16/02/2026
झारखंड Aimim- All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen में गुटबाजी चरम पर, वायरल वीडियो विवाद से संगठन में मचा घमासान बिना जांच के जिला अध्यक्ष से इस्तीफे की मांग, कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी
रांची। झारखंड में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के भीतर गुटबाजी और आपसी खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा मामला एक मामूली लेन-देन के विवाद से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर महिला से संबंध का विवाद बताकर मारपीट का रूप देकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
पार्टी से जुड़े लोगों का आरोप है कि पैसे के लेन-देन को लेकर हुए हल्के विवाद को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है। वीडियो वायरल होने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी और असंतोष बढ़ गया है।
जांच के बजाय बयानबाजी, जिम्मेदारों पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे अधिक विवाद तब बढ़ गया जब कोल्हान प्रमंडल प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर सच्चाई जानने या जांच कराने के बजाय घटना को सही मानते हुए जिला अध्यक्ष से इस्तीफा देने की मांग कर दी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रमंडल प्रभारी को पहले निष्पक्ष जांच करानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बिना तथ्यों की पुष्टि किए ही सार्वजनिक बयान जारी कर दिया।
2023 में खुद लाए, अब बदनाम करने का आरोप
पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिन जिला अध्यक्ष पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें वर्ष 2023 में कोल्हान प्रमंडल प्रभारी ने ही अपने नेतृत्व में पार्टी में शामिल कराया था। इसके बाद प्रदेश में पद पाने की मंशा से उन्होंने जिला अध्यक्ष पद भी फकरुद्दीन को सौंप दिया।
हालांकि, बाद में जब फकरुद्दीन ने जेबा खान और जेबा कादरी के समर्थन में प्रदेश महासचिव बाबर खान के साथ खड़े होकर जेबा खान का समर्थन किया, तो उनके खिलाफ कथित तौर पर बदनाम करने का अभियान शुरू कर दिया गया।
संगठन सिमटकर रह गया, 50 लोग भी नहीं सक्रिय
पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश नेतृत्व शाकिर के कार्यकाल में झारखंड में मजलिस लगातार कमजोर होती गई। उनका दावा है कि अब पूरे राज्य में मुश्किल से 50 लोग ही पार्टी में सक्रिय बचे हैं और उनमें भी गुटबाजी का माहौल है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी अब केवल शाकिर और उनके तीन करीबी लोगों तक सीमित होकर रह गई है।
ओवैसी समर्थक हजारों, पर मंच नहीं मिल पा रहा
पार्टी समर्थकों का कहना है कि झारखंड में आज भी बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी को चाहने वालों की संख्या हजारों में है, लेकिन संगठनात्मक विफलता और आपसी विवाद के कारण समर्थक एकजुट नहीं हो पा रहे हैं।
गंभीर आरोप: विरोधियों से मासिक पैकेज लेने का दावा
पार्टी के कुछ नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शाकिर पार्टी को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर करने में लगे हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह तक दावा किया कि शाकिर और उनकी टीम को विरोधियों से कथित तौर पर मासिक पैकेज मिल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पद से चिपके रहने पर उठे सवाल
पार्टी के भीतर यह सवाल भी जोर पकड़ रहा है कि लगातार विफलताओं, संगठन की किरकिरी और समर्थकों की नाराजगी के बावजूद शाकिर आखिर किस आधार पर पद पर बने हुए हैं। कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व से जवाबदेही तय करने और संगठन में सुधार की मांग की है।
पक्ष जानने की कोशिश
इस मामले में प्रदेश नेतृत्व और कोल्हान प्रमंडल प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिला।