16/02/2026
जनसंसद में भारत के पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई - उनकी पीड़ा सुनकर मन व्यथित है।
जब कोई जवान देश के लिए अपना शरीर और जीवन दांव पर लगाता है, उसकी सेहत की जिम्मेदारी देश की होती है। हर सरकार ने यह कर्तव्य पूरी शिद्दत से निभाया - सिवाय इस मोदी सरकार के।
हमारे सामने दो उदाहरण हैं - ECHS और disability pension।
पहला उदाहरण - ECHS
एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) को जानबूझकर फंड की कमी में रखा गया है। मोदी सरकार अस्पतालों को 9-9 महीने तक भुगतान नहीं करती, और कम पैसे देने के हर तरीके अपनाए जा रहे हैं।
पिछले 3-4 वर्षों का बकाया लगभग ₹12,000 करोड़ रुपये का है - इसी वजह से अस्पताल सिस्टम से बाहर हो रहे हैं, जिससे लाखों से ज़्यादा पूर्व सैनिकों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जवानों को भी समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
दूसरा उदाहरण - विकलांगता पेंशन
1922 से लेकर आज़ादी के बाद हर सरकार ने युद्ध में घायल सैनिकों की विकलांगता पेंशन पर आयकर नहीं लगाया। अब पहली बार इस परंपरा को तोड़ा जा रहा है - मोदी सरकार में।
बजट में कहा कि लड़ते हुए घायल होकर भी सेवा जारी रखने वाले पूर्व सैनिकों से टैक्स वसूला जाएगा।
जिन्होंने हर चोट खाकर भी देश की सेवा की - आज उन्हीं से उनकी तकलीफ़ पर टैक्स माँगा जा रहा है।
ये दोनों फैसले वित्तीय नहीं हैं, यह नैतिक पतन है।
जो सरकार दूसरों को देशविरोधी कहने में आगे रहती है, वही हमारे सैनिकों की सुरक्षा और सम्मान से खिलवाड़ कर रही है - वो सैनिक, जो हमें सुरक्षित रखने के लिए कभी बलिदान देने से पीछे नहीं हटते।