07/08/2026
आज रतलाम की प्रसिद्ध व्यास जी की दाल-बाटी का स्वाद लेने का अवसर मिला।
बाल्यकाल की अनेक मधुर स्मृतियाँ भी ताज़ा हो गईं। दादा जी के साथ पूरे परिवार सहित यहाँ भोजन करने आया करता था। आज फिर वही अपनापन और वही स्वाद महसूस हुआ।
इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहाँ धर्म, वर्ग या पद का कोई भेद नहीं होता। बड़े व्यापारी, अधिकारी, किसान, मज़दूर, विद्यार्थी और दूर-दूर से रतलाम आने वाले लोग एक ही पंक्ति में बैठकर प्रेम और आत्मीयता के साथ भोजन करते हैं।
यही हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है— सादगी, समानता, अपनापन और साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा।
रतलाम की यह पहचान सदैव बनी रहे।🙏❤️