26/06/2020
नागरिक सशक्तीकरण - #हिसाब_किताब 🇮🇳
सासाराम के पूर्व विधायक श्री जवाहर प्रसाद जी (विपक्ष)
बिहार टॉपर हिमांशु, सांसद सासाराम, विधायक करगहर,राष्ट्रीय मेटल हेल्थ स्पेशलिस्ट , इंग्लैंड से शिक्षित और WHO से करोना राहत अभियान के लिए सम्मानित विख्यात सोशल एक्टिविस्ट दिल्ली के सरदार जी के बाद
सासाराम से जुड़े सवालों के बौछार का सामना करने लाईव आ रहे हैं, इनके कार्यकाल का हिसाब भी होगा और इनके विजन को भी समझने का प्रयास किया जाएगा । गौरक्षणी पुल के बारे में जरूर पूछा जाएगा इनसे भी और वर्तमान विधायक से भी ।
दिनांक : 28 जून (रविवार) , समय : 8 बजे सुबह
(Y) Sasaram Ki Galiyan फेसबुक पेज पर लाईव आएंगे ।
"सासाराम की गलियां" पेज से जुड़े सदस्य सादर आमंत्रित हैं 🙏
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सभी लाईव प्रोग्रामों के लिए फिर से नियम पढ़ लिजिए,
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लाईव प्रोग्रामों में गंदे ,भद्दे कमेंट (जो अपने परिवारों के साथ नहीं बोलते होंगे) करने पर बड़ी संख्या में लोगों को बैन/ब्लॉक किया जाता है ।
शालीन भाषा में विरोध जताने वालों या नेगेटिव एक्सपीरियंस वालों को हम लोग कुछ नहीं करते (पुराने पोस्ट चेक कर लीजिए ,सबके कमेंट मिलेंगे )
सबको अपनी बात रखने की आजादी है लेकिन सभ्य तरीके से । ताकि कोई बिना शर्म के पढ़ कर सोच विचार कर सके उसके बाद सहमत , असहमत हो सके ।
पिछले 7 लाईवों में अब तक 850 लोगों को हमलोग बैन कर चुके हैं । और अब यह इस जिंदगी में नहीं खुलेगा । यहां से काम ख़तम हो गया । इसका ध्यान रखिएगा ।
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नोट : हम लोग सॉल्यूशन के लिए काम करते हैं ,हमारा मकसद सीमित संसाधनों में और प्रक्टिकल तथा सकारात्मक सोच के साथ एग्जिस्टिंग जनप्रतिनिधियों/अधिकारियों का अपने स्तर पर सॉल्यूशन के लिए ईमानदार कोशिशें करवाना होता है ।
सांसद छेदी पासवान से पिछले लाईव में रोहतास का गेम चेंजर पंडूका पुल पर सवाल पूछा गया था, उन्होंने उसी समय संकल्प भी जाहिर किया था।
उसके उपर उन्होंने अपने शक्ति के स्तर अनुसार सकारात्मक काम किया है, वह काम अब भारत सरकार के मंत्रालय में महत्वपू्ण दौर में पहुंच चुका है । अखबारों में भी छपा था शायद 10-12 जून के बीच । इस पेज का भी पोस्ट चेक कर सकते ,यहां भी रिपोर्टिंग हुआ था ।
ये एक अच्छी बात है, सकारत्मक सॉल्यूशन यही होता है , उस लाईव और समय लगाने का कुछ मतलब निकला । जो कि हमारा उद्देश्य है ।
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पूर्वाग्रहों से ग्रसित हो कर, किसी के माथे पर रोजाना, 2 बाल्टी बिना सिर पैर के सवाल पटक कर टाईम और एनर्जी बर्बाद करने के खिलाफ रहते है हमलोग ।
इससे कुछ सॉल्यूशन नहीं निकलता, सिर्फ नेगेटिविटी, गुस्सा और डर फैलता है ।
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सुझाव : सवाल पूछने से पहले अच्छे से होम वर्क कर लें कि ,वह समस्या केंद्र (सांसद) , राज्य (विधायक) ,लोकल (मुखिया/वार्ड पार्षद) , नगर पालिका के अन्तर्गत आता है या अधिकारियों कि गलती है ।
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सरकार द्वारा आवंटित विशेष राशि , विधायक फंड ,सांसद फंड में क्या अंतर है, और कैसे कैसे आता है (डायरेक्ट आता है या डीएम, भवन निर्माण विभाग के द्वारा) , क्या प्रोसेस होता है इसके बारे में जानकारी भी रखें ।
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विधानसभा क्षेत्र, लोकसभा, विधान परिषद, मुखिया क्षेत्र कितने किलोमीटर में है, कितने लोग रहते हैं , जनप्रतिनिधियों के पास कितना डायरेक्ट फंड होता है इसकी भी जानकारी रखें ।
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सकारात्मक चर्चा और सॉल्यूशन के लिए चुनाव खर्च और पार्टी के इंटरनल गुटबाजी, छोटे नेताओं द्वारा पैसे खाने और सफलता प्राप्ति के लिए लगे हुए एक नॉर्मल इंसान की मजबुरिओं के प्रति भी एक नजर रखना चाहिए ।
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प्रैक्टिकल और पॉजिटिव सोच के साथ सॉल्यूशन सेंट्रिक सवाल पूछें ,तब फैक्ट्स एंड फिगर के आधार पर आरोप लगाएं ।
ऐसा नहीं कि आपका नाली नहीं बना तो बिना किसी कागज और जांच के एक लाइन में बोल दिए की , पूरे क्षेत्र में कोई काम ही नहीं हुआ है ( सभी जनप्रतिनिधिओं/ अधिकारियों के लिए )
जो नहीं हुआ है उसे बोलिए, जो हुआ है उसके लिए क्रेडिट भी दीजिए । सामने वाले का पक्ष जान कर और प्रॉपर डॉक्युमेंट्स के आधार पर मूल्यांकन करे । घर में बैठ कर ,बिना किसी जांच , डॉक्यूमेंट, क्षेत्र का पड़ताल किए नहीं । कसम खा कर किसी का विरोधी या सपोर्टर मत बनिए ।
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नेताओं / अधिकारीयों के जोश और सिस्टम की मजबूरियों को जानने के लिए किरन बेदी ,केजरीवाल, कुमार विश्वास , विके सिंह, एस जयशंकर ,सचिन तेंदुलकर एवं अन्य लोगों के पूर्व और अभी के कार्यों पर न्यूट्रल हो कर विचार कीजिए । इनके पहले के महान कार्यों और अब के कार्यों के बारे में भी सोचिए ।
सिस्टम समझ आ जाएगा । प्रैक्टिकल होना जरूरी होता है, फिल्मों से दुनिया नहीं चलती और सॉल्यूशन भी नहीं निकलता ।
इतना पढ़ने के लिए धन्यवाद और माफी भी 😊
लेकिन ये जरूरी था ।