्सा महिलाओं पर निकाला. एक बार भी उन्होंने कानून की नहीं सोची कि वो महिलाओं को हाथ नहीं लगा सकते. ताज्जुब तो वहां खड़े पत्रकारों को सुन कर यह लगा कि एक पुलिस कर्मी महिलाओं पर हाथ साफ करने के बाद कह रहा था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. राज्य की आंगनबाड़ी सेविकाओं पर बर्बरतापुर्ण तरीके से लाठी चार्ज किया गया है. थप्पड़ भी जड़े गये हैं. पकड़ पकड़ कर डंडे से मारा गया है. इसके बावजूद महिलाएं अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहीं थीं. वे थमना नहीं चाह रही थीं. बर्बर रवैये के बावजूद जमीं हुई थीं।
पुलिसकर्मी उन्हें पुलिसिया धौंस से लगातार डरा रहे थे। सरकार जानती थी कि आंगनबाड़ी सेविका सहायिका सिर्फ महिलाएं हैं. प्रशासन को पता भी था कि ये सीएम आवास को घेरंेगी. प्रशासन को पता था कि उन्हें रोकना है, तो फिर महिला पुलिसकर्मी तैनात क्यों नहीं कराया. नहीं भी पता था तो क्या जितने देर में पुरुष पुलिसकर्मी उन्हें रोकने आए, उनपर लाठीचार्ज करने आए उतने देर में क्या महिला पुलिसकर्मी नहीं आ सकती थी. या ऐसा मान लिया जाए कि प्रशासन ने जानबुझकर पुरुष पुलिसकर्मी को ही बुलाया. मीडिया में जारी विडियो में कोतवाली थाना प्रभारी श्यामानंद मंडल एक महिला आंगनबाड़ी सेविका पर थप्पड़ जड़ रहे हैं, डंटे से मार रहे हैं. साथ ही अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं पर डंडे बरसाना कितना उचित है. ऐसा ही चलेगा तो कैसे कोई सरकार से अपना हक मांगेगा. क्या संविधान धरना प्रर्दशन का हक नहीं देता. क्या अपना हक मांगने पर महिलाओं को ऐसे ही पुरुष पुलिसकर्मियों से थप्पड़ और डंडे खाने पड़ेंगे।
महिला को पुरूष कर्मी क्यों मारेंगे
पुलिस के बल प्रयोग किये वीडियो में साफ दिख रहा है कि इन महिला सेविकाओं पर महिला नहीं बल्कि पुरूष पुलिसकर्मियों द्वारा बल प्रयोग किया गया है. इस दौरान मीडिया से बातचीत में महिला सेविकाओं ने भी नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि महिला सेविकाओं को पुरूषकर्मी दौड़ा-दौड़ा कर पीट कर रहे थे. आखिर हम सेविकाओं को पुरूष पुलिस कर्मी क्यों मारेंगे. इससे पहले धरने पर बैठी आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका ने मंगलवार लगभग 3 बजे आक्रोशित होकर राजभवन के पास लगे बैरिकेट को तोड़ राजभवन गेट के पास पहुंच गयी. इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया. खबर लिखे जाने तक कई सहायिकों के घायल होने की सूचना है. किन्हीं को हाथ में चोट लगी है तो किसी को पैरों में. इस नाराज आक्रोशित आंगनवाड़ी सेविकाएं लगातार सरकार के विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी कर रही हैं.
मांगों को लेकर 88,000 सेविकाएं हैं आंदोलन
झारखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले ये महिलाएं पिछले 21 अगस्त से आंदोलनरत है. राज्य में इनकी संख्या लगभग 88,000 है. सेविकाओं ने सरकार के समक्ष कई मांगों को रखा है. इसमें आंगनबाड़ी कर्मियों का स्थायीकरण, जनवरी 2018 में हुए समझौते को लागू करने, मानदेय के स्थान पर वेतन देने, न्यूनतम वेतन लागू करने, समान काम के लिये समान वेतन दिये जाने सहित स्वास्थ्य बीमा देने की मांग है.