01/06/2026
जम्मू-कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर जम्मू से श्रीनगर तक मार्च कर रहे साथियों की गिरफ्तारी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। संविधान और कानून के तहत अपने अधिकारों की मांग कर रहे लोगों की आवाज़ को दबाने का यह प्रयास स्वीकार्य नहीं है।
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट रज्जत रमित जी, भीम आर्मी परवासी विंग के अध्यक्ष बलराम अहीरवार जी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सचिव सुरिंदर अत्री जी को जम्मू पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बाग-ए-बहू पुलिस स्टेशन में रखा जाना अत्यंत निंदनीय है। यह कार्रवाई जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
हमारे साथी एसटी समुदाय, विशेष रूप से गुज्जर-बकरवाल समाज के लोगों के अधिकारों की रक्षा तथा वन अधिकार अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से संवाद करना चाहते थे। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद का स्वागत होना चाहिए, न कि शांतिपूर्ण आवाज़ों को गिरफ्तार कर दबाने का प्रयास।
वन अधिकार अधिनियम, 2006 जनजातीय एवं परंपरागत वनवासी समुदायों को भूमि, आवास, आजीविका और सामुदायिक संसाधनों पर वैधानिक अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में इन अधिकारों के क्रियान्वयन की मांग करना कोई अपराध नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है।
हम से मांग करते हैं कि सभी गिरफ्तार साथियों को तत्काल रिहा किया जाए और जनजातीय समुदायों की न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक एवं संवेदनशील पहल की जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम), भीम आर्मी और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले संगठन लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन चलाने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।