23/03/2026
**प्रिय निषाद बन्धुओं,**
आज *चैत्र शुक्ल पंचमी* के इस पावन अवसर पर हम सब *निषाद जयंती / निषाद पंचमी* मना रहे हैं। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी परंपरा और हमारे गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है।
“निषाद” शब्द कोई साधारण शब्द नहीं है। यह उस महान संस्कृति का प्रतीक है जो *प्रकृति के साथ संतुलन, श्रम की प्रतिष्ठा, साहस, सरलता और मानवता* के उच्चतम मूल्यों को अपने भीतर समेटे हुए है। निषाद वह है जो *जल, जंगल, पहाड़, नदी और प्रकृति* से जुड़ा है, जो सृजनकर्ता है, जो संघर्षकर्ता है और जो सदैव समाज के लिए समर्पित रहता है।
आज आवश्यकता है कि हम केवल “निषाद” कहलाने तक सीमित न रहें, बल्कि उसके **वास्तविक अर्थ, उसकी गरिमा और उसकी संस्कृति को समझें और अपने जीवन में उतारें।**
हमारा इतिहास हमें सिखाता है—
* आत्मसम्मान के साथ जीना
* अन्याय के विरुद्ध खड़े होना
* प्रकृति का संरक्षण करना
* समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखना
लेकिन आज के समय में यदि हम अपनी जड़ों से दूर हो जाएं, तो यह हमारी सबसे बड़ी हानि होगी। इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों को भी **निषाद संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से परिचित कराएं**।
मैं आप सभी से आह्वान करता हूँ—
👉 निषाद शब्द की **महत्ता को जानें और दूसरों को भी बताएं**
👉 अपनी **संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं का पालन करें**
👉 समाज में **एकता, संगठन और जागरूकता** को मजबूत करें
👉 निषाद जी के प्रति अपनी **अटूट आस्था और सम्मान** को प्रकट करें
👉 अपने आचरण से यह सिद्ध करें कि हम सच्चे अर्थों में “निषाद” हैं
आइए, आज हम संकल्प लें कि—
हम अपनी पहचान पर गर्व करेंगे,
अपनी संस्कृति को जीवित रखेंगे,
और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे और भी सशक्त बनाकर छोड़ेंगे।
**निषाद केवल एक नाम नहीं, यह हमारी आत्मा है, हमारी शक्ति है, हमारा अस्तित्व है।**
आप सभी को निषाद जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
**जय निषाद!
जय निषाद संस्कृति!**