Thikana Barkhedi

Thikana Barkhedi ठिकाना बरखेड़ी

22/01/2024
22/01/2024

आप सभी भक्तो को श्री राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भगवान राम और मां सीता जी की कृपा सदेव आप पर बनी रहे💐🎊🙏🏻🚩🚩

जय रघुनाथ जी की।🚩
22/01/2024

जय रघुनाथ जी की।🚩

30/03/2023

राजस्थान दिवस

स्वाभिमान के अखंड हस्ताक्षर , स्वतंत्रता के पुजारी , भारत माता के वीर सपूत , प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप क...
09/05/2021

स्वाभिमान के अखंड हस्ताक्षर , स्वतंत्रता के पुजारी , भारत माता के वीर सपूत , प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की जन्म जयंती के पावन अवसर पर उनके चरणो में शत शत नमन , वंदन ।

जननी जणे तो ऐडो जण के दाता कै शूर ।
नही तो रहिजे बाँझड़ी मत गमाजे नूर ।।

30/03/2021

एक मुट्ठी!
उसे लगा राजस्थान महज एक मुट्ठी बाजरे ज्यादा कुछ नहीं है। शेर शाह सूरी ने जब राजस्थान पर कब्जे के लिए जंग छेड़ी , राजा मालदेव के रण बाँकुरे योद्धाओ ने उसकी फौज को नाकों चने चबवा दिए। 1544 की बात है। मरुस्थल में दोनों सेनाओ के बीच जम कर जंग हुई। सूरी मैदान छोड़ ही रहा था कि मालदेव के दो प्रमुख सेनानी राव जैता और कुम्पा शहीद हो गए। सूरी जीत गया। लेकिन जाते जाते बोला ' खेर करो ,वर्ना एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं दिल्ली की बादशाहत खो देता !

आज राजस्थान दिवस है।
यह सूरी की ना समझी थी। राजस्थान एक मुट्ठी बाजरा नहीं है। इस विकट मरुस्थल ने संसार को न केवल बहादुर योद्धा दिए है बल्कि उद्योग व्यापार को नामवर हस्तिया भी दी है। बियाबान सहरा ने सदियों तक फनकार और गुलकारो की परवरिश की है और संगीत को अपने सीने से सहेजे रखा है। इसकी वास्तु कला को देख कर लोग सम्मोहित हो जाते है। चटक रंगो से आभा मंडित धरती का यह टुकड़ा ऐसे लगता है गोया कुदरत ने खुद कूंची चलाई हो।

दुनिया 1944 में विश्व बैंक की अवधारणा से रूबरू हुई। पर राजस्थान के मानिकचंद बंगाल फच्च कर कोई तीन सो साल पहले 'जगत सेठ' कहलाये। कहते है उनकी कोठी ऐसे लगती थी जैसे इंग्लॅण्ड का इम्पीरियल बैंक। जगत सेठ से क्या राजा क्या नवाब ईस्ट इंडिया कोम्पनी ने भी लेंन देंन किया।यह बताता है एक मुट्ठी बाजरे में कितनी ताकत है। आसाम में ज्योति प्रसाद अग्रवाल का दर्जा वैसा ही है जैसा बंगाल में टैगोर का है। वे कभी राजस्थान से आसाम जा बसे थे। आसाम में सिनेमा ,नाटक और साहित्य में उनसे बड़ा कोई नाम नहीं है। राज्य सरकार हर साल उनकी याद में शिल्पी दिवस मनाती है। सरकारी छुट्टी होती है। पूरे दिन आयोजन होते है।

रोबर्ट ब्लैकविल तीन साल भारत रहे। वे भारत में अमेरिका के राजदूत होकर आये थे। भारत उनको इतना भा गया कि एक मौके पर 'India my mother land' कह गए। ब्लैकविल भारत सब की सहिषुणता ,उदारता ,विविधता और बहुलवादी समाज के कायल होकर लौटे। लेकिन इन सब के बीच राजस्थान ने उन्हें बहुत प्रभावित किया।

वे जैसलमेर देख कर अभिभूत हो गए। कहने लगे जयपुर ,उदयपुर ,जोधपुर सब अच्छे है। पर मेरा सबसे पसंदीदा स्थान तो जैसलमेर है। उन्होंने फाइनेंसियल टाइम्स में अपने ये भाव व्यक्त किये।

'' मुझे लगता है कुछ राते तो ऐसी होती है जब दुनिया के सारे सितारे सिर्फ जैसलमेर के आसमां में ही नमूदार होकर उसे जगमग रखते है। हैरान हूँ अब तक किसी यूरोपीय मुल्क ने सितारे चुराने के लिए जैसलमेर पर मुकदमा क्यों नहीं किया - ब्लैकविल

राजस्थान में कहावत है जहाँ पानी गहरा होता है ,लोग उतने ही गहरे होते है। कुछ अपवाद भी होंगे।लेकिन अब पानी सतह पर भी है।
दुआ करते है यह गहराई अक्षुण रहेगी।
राजस्थान दिवस की शुभ कामनाये। सादर

Lt. Gen Nathu Singh Rathore was a Rare breed:- Lost his parents in childhood.-Educated at Mayo,2nd Indian officer to gra...
21/01/2021

Lt. Gen Nathu Singh Rathore was a Rare breed:
- Lost his parents in childhood.
-Educated at Mayo,2nd Indian officer to graduate from Sandhurst.
- Joined Mewar Army & later Rajput Reg.
-Descendant of legendary martyr Jaimal Rathore who fought Mughals when they attacked Chittor.

Tale of Lion among Men:

Lt. General Nathu Singh who refuted Nehru, when he wanted a British to be 1st Commander in Chief of Indian Army.

He also declined the post of Commander-in-Chief stating that Gen Carriapa deserves it more than him.

An epitome of Sacrifice & Leadership.

कहते है कि व्यक्ति की प्रतिष्ठा इसी बात से ज़ाहिर होती है कि उसके मृत्यु उपरांत अंतिम यात्रा मे कितने लोग आते है ।आज जैस...
30/12/2020

कहते है कि व्यक्ति की प्रतिष्ठा इसी बात से ज़ाहिर होती है कि उसके मृत्यु उपरांत अंतिम यात्रा मे कितने लोग आते है ।
आज जैसलमेर के महारावल बृजराज सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ इस बात का सबूत है कि फ़िल्मों या वामपंथियो के छद्म इतिहास के माध्यम से राजाओं को सामंत और अत्याचारी कहकर उन्हें कितना भी दुशप्रचारित किया गया पर जनता के मन में आज भी इनके पुरखों के त्याग और बलिदान के प्रति सम्मान और स्नेह है ।
और हां ऐसा स्नेह किसी नेता को शायद ही मिलता होगा ।
जय जैसाण जय राजस्थान जय हिंद 🙏🙏

30/12/2020

ये सम्मान उनकी सहजता/सरलता का है....

ये श्रद्धांजलि एक ऐसे महारावल को है,जो आजादी के बाद पैदा हुए और महज 52 साल की उम्र में दुनियां को अलविदा कह गये । ये अंतिम यात्रा जैसलमेर के पूर्व महारावल ब्रजराज सिंह जी की है । शहर बन्द था । बाजार बंद थे । बस खुली थी तो सजल आंखें ।

यहीं की धरती पर "रूदाली" बनाने वाले फिल्मकारों के लिए ये तस्वीरें ये बताने के लिए काफी हैं कि लोकसेवक शासकों के लिए किन्हीं रूदाली की जरूरत नहीं पड़ती ।

जब वो दुनिया छोड़ते हैं तो उनके सेवा भाव की कायल जनता सड़कों पर बिलखती भी है/उमड़ती भी है ।

नमन !

साभार - Shripal Shaktawat

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