Sadulshahar Emitra Sangh

Sadulshahar Emitra Sangh GET ALL INFO ABOUT GOVT JOBS, RESULT, ADMIT CARD, ONLINE FOURM APLLY ON COMMON SERVICE CENTER (SADUL SHAHAR) DIST-SRI GANGANAGAR RAJSTHAN

03/08/2025
17/08/2016
15/08/2016
26/11/2014

Missed call karke jaaniye apna bank account balance....
1. Axis bank-
09225892258
2. Andra bank-
09223011300
3. Allahabad bank-
09224150150
4. Bank of baroda-
09223011311
5. Bhartiya Mahila bank-
09212438888
6. Dhanlaxmi bank-
08067747700
7. IDBI bank-
09212993399
8. Kotak Mahindra bank-
18002740110
9. Syndicate bank-
09664552255
10. Punjab national bank-
18001802222
11. ICICI bank-
02230256767

12. HDFC bank-
18002703333
13. Bank of india-
02233598548
14. Canara bank-
09289292892
15. Central bank of india-
09222250000
16. Karnataka bank-
18004251445
17. Indian bank-
09289592895
18. State Bank of india-
Get the balance via IVR
1800112211 and 18004253800
19. union bank of india-
09223009292
20. UCO bank-
09278792787
21. Vijaya bank-
18002665555
22. Yes bank-
09840909000

08/11/2014

Delete whats app
आज पीएम मोदी ने Made in india का नारा दिया है। आइए पहल करें अमेरिकन एप WhatsApp की जगह इंडियन TELEGRAM को अपनाएं। आखिर यह पहला भारतीय सोशल मीडिया एप है। चीनियों ने WhatsApp को ठुकरा कर मेड इन चाइना WeChat को अपनाया है, तो आखिर हम पहल कब करेंगे? Whats App एक साल इस्तेमाल करो और बंद करो उसकी एक सालकी कीमत 56 रुपये है भारत में कुल 20 करोड़ भारतीय Whats App इस्तेमाल करते है तो 20 करोड × 56 रुपये = 1120 करोड रुपये भारत के बाहर जानेवाला है जानकारी के लिए क्रुपया ये Message सबको भेजो और TELEGRAM डाउनलोड करो।।।
TELEGRAM में Whats App से ज्यादा Function है
1-इसमें 16mb से जाएदा 50mb का विडियो भेज सकते है।
2-इसमें word ,excel और adobe की file भी भेज सकते है।
3-इसमें ग्रुप में 50 से जाएदा 200 लोग ग्रुप में ऐड कर सकते है।
4-इसमें साल का कोई चार्ज नही पड़ता है। एकदम फ्री।
5- सबसे बड़ी बात same whatsapp की तरह चलता है। यानि कहे तोह interface whatsapp जैसा ही है। कुछ भी change नही है।
।।तोह आज ही टेलीग्राम अपनाये।।
Use TELEGRAM
🇮🇳 (TELEGRAM) is Indian🇮🇳

07/11/2014

गांव में कहावत है कि भेष से ही भीख भी मिलती है. प्रतीक की राजनीति के चलन को महात्मा से लेकर महात्मा गांधी तक ने बखूबी समझा. वर्तमान परिवेश में प्रतीकों की राजनीति के मामले में भाजपा के नये नायक से प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने बाजी मार ली है. हिन्दुत्व के चेहरे के साथ ही साथ विकास और ब्रांड की इमेज के सहारे नरेंद्र मोदी पीएम पद पर आसीन हो गए.
आज वाराणसी के जयापुर गांव में मोदी ने लोगों के दिलों को छू लिया. अपने भाषण से भविष्य का आईना जो मोदी दिखाते हैं उस आईने में अपने चमकते चेहरे को आम लोग देख रहे हैं. मोदी से आम लोगों को अपार उम्मीद है. पीएम ने जयापुर गांव को आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया. जो कि वाराणसी से 25 किलोमीटर दूर है. जयापुर की प्रधान दुर्गादेवी ने भाषण देने पहुंची लेकिन उनका माइक उनके कद से काफी ऊंचा था. इस दौरान मोदी को लगा कि छोटे कद की वजह से दुर्गा देवी माइक्रोफोन तक नहीं पहुंच पा रही है. मोदी खुद उठे और प्रधान के लिए माइक्रोफोन को खुद नीचे किया. इसके बाद दुर्गादेवी ने आसानी से अपना भाषण देना शुरू किया क्योंकि माइक उनकी पहुंच के करीब आ चुका था. यह घटना वहां उपस्थित लोगों के साथ ही पूरे देश के लोगों ने टीवी के जरिए देखा और हर जगह वाह वाही होने लगी. मोदी को माइक की ताकत का एहसास है. मोदी जमीन से जुड़े राजनेता हैं. उन्हें आम लोगों की तालियां बटोरने का हुनर पता है. याद करें कुछ साल पहले राहुल गांधी दलितों के घर खाने पर जाते थे. मिट्टी से भरी टोकरी कंधे पर ढोते देखे गए. उस वक्त भी पूरा देश देख रहा था लेकिन राहुल गांधी इस हुनर को बरकरार नहीं रख पाए. बस कुछ वक्त के लिए पोस्टर ब्वॉय बन कर रह गए. आम लोगों ने भी इसे महज तस्वीर की सियासत समझा. राहुल भावनात्मक लगाव बनाने में असफल रहे. इसकी कई वजह हैं. लेकिन मुझे लगता है यदि सारी वजहों को समेटकर कहें तो एक तरफ परिवार की राजनीति है(कांग्रेस), दूसरी तरफ परिवार छोड़कर राजनीति है(मोदी). इस अंतर को समझना होगा . अंतर सिर्फ जप और तप का है. एक चहारदीवारी में रहा व्यक्ति है जो राजकुमार की तरह रहा है दूसरा समाज के थपेड़ों के सहारे सफल होता है. मोदी सियासत के हर चरण में सफलता के हुनर को जानते हैं. अब बात केवल वाराणसी की ही करें तो चलिए कुछ वक्त पीछे चलते हैं.
वाराणसी में नरेंद्र मोदी ने कमाल की राजनीति की है. उन्होंने वाराणसी में अपना माहौल बनाने के लिए मदन मोहन मालवीय से लेकर सरदार वल्लभ भाई पटेल और गंगा मैया से लेकर भोले बाबा के प्रतीकों का सहारा लिया. इनमें से मालवीय जी, गंगा और काशी विश्वनाथ के मंदिर से वाराणसी परिभाषित होती है. मोदी ने मालवीय जी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और उनके पोते को प्रस्तावक बना कर पर्चा भरा. मदन मोहन मालवीय आजादी से पहले कई बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे. लेकिन कांग्रेस के अंदर वे नरम हिंदुत्व के समर्थक थे. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की वजह से यहां के लोगों का उनके प्रति भावनात्मक लगाव भी है और वे ब्राह्मण थे. नरम हिंदुत्व, काशी के लोगों की भावना और ब्राह्मण वोट ये तीनों मालवीय जी के नाम से साधे गए. मोदी ने सरदार पटेल की मूर्ति पर फूल चढ़ाए. सरदार पटेल भी कांग्रेस में नरम हिंदुत्व के लिए जाने जाते हैं. पटेल की वजह से वोट का एक बड़ा समूह भी साथ में जुड़ा. काशी-विश्वनाथ और गंगा तो खैर बनारस की पहचान हैं ही. मोदी ने बहुत बेहतर ढंग से तमाम प्रतीकों का इस्तेमाल किया. अब जरा वक्त का पहिया और पीछे ले चलते हैं.
मोदी की राजनीति पर नजर दौड़ाएं. चाय की चुनावी चौपाल से असली चाय वाला नेपथ्य में चला गया और केतली लिए भाजपा के दिग्गज नेता फ्रंट पर दिखने लगे. मोदी को बैठे बिठाए सब्जेक्ट देकर कांग्रेस का जायका शायद बिगड़ गया था. विकास का प्रतीक बन बैठे मोदी आइडिया देकर चाय पिलाने में मस्त थे और उनके समर्थक नमो टी स्टाल लगाकर चुनाव तक जमे रहें. मोदी ने चाय पर चुस्कियां ली और करीब हर चौपाल पर चाय पर लिखे लेख पढ़े. चाय से चाह बढ़ती है. चाय से गरीबों का ब्यापार बढ़ता है चाय का ठेला फुटपाथ का संसद है. चाय बेचकर बहुत कुछ सीखा है. मोदी अपने अतीत का जिक्र कर भविष्य का रास्ता तय करने के लिए हर नुस्खा अपनाएं.
चाय तो बहाना था मकसद तो सिंहासन पाना था. हिन्दुस्तान के चौराहों को चाय का परिचय कराने वाले अंग्रेजों को क्या पता था कि तकल्लुफ, तमीज और तीमारदारी की प्रतीक यही चाय एक दिन देश की राजनीति का चेहरा बन जाएगी. सियासत के गर्म चुल्हे पर अरमानों का पानी उबाल मार रहा था. मुद्दों की पत्ती रंग ला रही थी. वायदों की शक्कर डाली गई. वोट की भांप में मोदी ने सिंहासन पाने के ख्वाब को हकीकत में बदल दिया . सत्ता के सपने अभी भी परवान पर हैं. मोदी का मिशन राज्य और दस साल तक राज करने की चाहत दोनों को पूरा करने के लिए मोदी अपने को आम साबित करने का कोई मौका हाथ से छोड़ना नहीं चाहते हैं. उसकी बानगी आज जयापुर में दिखी.
मोदी के भाषणों के शब्दों में भी प्रतीक की राजनीति की झलक दिखती है. धुव्रीकरण की गुंजाइश दिखती है, तो विकास और ब्रांड का इमेट भी बरकरार रहता है. आप गौर करें तो अपने विरोधियों पर हमला करते हुए उनके शब्दों का चयन कैसा होता है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोदी शहर से लेकर गांव तक के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं. आम लोगों के बीच नरेंद्र मोदी ऐसे भारतीय नेता के प्रतीक बन गए हैं जो आया है तो सब ठीक कर देगा.

07/11/2014

वित्त मंत्रालय बीसी पर रुपे कार्ड उपकरणों को स्थापित करने के लिए सलाह देते हैं
बीसी के रूप में काम कर रहे सभी सीएससी रुपे कार्ड मशीनों की खरीद की जरूरत है. इस सीएससी के साथ कार्ड आधारित लेन-देन की प्रक्रिया में सक्षम हो जाएगा.
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वित्त मंत्रालय इस सलाह दी है कि ग्राहक ई.पू. स्थानों पर रुपे कार्ड के माध्यम से लेन-देन की प्रक्रिया कर सकते तो ई.पू. स्थानों पर एक बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता के रूप में शामिल करने के रूप में बीसी के रूप में काम कर रहे सभी सीएससी अब रुपे कार्ड मशीनों की खरीद करनी होगी.
दिशा निर्देशों के अनुसार वर्तमान में तैनात प्रमाणन उपकरणों ई.पू. प्रक्रिया कार्ड वर्तमान लेनदेन आधारित नहीं कर सकते हैं एक परिणाम के रूप में, कार्ड रीडर या पिन आधारित प्रमाणीकरण की क्षमता नहीं है.

24/06/2014

Rajasthan
Post Date Recruitment Board Post Name Qualification Advt No Last Date More Information
19/06/2014 Collector Office, Sri Ganganagar Drivers – 06 Posts VIII Class with Valid HMV/LMV Driving License . 23/06/2014 Get Details
13/06/2014 RPSC Agriculture & Asst Agriculture Research Officers – 57 Posts M.Sc (Chemistry/Soil Science) . 30/06/2014 Get Details
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