Shivaji Nagar - Samastipur

Shivaji Nagar - Samastipur Shivaji Nagar is in Samastipur District with geographical coordinates of in North and in East. Total Surface of shivaji Nagar

1. Akhatwara
2. Aura
3. Baghopur
4.

Bahadurpur
5. Balha
6. Ballipur
7. Banda
8. Bandhar
9. Barahkurwa
10. Baraitha
11. Basanpur Garibi
12. Bauro
13. Bhataura
14. Boraj
15. Chaitaura
16. Chhatauni
17. Dahiyar
18. Dasaut
19. Devanpur
20. Dhakajari
21. Dharampur
22. Dhibahi
23. Dumra Kon
24. Dumra Mohan
25. Gaunwara
26. Inayat
27. Jagda
28. Jakhar
29. Kainabariyar
30. Kaji Dumra
31. Kalwara
32. Kankar
33. Kariyan
34. Kat

ghara
35. Khakhari Katghara
36. Khanpur
37. Kharastam
38. Kolhatta
39. Kothiya
40. Machholiya
41. Madhurapur
42. Maheshwara
43. Mahisar
44. Mahraila
45. Mandmar
46. Medhpatti
47. Motipur
48. Narsingha
49. Parsa
50. Parwana
51. Pokhar Bhinda
52. Punma
53. Punma
54. Pura
55. Rahiyar Kachi
56. Rahtauli
57. Rajaur (Rambhadra)
58. Ramaul
59. Ranna
60. Sahru
61. Sarhilka (Sarhaika)
62. Shahpur Chintabhabi
63. Shankarpur
64. Shivram
65. Shripur Bhauwan
66. Shripur Majrahiya
67. Sibharhathi
68. Sirsiya
69. Sisei Brindaban
70. Sisei Goth
71. Sisei Kariyan
72. Sisei Raja
73. Thahar Basbariya

17/09/2020
06/09/2017

समस्तीपुर का पुराना नाम शम्सुद्दीनपुर(Shamsuddinpur)) था ! पश्चिम बंगाल के मुसलमान शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास ने उस समय ( १३ वीं सदी) के राजा कामेश्वर ठाकुर से सत्ता प्राप्त किया था ! राजा कामेश्वर ठाकुर "ओईनवार वंश " (1325-1525 AD) के ससंथापक थे, जो की बाद में "सुगौना वंश" का स्थापना किया ! ओईनवार राजाओं को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है ! राजा कामेश्वर ठाकुर गांव "ओईनी " के रहने वाले थे जो की पूसा रोड, जिला दरभंगा स्थित है ! उस समय के महत्वपूर्ण वयक्तित्वों में गदाधर पंडित, शंकर, वाचास्पति मिश्र, उदयनाचार्य, अमर्त्यकार, अमियकर आदि थे !

18/02/2017

समस्तीपुर के 'पूसा' के नामांकरण के पीछे का इतिहास
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जब भी समस्तीपुर होकर गुजरता हूं, पूसा की याद आती है। पूसा नामक जगह दरभंगा प्रमंडल के समस्तींपुर जिले में आता है। पूसा का नामकरण भी बडा रोचक है। यह नाम 1 अप्रैल,1905 में रखा गया। 1905 से पहले इस जगह को अस्ततबल नाम से जाना जाता था। एशिया का सबसे बडा
घोडा प्रजनन केंद्र 1799 में जहां स्थापित हुआ और 1854 में प्लेग के कारण उसे बंद करना पडा। इस संबंध में दुनिया के सबसे बडे घोडा प्रजनन केंद्र स्पेन में आज भी कई दस्तावेज मौजूद हैं। 1886 के आसपास जब पडौल में नील के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ, तो तिरहुत सरकार ने नील के विकल्प पर सोचना शुरू किया। तिरहुत में हरित क्रांति लाने के उद्देश्य से दो फैसले लिये गये। एक नील के बदले दूसरा नगदी फसल क्या हो और पडौल नील कारखाने की जगह कौन सा कारखाना लगाया जाये। इसी दौरान महाराजा लक्ष्‍मेश्वर सिंह का निधन हो गया। नये सरकार बने रामेश्वर सिंह। उनको बताया कि आनेवाला वक्त् जैविक खेती का है और अमेरिका में इसपर काम शुरु हो चुका है। रामेश्वर सिंह ने तत्काल तिरहुत में जैविक खेती से हरित क्रांति लाने का फैसला किया और जैविक खेती के शोधकर्ता Phipps से एक संस्थान तिरहुत में खोलने का आग्रह किया। पंडौल के पास लोहट में पहला चीनी कारखाना लगाने का काम शुरु हुआ। इस संस्थांन ने लोहट के लिए पहला जैविक फसल गन्ना के रूप में तैयार किया। इस प्रकार भारत में सबसे पहले गन्ना की जैविक खेती तिरहुत में शुरु हुई। इस संस्थान का नाम कृषि शोध संस्थान था, लेकिन जैविक खेती के कारण इसे Phipps form U.S.A (P U S A) के नाम से पूकारा जाने लगा। 15 जनवरी, 1934 के भूकंप में यह संस्थान ध्वस्त हो गया। 29 जुलाई 1936 को इस संस्थान को एक साजिश के तहत समस्तीपुर से दिल्ली ले जाने का फैसला हुआ। 1970 मे पूसा को दिल्ली से बिहार लाने की आखरी उम्मीद उस वक्त खत्म हो गयी, जब कांग्रेस सरकार ने यहां राजेंद्र कृर्षि विश्वविद्यालय खोलने का फैसला किया। Phipps form U.S.A (P U S A) हमेशा के लिए बिहार और तिरहुत से बाहर चला गया, रह गया तो केवल नाम...।

सामाचकेवा------------कृष्ण की पुत्री है सामा और साम्ब उसके पुत्र. और कहानी इन भाई बहनों की ही है.भारतीय लोकमानस में बसी ...
14/11/2016

सामाचकेवा
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कृष्ण की पुत्री है सामा और साम्ब उसके पुत्र. और कहानी इन भाई बहनों की ही है.

भारतीय लोकमानस में बसी इस कथा के बारे में सोचिये और वर्तमान परिदृश्य पर गौर कीजिये. आज अगर किसी भाई को पता चल जाये कि उसकी बहन का किसी पर पुरुष से यौन संबंध है, किसी पति को यह भनक लग जाये... तो ये भाई और पति कितनी देर अपने गुस्से पर काबू रख पायेंगे. वे उक्त महिला को कितना बेनिफिट ऑफ डाउट देंगे. मगर लोक मानस में बसी इस कथा के भाई और पति न सिर्फ उक्त स्त्री पर भरोसा रखते हैं, बल्कि उसे दोष मुक्त साबित करने के लिए हर तरह का कष्ट उठाते हैं.

एक चुगलखोर व्यक्ति राजा कृष्ण से कहता है कि तुम्हारी पुत्री साम्बवती चरित्रहीन है. उसने वृंदावन से गुजरते वक्त एक ऋषि के साथ संभोग किया है. कृष्ण अपनी पुत्री के बारे में यह खबर सुनकर गुस्से में आग-बबूला हो जाते हैं. वे यह पता करने की भी कोशिश नहीं करते कि इस बात में कितनी सच्चाई है. वे तत्काल अपनी पुत्री और उस ऋषि को शाप देते हैं कि दोनों मैना में बदल जाये. पुत्री मैना बन जाती है तो उसके पति चक्रवाक को भी वियोग सहा नहीं जाता है. वह भी मैना का रूप धर लेता है. उसे अपनी पत्नी पर पूरा भरोसा है. वह नहीं मानता कि उसकी पत्नी उसे धोखा दे सकती है.
अब तीन प्राणी चिड़िया में बदल गये हैं. यह देख कर उस युवती का भाई साम्ब परेशान हो जाता है. वह तय करता है कि इन लोगों को पक्षी योनि से मुक्ति दिलाये. वह अपने पिता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करता है कि ये तीनों लोग निर्दोष हैं. वह इन तीनों को फिर से मनुष्य बनाने के लिए तपस्या करता है. पिता को मनाता है, तब पिता तीनों को शाप मुक्त करते हैं. अहा, क्या कथा है? यह #सामाचकेवा लोकपर्व की कथा है, जिसका आज विसर्जन होना है.
.. और बहनें अपने भाई के इस त्याग का बदला चुकाने के लिए हर साल #सामाचकेवा का पर्व मनाती हैं. वे मिट्टी की चिड़िया बनाती हैं, गीत गाते हुए उन्हें रोज खेतों में(वृंदावन में) चराने ले जाती हैं. आखिरी रोज कार्तिक पूर्णिमा के दिन इनका विसर्जन करती हैं, बहनें चुगलखोर चुगला की दाढ़ी में आग लगा देती हैं और भाइयों से कहती हैं कि मिट्टी की बनी चिड़ियों को तोड़ दें ताकि सामा, उसके पति चक्रवाक(चकेवा) और शापित ऋषि फिर से मानव रूप में आ सकें. कोसी और मिथिलांचल के इलाके में इस पर्व को लेकर काफी उल्लास रहता है. आज रात के वक्त लड़कियां और महिलाएं खेतों में जाकर खूब गीत गायेंगे और भाइयों का शुक्रिया अदा करेंगे. इन गीतों में जिस भाई का नाम आता है वह अह्लादित हो जाता है.

अत्याचार पर सदाचार की विजयक्रोध पर दया, क्षमा की विजयअज्ञान पर ज्ञान की विजयरावण पर श्रीराम की विजयके प्रतीक पावन पर्ववि...
11/10/2016

अत्याचार पर सदाचार की विजय
क्रोध पर दया, क्षमा की विजय
अज्ञान पर ज्ञान की विजय
रावण पर श्रीराम की विजय
के प्रतीक पावन पर्व
विजयादशमी की हार्दीक शुभकामनायेँ।

विजयीदशमी के सब मित्रगण के हार्दीक शुभकामना जय मैय्या रानी
22/10/2015

विजयीदशमी के सब मित्रगण के हार्दीक शुभकामना
जय मैय्या रानी

कने झटकि झटकि चलू.....
15/10/2015

कने झटकि झटकि चलू.....

10/02/2014

Shivaji Nagar : At a Glance

1. Akhatwara
2. Aura
3. Baghopur
4. Bahadurpur
5. Balha
6. Ballipur
7. Banda
8. Bandhar
9. Barahkurwa
10. Baraitha
11. Basanpur Garibi
12. Bauro
13. Bhataura
14. Boraj
15. Chaitaura
16. Chhatauni
17. Dahiyar
18. Dasaut
19. Devanpur
20. Dhakajari
21. Dharampur
22. Dhibahi
23. Dumra Kon
24. Dumra Mohan
25. Gaunwara
26. Inayat
27. Jagda
28. Jakhar
29. Kainabariyar
30. Kaji Dumra
31. Kalwara
32. Kankar
33. Kariyan
34. Katghara
35. Khakhari Katghara
36. Khanpur
37. Kharastam
38. Kolhatta
39. Kothiya
40. Machholiya
41. Madhurapur
42. Maheshwara
43. Mahisar
44. Mahraila
45. Mandmar
46. Medhpatti
47. Motipur
48. Narsingha
49. Parsa
50. Parwana
51. Pokhar Bhinda
52. Punma
53. Punma
54. Pura
55. Rahiyar Kachi
56. Rahtauli
57. Rajaur (Rambhadra)
58. Ramaul
59. Ranna
60. Sahru
61. Sarhilka (Sarhaika)
62. Shahpur Chintabhabi
63. Shankarpur
64. Shivram
65. Shripur Bhauwan
66. Shripur Majrahiya
67. Sibharhathi
68. Sirsiya
69. Sisei Brindaban
70. Sisei Goth
71. Sisei Kariyan
72. Sisei Raja
73. Thahar Basbariya
74.Thanka

11/01/2013

Dear Colleague
This is a first step ahead get together with our social/geographical/cultural imagination.
Hope You will Support with your valuable imagine and effort.

I will be appreciated for that.

11/01/2013

Dear Colleague
This is a first step ahead get together with our social/geographical/cultural imagination.
Hope You are Support with your valuable imagine and effort.

I will be appreciated for that.

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