23/06/2024
असल में महाभारत कालीन और उससे पूर्व रामायण कालीन ज्ञान महाभारत युद्ध में ही समाप्त हो गया था।जिसके समाप्त होने का दोष मुगलों और अंग्रेजो के सिर पर मढ़ा जाता है। क्योंकि महाभारत का युद्ध तो रामायण काल के बाद हुआ था और आज से लगभग पांच हजार साल पहले हुआ था जबकि उसके बाद भी देश में हजारों वर्षों तक जीवन चलता रहा और केवल सनातन धर्मी हिंदुओं का ही राज रहा है।इसी युग में अशोक,चंद्र गुप्त मौर्य,हर्षवर्धन ,भोज और विक्रमादित्य जैसे प्रतापी राजा हुए जिनके काल में रचे गए शास्त्र और पंचांग आज भी सुरक्षित हैं।उस वक्त तो मुगल और अंग्रेज देश में कहीं नहीं थे तो फिर इस काल में पूर्व वर्ती वैज्ञानिक ज्ञान किसने नष्ट किया यहां तक कि आदि काल में रचित वेद, पुराण,रामायण आदि ग्रंथ भी पूर्ण सुरक्षित हैं और आज भी उपलब्ध हैं।फिर वो कौनसी वैज्ञानिक किताबें हैं जिनको हिंदू धर्म के धार्मिक शास्त्रों को छोड़कर नष्ट किया गया या चुराया गया जिसका फायदा अपने महान राजाओं चंद्र गुप्त ,अशोक और विक्रमादित्य आदि के स्वर्णिम काल में भी हम नहीं उठा पाए और अब झेंप मिटाने के उसके नष्ट या गायब हो जाने का आरोप मुगलों और अंग्रेजो के सिर पर मढ देते हैं।और सबसे खास बात आदिकालीन हमारे सभी धार्मिक ग्रंथ आज भी सुरक्षित हैं उनको किसी ने नष्ट नही किया जबकि मुगलों का तो खास मकसद देश की जनता के धार्मिक अस्तित्व के खिलाफ ही था,इसी कड़ी में उन्होंने बौद्ध शिक्षा केंद्र नालंदा को नष्ट कर दिया था।फिर भी हिंदू समाज के सभी धार्मिक ग्रंथ सुरक्षित रहे।असल में या तो ऐसा कोई ज्ञान था ही नहीं या फिर उसको धर्म शास्त्रों की तरह से पुस्तकों में सहेज कर रखने का काम नहीं किया अगर उस ज्ञान का भी कोई शास्त्र होता,तो रामायण ,महाभारत ,पुराणों और पंचांग की तरह से वो भी आज सुरक्षित रहता जैसे मुगलों और अंग्रेजो के आने के बाद भी हमारा सारा धार्मिक ज्ञान वेद, पुराण,रामायण और पंचाग आदि आज भी सुरक्षित हैं।वास्तव में देश में मुगलों का आना तो सातवीं शताब्दी के बाद शुरू हुआ था तो फिर सातवीं शताब्दी से पहले देश को दुर्लभ वैज्ञानिक ज्ञान और उससे निर्मित वस्तुओं के दर्शन क्यों नही हुए थे,उस वक्त तो चमत्कारिक तीर और धनुष भी गायब हो गए थे जिसके बाद अंग्रेजो और मुगलों ने केवल बारूद के गोलों से देश को गुलाम बना लिया था।उस वक्त तो दुर्लभ ज्ञान के दावे करने वाले हिंदू समाज को बारूद का भी ज्ञान नहीं था।