07/03/2014
वाराणसी। आतंकी संगठन से मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार जामिया सल्फिया का छात्र अब्दुल्लाह आठ साल के लंबे अंतराल के बाद कोलकाता जेल से रिहा हो गया। आठ सालों में पुलिस कोर्ट को उसके खिलाफ दहशतगर्द होने का कोई सुबूत पेश नहीं कर सकी। अब्दुल्लाह को 2006 में कोलकाता पुलिस ने वाराणसी से गिरफ्तार किया गया था।
जेल से जामिया सल्फिया पहुंचे छात्र अब्दुल्लाह ने मंगलवार को सल्फिया गेस्ट हाउस में पत्रकारों से रूबरू हुआ। दावा किया कि वह वर्ष 2005 में ग्राम महादेव मठ जिला वैशाली बिहार से शिक्षा हासिल करने जामिया सल्फिया आया था। 31 जनवरी 2006 को पुलिस ने उसे सल्फिया के कार्यालय में बुलाया और पासपोर्ट की जांच के बहाने लंका ले गई। कोलकाता पुलिस उसे पूछताछ के बहाने कोलकाता ले गई और दहशतगर्द का इल्जाम लगाते हुए उसे जेल भेज दिया। रिमांड के दौरान पुलिस लगाई आईपीएस की धाराओं 121, 121ए, 122, 123, 124ए और 120 बी से जुड़ी बात न पूछ कर इदारे से जुड़ी बातें पूछा करते थे। अब्दुल्लाह ने बताया कि सुबूत न मिलने पर कोर्ट ने दो अन्य युवकों के साथ उसे 26 फरवरी 2014 को बरी कर दिया। हालांकि उसने इस मामले में कोर्ट का कोई आदेश नहीं प्रस्तुत किया।
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छात्र का आठ साल कौन लौटाएगा
जामिया सल्फिया के सचिव अब्दुल्ला सऊद ने बताया कि छात्र की गिरफ्तारी के समय इदारे की जो बदनामी हुई थी। उसका धब्बा रिहाई के बाद धुल गया है लेकिन एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि छात्र का तो भविष्य चौपट हो गया। उसका कीमती आठ साल कौन लौटाएगा। इस दौरान मौजूद मुफ्ती ए शहर अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि ऐसी गिरफ्तारियों से मुसलमान नौजवानों को कसूरवार बनाने में पुलिस अपनी पीठ थपथपाती है। यह ठीक नहीं है। नौजवानों को भी आजादी का हक है। क्या इन्हें यह आजादी ऐसे ही मिलेगी।