23/08/2026
आदिवासी भूमि के अधिकारों की लड़ाई में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल
गैर-आदिवासी के सामने बेबस आदिवासी महिलाएं, प्रशासन मौन क्यों?
170-ख में रजिस्ट्री निरस्त, SC/ST Act के तहत तीन FIR—फिर भी कब्जा बरकरार!
पलसूद/बड़वानी। आदिवासी समाज की भूमि, अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही आदिवासी महिलाओं का मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि विवादित आदिवासी भूमि के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत धारा 170-ख के अंतर्गत रजिस्ट्री निरस्त की जा चुकी है और भूमि वर्तमान में आदिवासी पीड़ित भू-स्वामियों के नाम दर्ज है। इसके बावजूद मौके से कथित कब्जा हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
मामले में SC/ST Act के तहत अलग-अलग समय पर तीन FIR दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद यदि पीड़ित आदिवासी महिलाओं को अपनी ही भूमि के अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सामने आए फोटो और वीडियो में कथित रूप से विवाद के दौरान दबंगई का दृश्य दिखाई देने की बात कही जा रही है। यदि आरोप सही हैं, तो प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
सवाल सीधा है—जब राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी आदेश आदिवासी भू-स्वामियों के पक्ष में हैं, तो जमीन पर कथित कब्जा अब तक क्यों बना हुआ है?
क्या कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा?
क्या आदिवासी महिलाओं को अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष करते रहना पड़ेगा?
क्या FIR दर्ज होने के बाद भी पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा के लिए इंतजार करना पड़ेगा?
यह केवल एक परिवार या एक जमीन का मामला नहीं है। यह आदिवासी भूमि अधिकार, महिलाओं की सुरक्षा और कानून के राज से जुड़ा गंभीर विषय है। प्रशासन को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के मुताबिक तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
आदिवासी समाज किसी टकराव की मांग नहीं कर रहा—वह अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के संरक्षण की मांग कर रहा है।
हमारी स्पष्ट मांग है—
आदिवासी महिला एवं आदिवासी भू-स्वामियों को न्याय दो।
आदिवासी भूमि पर कथित अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच करो।
170-ख के आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित करो।
पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करो।
दोषी पाए जाने वालों पर कानून के तहत कठोर कार्रवाई करो।
आदिवासी भूमि बचाओ।
आदिवासी अधिकार बचाओ।
कानून का राज कायम करो।