03/10/2017
इतिहास पढना दरअसल अत्याचार की कहानियाँ पढ़ना है। उसे कही भी पढो, पढते हुए खुद के खुशकिस्मत होने पर हमेशा एक लज्जा का अनुभव होता है ।
भाग -1:- लज्जा इसलिए हमने इतनी महान हस्तियों को अपने फायदे के लिए कुरबान कर दिया इनमें से एक:- और सम्मान पाने के हकदार थे लाल बहादुर शास्त्री जी जिन्होंने अपना सर्वस्व दिया। इन्होंने कोई भी निर्णय लेने से पहले इसका नुकसान क्या हो सकता है देशवासियों से पहले अपने और अपने परिवार पर लागू करके देखा। देश में अनाज संकट के समय अपने बच्चों का उपवास करवा कर देखा कि मेरे बच्चे कर सकते है तो ही ये जनता कर सकती हैं। या फिर जनता को आव्हान करने से पहले अपने घर के बगीचे में प्रधानमंत्री ने स्वयं हल चलाया।
प्रधानमंत्री बनने के बाद भी शास्त्री जी के पास कार नही थी पर बाद में परिवार वालो के दबाव में शास्त्री जी ने कार खरीदी
एक साधारण आदमी होने के नाते उनके बैंक अकाउंट में उस वक्त केवल 7000 रूपये थे और कार के लिए तब शास्त्री जी ने 5000 रूपये का बैंक लोन लिया था | 1966 में जब उनकी मौत हुयी थी तब तक भी वो अपना लोन पुरी तरह चूका नही पाए थे |
देश के प्रधानमंत्री की मौत(हत्या) पाकिस्तान में होने पर किसी ने पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया लज्जा की बात तो है।
हम कभी ये नहीं कह सकते हैं कि हमारे देश की पूर्व सरकारों ने कोई काम नही किया ।
Pardeep Singh Dahiya