30/07/2026
क्या आप जानते हैं कि भोजपुर जिले में भी प्रभु श्रीराम की यात्रा से जुड़ी एक ऐसी स्मृति जीवित है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं?
भोजपुर जिले के अंधारी गांव स्थित रामघाट को स्थानीय जनश्रुतियों में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि जब प्रभु श्रीराम अपने पिता महाराज दशरथ के पिंडदान के लिए अयोध्या से गया की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने एक रात्रि विश्राम अंधारी गांव के इसी घाट पर किया। अगले दिन यहीं से सोन नदी पार कर वे गया की ओर प्रस्थान किए। कहा जाता है कि इसी कारण इस स्थान का नाम रामघाट पड़ा और आज भी स्थानीय लोगों की आस्था इस स्थल से गहराई से जुड़ी हुई है।
इतनी महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यता होने के बावजूद यह स्थान आज भी अपनी पहचान और विकास की प्रतीक्षा कर रहा है। न यहां श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं, न इस ऐतिहासिक-धार्मिक धरोहर के अनुरूप कोई भव्य मंदिर, सांस्कृतिक परिसर या पर्यटन केंद्र विकसित किया गया है। यदि इस स्थल का संरक्षण और विकास किया जाए तो यह न केवल भोजपुर, बल्कि पूरे बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे सकता है।
बिहार सरकार और भारत सरकार को चाहिए कि इस जनआस्था से जुड़े स्थल का गंभीरता से अध्ययन कर इसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता के अनुरूप संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत से जुड़ सकेंगी।
रामघाट केवल एक घाट नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, लोकस्मृति और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसी धरोहरों की उपेक्षा नहीं, बल्कि संरक्षण और सम्मान होना चाहिए। यदि आज हम अपनी विरासत को नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां केवल इसके किस्से सुनेंगी, उसके साक्षी नहीं बन पाएंगी।
✍️✍️ पाठक आशीष विलोम