Manish Sah

Manish Sah Director
Adijafoundation
Be a reason for someone's happiness and Spread Smile. JaiHind
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22/07/2026

करोड़ों का व्यापार... लेकिन विकास कहाँ?
अब रक्सौल को उसका हक़ मिलना चाहिए।
रक्सौल सिर्फ़ बॉर्डर नहीं, भारत की पहचान है। अब विकास का समय है, सिर्फ़ वादों का नहीं। 🇮🇳

15/07/2026

सिर्फ 2 दिन की बारिश... और रक्सौल की असली तस्वीर सामने! क्या यही है इंटरनेशनल सिटी?" 🌧️💔
😍😍

06/07/2026

रक्सौल भारत का अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार है, लेकिन क्या यहाँ आने वाले हजारों लोगों के लिए सम्मानजनक सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था है?
यह राजनीति नहीं, नागरिक सुविधा और शहर की गरिमा का सवाल है। अब समय है कि रक्सौल को स्वच्छ, आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएँ मिलें।
आवाज़ उठाइए... क्योंकि बदलाव सवाल पूछने से शुरू होता है। 🇮🇳

03/07/2026

10 लाख रुपये... और सिर्फ दो बोरी खाद?

01/07/2026

रक्सौल का बाटा चौक या रोज़ का जाम?

हर सुबह निजी बसों की अव्यवस्था से आम जनता, एंबुलेंस, स्कूल बस और स्थानीय दुकानदार परेशान हैं।

जब लक्ष्मीपुर में बस स्टैंड की घोषणा हो चुकी है, तो फिर बाटा चौक पर रोज़ जाम क्यों?

सवाल जनता का है... जवाब कौन देगा?

28/06/2026

🏏 रक्सौल के बच्चों का कसूर क्या है?
अंतरराष्ट्रीय शहर होने के बावजूद आज तक बच्चों के लिए एक भी बड़ा सार्वजनिक खेल मैदान नहीं।
गलियों और गंदगी के बीच खेलने को मजबूर हैं हमारे बच्चे।
रक्सौल को अब वादे नहीं, एक खेल मैदान चाहिए।
अगर आप सहमत हैं, तो इस आवाज़ को आगे बढ़ाइए।

25/06/2026

रक्सौल के हर नागरिक से सिर्फ 2 मिनट की अपील...
क्या आप जानते हैं?
अगर किसी शहर का वैज्ञानिक DPR (Detailed Project Report) तैयार हो जाए, तो उसी के आधार पर भविष्य की सड़कें, नाले, जलनिकासी, ट्रैफिक व्यवस्था और बड़े विकास कार्यों की योजना बन सकती है।
लेकिन सवाल यह है...
क्या रक्सौल के पास ऐसा व्यापक DPR है? अगर नहीं, तो आखिर इतने वर्षों में यह क्यों नहीं बन पाया?
इस वीडियो में जानिए— ✅ DPR क्या होता है? ✅ यह कैसे बनता है? ✅ इससे रक्सौल को क्या फायदा होगा? ✅ और क्यों यह आने वाले 20–30 वर्षों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है?
🎥 वीडियो को अंत तक ज़रूर देखें। हो सकता है, रक्सौल के विकास का सबसे बड़ा सवाल आज आपके सामने हो।
अगर आपको लगता है कि रक्सौल को योजनाबद्ध विकास की ज़रूरत है, तो इस वीडियो को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाइए।
रक्सौल का विकास केवल सड़क बनाने से नहीं, बल्कि सही योजना से शुरू होता है।
UrbanPlanning

21/06/2026

एक बड़ा सवाल रक्सौल की जनता के लिए!
नगर परिषद के अनुसार 51 समरसेबल बोरिंग पर लगभग ₹1.06 करोड़ खर्च हुए। यानी एक समरसेबल पर औसतन ₹2.08 लाख।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि एक निजी समरसेबल बोरिंग आमतौर पर ₹1 लाख से ₹1.25 लाख में लग जाती है।
अगर ऐसा है तो प्रति समरसेबल अतिरिक्त खर्च किस मद में हुआ?
क्या सभी 51 समरसेबल पूरी तरह चालू हैं?
क्या सभी वार्डों को इसका पूरा लाभ मिल रहा है?
क्या परियोजना का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा?
यह किसी पर आरोप नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग है।
जनता का पैसा है, तो जनता को हिसाब भी मिलना चाहिए।
आपके वार्ड में समरसेबल की क्या स्थिति है? कमेंट में जरूर बताइए।
Transparency BiharNews RaxaulKiAwaaz PublicAccountability WaterForAll 💧🇮🇳

20/06/2026

रक्सौल को विज्ञापनों का जंगल नहीं, हरियाली का शहर चाहिए।
अगर आप भी चाहते हैं कि रक्सौल सुंदर, स्वच्छ और हराभरा बने, तो इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
सवाल जनता का है... जवाब कौन देगा?
BiharNews JanKiAwaaz SaveRaxaul RaxaulMainRoad PublicInterest

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