30/07/2023
जितने राजनीतिक पार्टियों के नेता हैं उनके परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ , तंदुरुस्त , जीवित एवं राजनीतिक लाभ ले रहे हैं।
लेकिन उन नेताओं के लिए समर्पित कार्यकर्ता अपना जान दांव पर लगा रहे है और कितने तो भगवान को प्यारे भी हो गये।
राजनीतिक पार्टियों द्वारा सिर्फ मुफ्त की रेवड़ियां दी जायेगी उन्हें अमरता का पट्टा न माने।
गरीब और मध्यम वर्गीय नेताओं के शोषण का एक माध्यम है देश में आजदी के 75 वर्ष बाद भी गरीबी के नाम पर ही चुनाव लड़ा जाता है।
चुनाव के समय में सच्चे कार्यकर्ताओं को नही बल्कि टिकट के लिए पहले परिवारों का ख्याल रखा जाता है।
जो कमाएगा वो खायेगा नही तो राजनीतिक पार्टियों के पीछे अपना जीबन बर्बाद करके हाथ मलते रह जायेगा।
गरीब और मध्यम वर्गीय अपने ताकत को पहचानो उठो और एक नया सवेरा लिखो , अपने बाजुओं पर भरोसा करो। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं द्वारा अपने परिवार को सुरक्षित रख कर हमें शोषित किया जा रहा है।
भारत को पहले राजाओं ने गुलाम बनाया , फिर अंग्रेजों ने अब राजनीतिक सफेदपोश हमें जातियों के जाल में जकड़ा कर गुलाम बनाये हुए हैं।
इंसान को इंसान जाति के नजर से देख रहा है, अगर भेद भाव करना है तो स्कूलों में भेद भाव करो , मंदिरों में भेद भाव करो , मस्जिदों में भेद भाव करो , ट्रेनों में भेद भाव करो , स्टेशनों पर भेद भाव करो , सीमा पर तैनात जवानों में भेद भाव करो , जो संभव नही है और हमारा देश बर्बाद हो जाएगा भेद भाव के बहुत ऐसे उदाहरण हैं।
लेकिन नेताओं द्वारा सिर्फ चुनावों में भेद भाव इस तरह उत्पन्न हुआ कि इंसान अब इंसान को जाति के नजरिये से देख रहा है। दुःखद
मेरे शब्दों से अगर किन्हीं को ठेस पहुँचा हो तो क्षमा प्रार्थी....💐