31/05/2026
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत हरी खाद के प्रति जागरूकता हेतु विकासखंड जयसिंहनगर के ग्राम कौवासरई में एक दिवसीय मेला सह संगोष्ठी एवं किसान सम्मलेन का आयोजन किया गया।
सहायक संचालक कृषि श्री अनुराग पटेल ने अवगत कराया गया कि वर्तमान में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से जिले में जैविक खेती को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में अब तक 4000 से अधिक किसानों को इन योजनाओं से जोड़ा जा चुका है, जिसमें जयसिंह नगर विकासखंड के कृषक भी प्रमुखता से लाभान्वित हो रहे हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञ डॉ नितिन सिंघाई ने बताया कि हरी खाद मिट्टी की स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके प्रमुख लाभ मृदा सुधार, खेत में जीवांश, कार्बनिक पदार्थ और मिट्टी की जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है।
ढैंचा, सनई और मूंग जैसी फसलों के उपयोग से यूरिया और डीएपी जैसे महंगे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा लागत में कमी आती है। किसानों को सिखाया गया कि हरी खाद की बुवाई के 40 से 45 दिन बाद उसे खेत में पलट देना चाहिए और उसके 8 से 10 दिन बाद मुख्य फसल की रोपाई या बुवाई करनी चाहिए। उन्होंने गोबार की खाद बनाने की विधि, धान की एस.आर.ई पद्धति के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
कार्यक्रम में कृषि स्थाई समिति के सभापति राम स्वरूप सिंह के द्वारा किसानों को फसल चक्र अपनाने, हरी खाद, जैविक खाद, जैविक कीट नाशक दवाइयां अपने ही घर में बनाने की सलाह दी गई। किसानों को सुझाव दिया गया कि हरी खाद जैसे ढैचा,सनई मूंग आदि का बीज किसान भाई स्वयं अपने खेत में तैयार कर सकते हैं। किसान भाइयों को आदान के मामले में आत्म निर्भर होना चाहिए तभी खेती किसानी लाभ का व्यवसाय हो सकती है।
इस अवसर पर जनपद पंचायत सदस्य एवं गौशाला संचालक राम प्रसाद पयासी, गुरुभान सिंह, मलेशिया बाई, कौवासरई की सरपंच मुन्नी बाई कोल, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्रदीप कुशवाहा सहित अन्य अधिकारी एवं स्थानीय ग्रामवासी उपस्थित रहें।
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