Ravindr choudhary journalist-page

Ravindr choudhary journalist-page i m a jouranalist and advocate

23/06/2024

असल में महाभारत कालीन और उससे पूर्व रामायण कालीन ज्ञान महाभारत युद्ध में ही समाप्त हो गया था।जिसके समाप्त होने का दोष मुगलों और अंग्रेजो के सिर पर मढ़ा जाता है। क्योंकि महाभारत का युद्ध तो रामायण काल के बाद हुआ था और आज से लगभग पांच हजार साल पहले हुआ था जबकि उसके बाद भी देश में हजारों वर्षों तक जीवन चलता रहा और केवल सनातन धर्मी हिंदुओं का ही राज रहा है।इसी युग में अशोक,चंद्र गुप्त मौर्य,हर्षवर्धन ,भोज और विक्रमादित्य जैसे प्रतापी राजा हुए जिनके काल में रचे गए शास्त्र और पंचांग आज भी सुरक्षित हैं।उस वक्त तो मुगल और अंग्रेज देश में कहीं नहीं थे तो फिर इस काल में पूर्व वर्ती वैज्ञानिक ज्ञान किसने नष्ट किया यहां तक कि आदि काल में रचित वेद, पुराण,रामायण आदि ग्रंथ भी पूर्ण सुरक्षित हैं और आज भी उपलब्ध हैं।फिर वो कौनसी वैज्ञानिक किताबें हैं जिनको हिंदू धर्म के धार्मिक शास्त्रों को छोड़कर नष्ट किया गया या चुराया गया जिसका फायदा अपने महान राजाओं चंद्र गुप्त ,अशोक और विक्रमादित्य आदि के स्वर्णिम काल में भी हम नहीं उठा पाए और अब झेंप मिटाने के उसके नष्ट या गायब हो जाने का आरोप मुगलों और अंग्रेजो के सिर पर मढ देते हैं।और सबसे खास बात आदिकालीन हमारे सभी धार्मिक ग्रंथ आज भी सुरक्षित हैं उनको किसी ने नष्ट नही किया जबकि मुगलों का तो खास मकसद देश की जनता के धार्मिक अस्तित्व के खिलाफ ही था,इसी कड़ी में उन्होंने बौद्ध शिक्षा केंद्र नालंदा को नष्ट कर दिया था।फिर भी हिंदू समाज के सभी धार्मिक ग्रंथ सुरक्षित रहे।असल में या तो ऐसा कोई ज्ञान था ही नहीं या फिर उसको धर्म शास्त्रों की तरह से पुस्तकों में सहेज कर रखने का काम नहीं किया अगर उस ज्ञान का भी कोई शास्त्र होता,तो रामायण ,महाभारत ,पुराणों और पंचांग की तरह से वो भी आज सुरक्षित रहता जैसे मुगलों और अंग्रेजो के आने के बाद भी हमारा सारा धार्मिक ज्ञान वेद, पुराण,रामायण और पंचाग आदि आज भी सुरक्षित हैं।वास्तव में देश में मुगलों का आना तो सातवीं शताब्दी के बाद शुरू हुआ था तो फिर सातवीं शताब्दी से पहले देश को दुर्लभ वैज्ञानिक ज्ञान और उससे निर्मित वस्तुओं के दर्शन क्यों नही हुए थे,उस वक्त तो चमत्कारिक तीर और धनुष भी गायब हो गए थे जिसके बाद अंग्रेजो और मुगलों ने केवल बारूद के गोलों से देश को गुलाम बना लिया था।उस वक्त तो दुर्लभ ज्ञान के दावे करने वाले हिंदू समाज को बारूद का भी ज्ञान नहीं था।

04/08/2023

जब देश का मुखिया ही गरीब आम जनता की सरकारी मदद को फ्री की रेवड़ी बताकर इसकी निंदा करने लगे तो फिर उस सरकार से आम आदमी को कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।यानि न तो खुद सरकार के पैसे से आम जनता की कोई मदद करनी है और न किसी और को करने देनी है।जबकि सरकार के पास सरकारी पैसा तो जनता का ही पैसा होता है जो जनता टैक्स के रूप में अदा करती है और टैक्स हर आदमी किसी न किसी रूप में देता है फिर जनता के पैसे से जनता की मदद फ्री की रेवड़ी कैसे हो सकती है।वह तो जनता के पैसों का खजाना होता है जिसके जन हित में सही इस्तेमाल करने के लिए ही जनता सरकार को चुन कर अपने खजाने का मालिक बना देती है।उस खजाने से गरीब ,,जरूरत मंद लोगों की मदद सरकार की पहली प्राथमिकता होती है।लेकिन ये बहुत गलत बात है कि नेता सत्ता में आकर जनता के इसी पैसे से खुद के तो हजारों शौक पूरे करते रहते हैं करोड़ो के जहाजों में घूमते फिरते हैं मगर जब उस पैसे से जनता की मदद की बात आती तो उसको फ्री की रेवड़ी बताने लगते हैं ।जनाब असली फ्री की रेवड़ी तो वह है जो जनता का पैसा मंत्रियों के अनाप शनाप खर्चों पर खर्च किया जाता है और जिससे विधायको और सांसदों को सैलरी दी जाती है और पेंशन दी जाती है और अधिकारियों के भी अनाप शनाप खर्चे जनता के पैसों से उठाए जाते है।इसके मुकाबले गरीब जनता की सरकारी पैसे से मदद फ्री की रेवड़ी नहीं होती बल्कि सरकार का फर्ज होता है।

23/07/2023

देश का आर्थिक विकास तो उस काल में ज्यादा सबसे ज्यादा हुआ था जब जनहित की सुविधाएं,सार्वजनिक वितरण प्रणाली(राशन डिपो) से सस्ते गल्ले का वितरण ,पेंशन,गैस सब्सिडी, खाना पकाने के लिए सस्ते मिट्टी के तेल की सुविधा और वरिष्ठ नागरिकों ,खिलाड़ियों को रेल किराए में छूट आदि जन कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई थी।अब तो जब सरकार ने इनमे से अधिकतर जनहित की सुविधाएं भी बंद कर दी हैं तो फिर भी देश के आर्थिक विकास की लुटिया लगातार डूब रही है।शायद उस वक्त सरकारी मदद के बदले देश की गरीब जनता और बुजुर्गो का आशीर्वाद भी सरकार के साथ होता था।जनाब केवल सड़को और पुलों और हाई वे का निर्माण ही देश का विकास नहीं होता देश का असली विकास तो जनता की खुशहाली में छिपा होता है जब जनता में अधिकतर परिवार गरीबी की रेखा से ऊपर उठकर अमीरी रेखा में प्रवेश करते है उसी को देश का असली विकास कहा जाता है।आज मंहगाई और बेरोजगारी के कारण जनता का आर्थिक विकास रुक गया है बल्कि अवनति की ओर अग्रसर है और सरकार केवल हाई वे और पुलों के निर्माण से ही खुश होकर विकास के गीत गाती रहती है।

21/07/2023

बीजेपी सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण मुनाफाखोर हिंदू व्यापारी वर्ग की मौज आ गई है जो सरकार में अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं।यू पी में बिजली उपभोताओं के घरों में लगाए गए स्मार्ट मीटर सरकार के साथ मुनाफाखोर व्यापारियों के इसी गठजोड़ का नतीजा है।किसी मुनाफाखोर व्यापारी ने सरकार को स्मार्ट के फायदे गिनवा कर मीटर सप्लाई का करोड़ों का ठेका ले लिया था अब वही स्मार्ट मीटर जनता को दुखी कर रहे हैं जिनसे व्यापारियों के तो करोड़ो के वारे न्यारे हो गए लेकिन बदले में जनता को केवल इतना मिला कि अब बिना पूर्व सूचना के बिजली विभाग को मामूली बिल पर भी हर महीने बिजली बंद करने का हथियार मिल गया जबकि किसी जमाने में बिजली काटने से पूर्व 15 दिन का नोटिस देना जरूरी था और यह भी निर्देश था कि 5 हजार से कम के बकाया पर बिजली नहीं काटी जायेगी केवल नोटिस के जरिए चेतावनी दी जाएगी और उसको भी किश्तों में जमा करने की छूट होगी।लेकिन इस राज में ये तो बीते युग की बात हो चुकी हैं अब तो यू पी में स्मार्ट मीटर का जमाना है आपकी बिजली मात्र पांच सौ रूपये के बिल पर भी जब चाहे अचानक पूर्व सूचना के बिना बंद की जा सकती है। वाह रे अच्छे दिनों की सरकार।स्मार्ट मीटर में तो बिल जमा होने के बाद भी बिजली काटने की खबरें मिलती रहती है।आखिर इन स्मार्ट मीटर से आम जनता को अघोषित बिजली कटौती और बढ़े बिलों के अलावा क्या हासिल हुआ।

17/07/2023

इस दौर में जरूरत मंद की मदद करना भी फ्री की रेवड़ी बता कर अपराध बना दिया गया।जनाब शिक्षा और स्वास्थ्य के अलावा भी आम आदमी की बहुत सी जरूरतें होती हैं जिनके लिए पैसे की जरूरत होती है।सीमित आमदनी वाले आम आदमी की जेब में हर जरूरत पूरी करने के लिए पैसे नहीं होते उनकी मदद कैसे होगी ये भी सबसे बड़ा सवाल होता है? इसलिए ऐसे जरूरत मंदों की मदद के लिए ही सरकार आर्थिक रूप से मदद करने के लिए भी नकद राशि प्रदान करने की योजनाएं चलाती है।वृद्धावस्था और विकलांग पैंशन योजना इसी मदद का हिस्सा हैं।ये फ्री की रेवड़ियां नहीं मजबूर और बेसहारा लोगों की मदद होती है।यही बात बिजली के बिल और खाना पकाने की गैस पर भी लागू होती है क्योंकि इन में राहत मिलने पर बची धनराशि सीमित आमदनी वाला आम आदमी अन्य जरूरतों पर खर्च कर सकता है।

17/07/2023

मुश्किल से 40या 45 साल पुरानी बात है और हमारी होश का ही मामला है जब खेती में गेंहू की पैदावार में अनाज बहुत कम निकलता था और भूसा ज्यादा होता था,उस जमाने में बैलों से खेती होती थी और सिंचाई के लिए भी केवल रहट का सहारा था।मुश्किल से बहुत कम खेतों की सिंचाई हो सकती थी अधिकतर बरसात के भरोसे ही खेती की जाती थी।असल में उस वक्त गेंहू का पौधा लगभग चार फिट लम्बा होता था जबकि गेंहू के दानों की बाली मात्र एक इंच की होती थी तो फिर इतनी छोटी बाली में निश्चित रूप से गेंहू की पैदावार कम ही हो सकती थी।बल्कि बाजरे और मक्का की बाली बड़ी होती थी तो किसान अधिकतर उनको ही पैदा किया करता था उनकी फसल कम लागत में भी अच्छी मिल जाती थी इसलिए उन दिनों में देहात के घरों में बाजरे और मक्का की रोटी खाने का ही चलन था गेंहू रोटी तो केवल मेहमानो के लिए बना करती थी।उसके बाद इंदिरागांधी का राज आया तो उन्होंने खेती की दशा सुधारने के लिए बैंको का राष्ट्रीय करण किया जिनकी पूंजी का लाभ उस वक्त तक केवल धन्ना सेठ ही उठाया करते थे।इंदिरगांधी ने बैंकों का राष्ट्रीय करण करके उनके दरवाजे आम आम आदमी के लिए भी खोल दिए थे जिसके कारण शहरों में भी छोटे उद्योग लगने लगे थे और खेती में तो स्वर्ण युग आ गया था किसानों को बैंको से दिल खोलकर आसान किस्तों पर कर्ज दिलाए गए जिसकी वजह से तत्काल खेती बैलों से ट्रैक्टर पर और रहट से ट्यूब वेल पर आ गई थी।इसके अलावा इंदिरा गांधी ने कृषि वैज्ञानियों को भी अधिक पैदावार वाली प्रजातियों को खोजने के लिए प्रेरित किया उसके बाद कृषि वैज्ञानिकों की मेहनत से देश में कृषि पैदावार में भी क्रांति आ गई थी।नए बीज की किस्मों से फसलों की पैदावार में भी बीस गुना बढ़ौतरी हो गई थी,गेंहू की भरपूर फसल हो जाने के बाद देश का आम आदमी भी गेंहू की ही रोटी खाने लग गया था जो कभी केवल मेहमानो के लिए बना करती थी।पैदावार बढ़ने से किसानों के तन पर भी अच्छे कपड़े आ गए थे।इस तरह कृषि क्रांति और छोटे उद्योगों को बढ़ाने की नीति ने रातों रात देश की आर्थिक तकदीर बदल दी थी।जनाब देश की आम जनता को खाने में गेंहू की रोटी खाना कांग्रेस के राज में ही नसीब हुआ था और बच्चो के तन पर कच्छों की जगह पेंट कमीज भी उसी कांग्रेसी राज में उनकी बेहतर आर्थिक नीतियों से आई थी, फिर भी कुछ एहसान फरामोश लोग सवाल करते हैं कि कांग्रेस ने 70 साल में क्या कियाथा।लानत है।

03/07/2023

दलित समाज और पिछड़े वर्ग की राजनीति दिशा हीन हो गई है,इसका सबसे बड़ा कारण इस वर्ग की जातियों के राजनेता हैं जिन्होंने अपने राजनैतिक स्वार्थ में पिछड़े वर्ग और दलित जातियों के हितों को बेच दिया है और केवल मंत्री पद के लालच में सत्ता की गोद में बैठ गए हैं।जनाब आरक्षण की लड़ाई क्या केवल मंत्री पद हासिल करने के लिये लड़ी गई थी? बिल्कुल नहीं आरक्षण की लड़ाई केवल सरकारी नौकरियों में पिछड़े और दलित वर्ग को उचित अवसर प्रदान कराने के लिए लड़ी गई थी।अब जब सरकारी नौकरियां ही खत्म की जा रही हैं तो फिर आरक्षण का क्या औचित्य रह जायेगा।ये बात सत्ता की मलाई खाने वाले पिछड़े और दलित समाज की जातियों के ठेकेदारों को नजर नहीं आ रही है।सत्ता की काली पट्टी में इन नेताओं को अपने समाज का इतना बड़ा अहित होते नजर नहीं आ रहा है।आज बीजेपी कहती है कि हमने केंद्र सरकार में 29 पिछड़े वर्ग के लोगों को मंत्री बनाया है।पिछड़े वर्ग की जातियों के ठेकेदार नेता जवाब दे कि क्या आरक्षण की लड़ाई केवल केंद्र सरकार में मंत्री पद हासिल करने के लिए लड़ी गई थी आखिर मंडल कमीशन की रिपोर्ट का उद्देश्य क्या था सीधी सी बात है मंडल कमीशन की रिपोर्ट केवल सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग के लिए 27% आरक्षण की थी केंद्र सरकार में मंत्री पद के आरक्षण की नहीं थी।इसीलिए मंत्री पद से संतुष्ट होने के बजाए इस सरकार से ये सवाल होना चाहिए कि जनाब पिछले 9 साल के कार्यकाल में आपकी सरकार की ओर से पिछड़े वर्ग के लोगों को कितनी सरकारी नौकरियां दी गई।आरक्षण कोटे के हिसाब से कितने बेरोजगार नौजवान सरकारी नौकरियों में भर्ती किए गए।पिछड़े वर्ग का नौजवान तो बेहतर सरकारी नौकरियों की तलाश में सड़को पर धक्के खा रहा है जबकि उसके समाज के नेता उनके समर्थक के दम पर सत्ता की मलाई खा कर मस्त हैं।बहुत ही शर्मनाक बात है।तरीके से सरकारी नौकरियां खत्म की जा रही हैं और जो पद खाली इन पर भर्ती नहीं की जा रही है,तीन लाख नौकरियों के पद तो रेलवे में ही खाली पड़े हैं फिर भी वंचित वर्ग के नेता इस पर सरकार से कोई सवाल नहीं करते क्योंकि उनका मुंह सरकार ने मंत्री देकर बंद कर रखा है।यू पी में तो पिछड़े वर्ग की जातियों की राजनैतिक पार्टियों की भरमार है लेकिन इन पार्टियों के नेता समाज की ताकत का इस्तेमाल केवल अपना राजनैतिक स्वार्थ साधने में कर रहे हैं सरकारी नौकरियों के लिए तरसती समाज के बेरोजगार युवकों की परेशानी से इनको कुछ मतलब नहीं रहा बस इनका संघर्ष केवल मंत्री पद तक सिमट गया है।

26/06/2023

सबका साथ सबका विश्वास । बराक अब तू ही पूछ ले अपने दोस्त से। मैं तो वैसे भी तुमसे तू-तारी नहीं करता। रोटी तरकारी के इंतज़ाम में दिन कट जाता है। मैं तेरे मोहल्ले में बड़ा हुआ न तेरे संग पतंग उड़ाई है

26/06/2023

जयप्रकाश नारायण जी ने देश चलाने के लिये राजनीति में भानमती का कुनबा जोड़ कर जनहित के एक आंदोलन को बर्बाद कर दिया था।बेहतर होता इंदिरा गांधी के खिलाफ जिस जनांदोलन को उन्होंने खड़ा किया था खुद ही नई पार्टी बनाकर देश को नया नेतृत्व प्रदान करते। लेकिन ऐसा करने के बजाए जयप्रकाश जी ने देश को चलाने के लिये राजनीति की बेमेल खिचड़ी पकाने का काम किया और इसके लिये नाकारा नेताओ को भी साथ मे जोड़ लिया था। मोरार जी देसाई जिन्हें कांग्रेस के अंदर ही देश की जनता नकार चुकी थी उनको विशेष तौर पर गुजरात जाकर लेकर आये थे इसके अलावा जयप्रकश जी तात्कालिक राजनैतिक फायदे के लिये धर्म निरपेक्ष दलों,वामदलों और दक्षिण पंथी बी जेपी आदि सभी को एक मंच पर ले आये थे और विचारों के घालमेल की अद्भुद राजनीतिक जमात जनता पार्टी के रूप में जनता के सामने खड़ी कर दी थी।जिसमे अधिकतर सत्ता के लालची नेता थे जो केवल सत्ता पाने के लिये एक मंच पर आए थे जय प्रकाश नारायण के परिवर्तन के नारे से इनको कोई मतलब नही था यही कारण था प्रधानमंत्री बनने के बाद मोरारजी देसाई उनके सारे एहसानों को भूल गए थे यहाँ तक कि जय प्रकाश नारायण जी की बीमारी में हाल चाल पूछने के लिये जाने से भी ये कह कर मना कर दिया था कि मैं तो कभी गांधी को देखने नही गया ये क्या चीज हैं ये अहसान फरामोशी की इन्तिहा थी इन्ही मोरारजी ने मित्रता में बहकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक को भारत के खुफिया राज बता दिये थे असल मे जिया इनकी मूत्र पान की प्रसंसा किया करते थे।इसी तरह जनता पार्टी के अन्य नेता भी देश की भलाई के बजाय सत्ता संघर्ष में उलझ गए थे जिस कारण मात्र ढाई साल में ही जनता की उम्मीदें चकना चूर हो गई थी और जनता पार्टी की सरकार गिर गई थी और इसी के साथ एक महाक्रांति भी असफल हो गई थी।वैसे बी जेपी को जरूर जय प्रकाश नारायण जी का आभारी होना चाहिये कि उनके कारण बीजेपी को विपक्ष के साथ जुड़कर कर बड़ी राजनैतिक शक्ति बनने का मौका मिल गया था क्योंकि जनता पार्टी में शामिल होने के बाद ही बी जे पी के दो से अस्सी(80)सांसद हो गए थे और बी जेपी को पहली बार देश में सत्ता का स्वाद भी चखने को मिल गया था जिसके बाद बी जे पी ने कभी मुड़कर नही देखा।खैर जयप्रकाश नारायण जी जंहा एक सफल महाक्रांति के नायक थे फिर खुद ही उसकी असफलता का कारण भी बन गए थे।और अब बीजेपी जिस इमरजेंसी के खिलाफ रोना रोती रहती है वही इमरजेंसी देश में बीजेपी के लिए सत्ता हासिल करने का वरदान बन गई थी क्योंकि इमरजेंसी की कोख से ही जय प्रकाश जी जरिए जनता पार्टी के माध्यम से बीजेपी के लिए सत्ता के दरवाजे खुल गए थे।

19/06/2023
19/06/2023

सरकारी नौकरियां का देश की सामाजिक और आर्थिक दशा सुधारने में बड़ा योगदान होता था क्योंकि बेहतर तनखाह के कारण सरकारी नौकर परिवार की सारी जिम्मेदारियां आसानी से निभा लेता था,अच्छी आमदनी के कारण उसको बूढ़े मां बाप का खर्च वहन करने,अपने बच्चो की बेहतर पढ़ाई के लिए खर्च करने,बिटिया और बहन की शादी के लिए पैसे बचाने और खुद का घर बनाने के लिए भी पैसों की कमी नहीं होती थी।इसके अलावा जब अच्छी सैलरी से बेहतर पैसे घर की जरूरत के लिए पत्नी के हाथ में होते थे तो वो उसके बाद बाजार का रुख करती थी जिससे बाजार में भी रौनक आती थी जिस कारण दुकानदारों के साथ2 उनसे जुड़े कर्मचारियों के चेहरे भी खिल जाते थे।बाजार की रौनक से जरूरत के सामान की आपूर्ति बढ़ने से उद्योग पतियों को भी उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलता था।जबकि 15 बीस हजार की निजी नौकरियों में ये सब कुछ संभव नहीं होता इसलिए सरकारी नौकरियों को गालियां बकने वाले अंध भक्तो को पता होना चाहिए कि बेहतर सरकारी रोजगार के अभाव में इस वक्त देश की ये हालत हो चुकी है कि कम आमदनी के कारण 6 करोड़ अतिरिक्त आबादी गरीबी रेखा से नीचे चली गई है। मध्यम वर्गीय परिवारों ने अपने खर्चे कम कर दिए हैं जिस कारण बाजार में ग्राहक नहीं है इसी कारण इलेक्ट्रॉनिक सामानों मोबाइल, एल ई डी,फ्रिज आदि सामनों की बिक्री कम हो गई है जिसकी वजह से अब कंपनिया मजबूरी में कीमतें कम करने की सोचने लगी है।अभी तो येशुरुआत है,बेरोजगारी के कारण आने वाले समय में देश को बहुत बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा।क्यूंकि इस सरकार के जमाने में लाखों सरकारी पद खाली पड़े है जिसमे तीन लाख का आंकड़ा तो अकेले रेलवे का है।पुरानी भर्ती की नहीं जा रही नई खोल नहीं रहे उसकी जगह ये सरकार अग्निविर जैसी काम चलाऊ योजना लेकर आ गई।इस मामले में जब विपक्ष सवाल करता है तो कुछ हजार नियुक्ति पत्र बांटकर सरकार लीपापोती करने लग जाती है।कुल मिलाकर आर्थिक मामलों में देश में कमजोर और मध्यम वर्ग का भविष्य बेहतर नहीं है

17/06/2023

हिंदू समाज में गहराई तक व्याप्त स्वामी भक्ति ने समाज और देश का बड़ा नुकसान किया है।इसी कारण देश ने पहले मुगलों और फिर अंग्रेजो की गुलामी झेलनी पड़ी, इसी स्वामी भक्ति के कारण अब नई राजनैतिक गुलामी झेलनी पड़ रही है जिस कारण लोग अब अपनी जिंदगी की जरूरत के मुद्दों को भी भूल गए हैं।असल में अंग्रेज जब भारत में आए थे तो उन्होंने हिन्दुस्तानियों के स्वामी भक्ति के चरित्र को गहराई से भांप लिया था जिस कारण उन्होंने सोच लिया था कि हिंदुस्तान को गुलाम बनाने के लिए इंग्लैंड से फौज लाने की जरूरत नहीं है अगर हिन्दुस्तानियों को ही फौज में भर्ती कर लिया जाए तो स्वामी भक्ति में अपने देश के प्रति फर्ज को भी भूलने वाले लोग खुद हमारे लिए लड़कर देश को गुलाम बनाने में भी हमारी मदद करने से पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि हिन्दुस्तानियों के लिए स्वामी भक्ति एक धर्म की तरह से होती है।उनके लिए स्वामी ही सब कुछ होता जिसके लिए अंध भक्ति की हद तक मरने और मारने के लिए भी तैयार रहते है।अंग्रेजों ने पता लगा लिया था कि खुद हिन्दू समाज के लोगों ने ही स्वामी भक्ति में मुगलों की तरफ से लड़ाई लड़ कर देश को मुगलों का गुलाम बनाने में बड़ा योगदान किया था।इतिहास गवाह है कि औरंगजेब के कहने पर शिवाजी को पकड़ने वाला औरगजेब का सिपहसालार एक हिंदू ही था,और राणा सांगा के खिलाफ उसका हिंदू सेना पति ही बाबर की फौज में शामिल हो कर युद्ध कर रहा था जिसके कारण राणा सांगा की हार हो गई थी।यहां तक कि झांसी की रानी के खिलाफ भी हिन्दू ही अंग्रेजो की मदद कर रहे थे जबकि मुस्लिम तो झांसी की रानी की फौज में शामिल होकर उसके लिए अंग्रेजो से लड़ रहे थे।इसी तरह महाराणा प्रताप के खिलाफ भी हिंदू ही अकबर का सेनापति था जबकि मुस्लिम तो राणा प्रताप का सेना पति बनकर उनके साथ था।हिंदू समाज की इसी स्वामी भक्ति की आदत से देश ने बहुत चोट खाई है।इस वक्त भी स्वामी भक्ति के कारण कुछ लोग बेरोजगारी,महंगाई,आदि जरूरत के मुद्दों को भूल चुके है जबकि कभी यही लोग प्याज और गैस की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी पर भी सरकार बदल दिया करते थे लेकिन अब स्वामी भक्ति ने इनको पूरी तरह से गुलामी में जकड़ लिया है।

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