14/02/2026
पीटीईसी लश्करीगंज में भव्य कार्यशाला का आयोजन
सासाराम। जिले के प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (पीटीईसी), लश्करीगंज, सासाराम में “कला शिक्षा एवं कला समेकित शिक्षा: शिक्षा का आधार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षक प्रशिक्षुओं में कला शिक्षा के महत्व तथा कला समेकित शिक्षण की प्रभावी पद्धतियों के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता के रूप में डायट गयाजी के व्याख्याता सह भिखारी ठाकुर रंगमंडल प्रशिक्षण एवं शोध केंद्र, छपरा के सह-निदेशक डॉ. जैनेंद्र कुमार दोस्त ने ऑनलाइन माध्यम से अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कला शिक्षा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। कला समेकित शिक्षा बच्चों में रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता, संवेदनशीलता एवं चिंतनशीलता का विकास करती है। उन्होंने जोर दिया कि विद्यालयों में ‘करके सीखने’ की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने हेतु कला आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), मोहनिया, कैमूर के व्याख्याता श्री सुनील कुमार ने विविध क्रियात्मक गतिविधियों के माध्यम से डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं को कला एवं कला समेकित शिक्षा के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कला के माध्यम से विषयवस्तु को सरल, रोचक एवं स्थायी बनाया जा सकता है।
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं ने दृश्य कला एवं प्रदर्शन कला के विभिन्न आयामों का जीवंत प्रदर्शन किया। उन्होंने आकर्षक चित्रकला प्रस्तुत की, समूह एवं एकल संगीत प्रस्तुतियाँ दीं, कराओके के माध्यम से संगीत अभ्यास किया, साथ ही नाटक एवं नृत्य प्रस्तुत कर अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं रचनात्मक रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की व्याख्याता डॉ. नीना कुमारी द्वारा स्वागत भाषण से हुआ। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन कुशलतापूर्वक डॉ. आशीष कुमार चौबे ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के व्याख्याताओं श्री आनंद कुमार सिंह, डॉ. रवि रंजन कुमार तथा श्री गोपाल भारती ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कला शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अरूब परवीन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ शिक्षक प्रशिक्षुओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त कर्मचारीगण— लिपिक श्री सुदामा सिंह, श्री जयंत कपूर, ऑपरेटर मो. अख्तर राजा, श्री राहुल कुमार केशरी, अकाउंटेंट श्री अवधेश कुमार पाण्डेय, श्री सूरज प्रसाद, श्रीमती साफिया खातून, श्री राजेश्वर प्रसाद, श्री पप्पू कुमार सहित अन्य कर्मियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यशाला ने प्रशिक्षुओं में कला आधारित शिक्षण के प्रति नवीन दृष्टिकोण विकसित किया तथा शिक्षा में रचनात्मकता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।