08/03/2026
सिवनी जकात सेंटर का एक वर्ष पूरा
41 लाख की मदद जरूरतमंदों तक पहुँची, ज़कात से बढ़ी समाज में भाईचारे की भावना
क़ाबिज़ खान की ✍️ से
शहर में जरूरतमंद लोगों की सहायता के उद्देश्य से स्थापित सिवनी जकात सेंटर ने अपना एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस अवसर पर सेंटर के सदर डॉ. शमशुल हसन ने बताया कि पिछले एक वर्ष में समाज के लोगों में ज़कात के प्रति जागरूकता बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोगों ने इस नेक कार्य में सहयोग किया है।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक वर्ष में जकात सेंटर यूनिट सिवनी के माध्यम से 41,17204 लाख रुपये की राशि एकत्रित की गई। इस राशि को पारदर्शिता के साथ जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाने के लिए अनुभवी लोगों की निगरानी में एक सर्वे टीम गठित की गई, जिसने वास्तविक जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें सहायता उपलब्ध कराई।
एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जकात सेंटर द्वारा दानदाताओं की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी सहयोगकर्ताओं को उनके द्वारा दी गई राशि का पूरा हिसाब-किताब और विवरण प्रस्तुत किया गया।
डॉ. शमशुल हसन ने बताया कि सेंटर द्वारा एकत्रित राशि जरूरतमंद लोगों को रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता के रूप में दी गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। इसके अलावा कुछ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मासिक पेंशन के रूप में भी सहायता प्रदान की जा रही है।
✨ इस्लाम में ज़कात का विशेष महत्व
इस्लाम धर्म में ज़कात को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह इस्लाम के पाँच मूल स्तंभों (पिलर्स) में से एक है। ज़कात का अर्थ है अपनी संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा गरीबों, जरूरतमंदों, विधवाओं, अनाथों और जरूरतमंद लोगों के लिए देना। सामान्यतः योग्य मुसलमान अपनी बचत का लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सा ज़कात के रूप में अदा करते हैं।
इस्लामिक नज़रिए से ज़कात केवल दान नहीं बल्कि समाज में आर्थिक संतुलन, करुणा और भाईचारे को बढ़ावा देने का माध्यम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा या बेसहारा न रहे और सक्षम लोग जरूरतमंदों की सहायता करें।
🤝 गुरबत के खात्मे की कोशिश
सिवनी जकात सेंटर के पदाधिकारियों ने समाज के लोगों से अपील की है कि वे ज़कात और सदका के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद के इस अभियान से जुड़ें।
सेंटर का मकसद इज्तेमाई कोशिशों के ज़रिए गुरबत (गरीबी) के खात्मे और खुदमुख्तार समाज की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाना है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा ज़रूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके और समाज में सहयोग व भाईचारे की भावना मजबूत हो।