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एकता कपूर !लाखों घरों को बर्बाद करने के लिए अकेली ही काफी हैफिल्मस्टार जितेंद्र की बेटी हैउम्र 50 साल हो गई ऐसी औरतों का...
08/08/2026

एकता कपूर !

लाखों घरों को बर्बाद करने के लिए अकेली ही काफी है
फिल्मस्टार जितेंद्र की बेटी है
उम्र 50 साल हो गई
ऐसी औरतों का विवाहों में नहीं घर तोड़ने में यकीन होता है
इनका भी यही यकीन है
सो शादी नहीं की पचास साल की कुंवारी हैं
चूंकि हजारों लाखों करोड़ कमाती हैं -
अतः पिता जितेंद्र को एतराज नहीं !

सास बहू के झगड़े , ननद भावज के झगड़े ,
सगी बहनों और सगी मां बेटी के झगड़े
इनके सीरियल्स की पहचान है ।
अपना घर बसाया नहीं ,
दूसरों के घर टूटें इनकी बला से ।

इनके घर तोडू धारावाहिकों की तमाम चैनलों पर भारी डिमांड है । सोनी , कलर्स , स्टार प्लस , जी टीवी , सब टीवी आदि जितने भी मनोरंजन चैनल हैं -
इनके सीरियल सैकड़ों करोड़ देकर खरीदते हैं ।
घर तोडू धारावाहिकों में ग्लैमर , लम्बे लम्बे नाखूनों वाली शैतान फितरतें , रात को भी सोलह श्रृंगार कर सोने वाली औरतें हों या नागिन दर नागिन ;
एकता का धारावाहिकों पर एक छत्र साम्राज्य है ।

फूहड़ और समाज को बर्बाद करने वाली यह मुंह फट बदतमीज औरत फिल्में भी बनाती है , अश्लील सोशल मीडिया साइट्स भी चलाती है , ओटीटी प्लेटफॉर्म को पूरे का पूरा कब्जाने के फिराक में हैं । सरकार ने जब परसों एकता कपूर की पॉर्न साइट ऐप ALTT को ब्लॉक कर दिया तब वह बिलबिला उठी ।
इस ऐप के बंद होने से उसका 1 हजार करोड़ बर्बाद हो गया । लेकिन सरकार को जो 20 साल पहले करना था ,
वह काम आज तक नहीं किया ।
ऐप बन्द करने से नहीं एकता कपूर के भौंडे धारावाहिक बैन कीजिए ? समाज के मध्यम और कम पढ़े लिखे दर्शकों की बर्बादी का 50 प्रतिशत सेहरा
इसी फूहड़ बदतमीज औरत के सिर बंधा है ।

जब से इस औरत ने घर तुड़वा धारावाहिक परोसने शुरू किए सुधि समाज ने सीरियल देखने बंद कर दिए। हमने खुद कई सालों से कोई धारावाहिक नहीं देखा ।
आपको बता दें कि हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान और हाल ही में दुश्मन बने तुर्की में दुनिया के सबसे शानदार टीवी धारावाहिक बनते हैं ।
संबंध खराब होने के बाद आज भी लाखों भारतवासी यू ट्यूब पर पाकिस्तानी सीरियल देखते हैं ।
भारत के सिनेमा का तो अब नाश हुआ ,
टीवी धारावाहिक कबसे तबाह हो चुके हैं ।
भारत का सैंसर बोर्ड किस कदर गिर चुका है ,
टीवी सीरियल देखकर आप खुद ही पता लगा लीजिए ।

समाज में झूठ , फरेब , ईर्ष्या , जलन , नफरत और फितरतों को फैलाकर समाज तोड़ने वाले टीवी सीरियल भी तत्काल ब्लॉक किए जाएं । टीवी मालिकों से कहा जाए कि उनके धारावाहिकों को देखकर ही पति को सीमेंट में जमाने वाली औरतें पैदा हो रही हैं । हनीमून के समय यारों के साथ मिलकर पति को पहाड़ से फेंकने वाली सोनम इन्हीं धारावाहिकों की देन है ।
समय आ गया है कि सख्त कदम उठाए जाएं ।
साथ ही भारत में तमाम पॉर्न साइट्स तत्काल प्रभाव से ब्लॉक की जाएं , सदा के लिए हटा दी जाएं ।

याद रखिए , इंटरनेट ने जहां दुनिया बदल दी है
वहीं समाज को बर्बाद करने के नुस्खे भी बेशुमार दिए हैं।

#बेटे_हैं_कोई_खिलौना_नही

29/07/2026
हर पुरुष को इसे पढ़कर चिंतन अवश्य करना चाहिए...पुरुष बूढ़ा होता है, जबकि स्त्री परिपक्व होती है,जैसे ही पुरुष अपने बच्चो...
29/07/2026

हर पुरुष को इसे पढ़कर चिंतन अवश्य करना चाहिए...
पुरुष बूढ़ा होता है, जबकि स्त्री परिपक्व होती है,
जैसे ही पुरुष अपने बच्चों की शादी कर देता है और परिवार की आर्थिक नींव मजबूत कर देता है, परिवार में उसका वरिष्ठ और सम्मानित स्थान धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।

इसके बाद उसे बोझ समझा जाने लगता है — चिड़चिड़ा, गुस्सैल और अनिश्चित स्वभाव वाला बूढ़ा व्यक्ति।

जिन कठोर निर्णयों से उसने कभी पत्नी और बच्चों के लिए व्यवस्था बनाई थी, आज उन्हीं निर्णयों की चीर-फाड़ होकर आलोचना होती है; एक न एक कारण से उसे दोषी ठहरा दिया जाता है। और यदि वास्तव में उससे कोई गलती हुई हो — तो भगवान ही रक्षा करे।

वृद्ध स्त्री को, इसके विपरीत, बच्चों और बहुओं से सहानुभूति मिलती है — क्योंकि उसके माध्यम से अभी भी कई काम करवाने होते हैं।

सही समय आने पर वह समझदारी से पति के पक्ष से बच्चों के पक्ष में चली जाती है।

जब पति उम्र में बड़ा हो, तो पत्नी बहू के साथ तालमेल बना लेती है, ताकि बेटा उससे दूर न हो और उसकी देखभाल करता रहे।

पुरुष ने जीवन में चाहे कितनी ही महान उपलब्धियां हासिल की हों — बुढ़ापे में वे किसी काम नहीं आतीं।

जबकि वृद्ध स्त्री अपने पुराने पुण्यों का ब्याज जीवन भर पाती रहती है।

जिन लोगों के पास पैतृक संपत्ति या खेती होती है (जिसकी बच्चों को अब भी इच्छा रहती है) उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर होती है। लेकिन जिन्होंने भविष्य के झगड़ों से बचने के लिए समय से पहले संपत्ति बाँट दी — वे अक्सर उपरोक्त ही दुःखद स्थिति का सामना करते हैं। इसलिए संपत्ति समय से पहले न बाँटना ही बेहतर है।

किसी भी अस्पताल में चले जाए , रिश्तेदारों की आँख देखकर ही पता चल जाता है कि भर्ती वृद्ध पुरुष है या वृद्ध स्त्री। यदि वृद्ध पुरुष हो, तो उसकी बेटी को छोड़कर शायद ही किसी की आँख नम होती है।........ ...... ......... ...... ......... ...... ..... ..... .....
निष्कर्ष: जैसे ही पुरुष वृद्ध होता है, उसे सीख लेना चाहिए कि दूसरों से किसी भी प्रकार की अपेक्षा न रखे। याद रखें , मनुष्य जीवन भर विद्यार्थी है। समझ लें कि इस संसार में कोई किसी का नहीं है। विरक्ति, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के साथ जीना सीखें।
सुझाव:
आपने दूसरों के लिए क्या-क्या किया , यह सोचना भी छोड़ दें, और इस बारे में बात करना भी बंद कर दें।
प्राचीन शास्त्रों में

आरएसएस का वर्चस्व क्यों नहीं टिकेगासत्ता हथिया लेने वाले तानाशाह को एक बड़ी सुविधा हासिल हो जाती है: उसे अब किसी मुखौटे ...
08/07/2026

आरएसएस का वर्चस्व क्यों नहीं टिकेगा
सत्ता हथिया लेने वाले तानाशाह को एक बड़ी सुविधा हासिल हो जाती है: उसे अब किसी मुखौटे की ज़रूरत नहीं रहती। एक बार जब राज-काज की पूरी मशीनरी उसके कब्ज़े में आ जाती है, तो वह नैतिक, लोकतांत्रिक या निष्पक्ष दिखने का दिखावा छोड़ सकता है और बस राज कर सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), अधिनायकवाद में आस्था रखने के बावजूद, इस सुविधा का सुख कभी नहीं भोग पाया, और न ही कभी भोग पाएगा। वह हमेशा के लिए अपने ही अंतर्विरोधों के भीतर जीने को अभिशप्त है।

ये अंतर्विरोध अनगिनत हैं। संघ खुद को एक नैतिक शक्ति के रूप में पेश करता है, मगर हर राजनीतिक अनैतिकता का पालन भी करता है और उसे सही भी ठहराता है। वह भारतीय लोकतंत्र का पैरोकार होने का दावा करता है, मगर अनिर्वाचित लोगों के केंद्रीकृत नियंत्रण में यकीन रखता है। वह एक एकजुट हिंदू समाज की बात करता है, मगर चाहता है कि जाति-व्यवस्था बनी रहे और फले-फूले। वह खुद को हिंदू धर्म का रक्षक और अंतिम निर्णायक मानता है, मगर अपने ही कार्यकर्ताओं द्वारा मंदिरों के चढ़ावे को लुटने देता है। वह उस राष्ट्रीय एकता का वादा बार-बार करता है, जिसे वह अपने नफ़रत और विभाजन के अभियान के ज़रिए लगातार तोड़ता रहता है।

चाल, चरित्र और चेहरा

RSS के उपदेशों और कर्मों के बीच की यह खाई कोई संयोग नहीं है। उसके बुनियादी ढाँचे में एक बेसिक गड़बड़ है, जो अब उसकी कथनी और करनी के फ़र्क़ के कारण साफ़ दिखने लगी है। संघ हमेशा से दोमुँहापन के लिए जाना जाता है। ये दोमुँहापन उसे सत्ता के पायदान तक ले भी आया है। मगर अब यही उसके अंतर्विरोधों को उजागर भी कर रहा है। सत्ता पर आज उसकी पकड़ कितनी भी मज़बूत दिखे, लेकिन विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

RSS वह संगठन है जिसने अपनी पूरी पहचान चाल, चरित्र और चेहरे के नारे पर खड़ी की है। इसी के दम पर संघठन की ब्रांडिंग भी बढ़िया हुई और मार्केटिंग भी ज़ोरदार हुई। एक ऐसे संगठन की छवि गढ़ी गई, जो त्याग, ईमानदारी और नैतिक श्रेष्ठता का उपदेश भी देता है और उन पर अमल भी करता है।

संघ का वादा था कि वह राजनीति की अनैतिक सौदेबाज़ियों और राजनीतिक मजबूरियों से ऊपर उठेगा। मगर संघ ने जिस राजनीतिक दल बीजेपी को पाला-पोसा, वह आज भ्रष्टाचारियों को गले लगाने और राजनीतिक अनैतिकता को वैधता देने में सबसे आगे है। “वॉ

आज जो बात बताने जा रही हूँ ना… ये वो कड़वा सच है जो 99% मर्द जानना तक नहीं चाहते...सवाल सिर्फ़ एक है –‘शादीशुदा औरत बाहर...
08/07/2026

आज जो बात बताने जा रही हूँ ना… ये वो कड़वा सच है जो 99% मर्द जानना तक नहीं चाहते...
सवाल सिर्फ़ एक है –‘शादीशुदा औरत बाहर मर्द से चक्कर क्यों चलाती है?’ प्यार? भावनाएँ? या कुछ और?
क्योंकि आज जो बोलने जा रही हूँ,
वो घर-घर की सच्चाई है, बस कोई मुँह नहीं खोलता। शुरू करते हैं… बिना चाशनी, बिना झूठ, बिल्कुल कच्चा सच_

1 – घर में इज्जत नहीं, बाहर इज्जत मिल रही ,है पति सुबह से शाम तक बस ऑर्डर देता है – चाय ला, जूते ला, रोटी गरम कर, बच्चे संभाल।
औरत को लगता है वो बस एक नौकरानी है।
बाहर कोई एक मैसेज कर दे – ‘तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो जान’ बस हो गया… दिल पिघल गया। इज्जत की भूखी औरत दो घूँट में चढ़ जाती है।

2 – बिस्तर पर पति ने तौबा कर ली है
पति शारीरिक रूप से कमजोर है या रील्स में खोया रहता है। बाहर वाला बस कान में दो गंदी बातें बोले, एक टच करे –औरत को लगता है ‘अरे वाह, ये तो असली मर्द है!’ 90% अफेयर सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन से शुरू होते हैं, बाकी सब बाद में कहानी गढ़ी जाती है।

3 – वॉट्सएप का ‘हाय जानू’ वाला जादू
पुराना क्लासमेट, ऑफिस का जूनियर या जिम ट्रेनर –‌पहले ‘हाय… लंबा टाइम’ फिर रोज़ गुड मॉर्निंग फिर वॉइस नोट फिर वीडियो कॉल
फिर होटल बुक औरत को लगता है वो फिर से 20 साल की हो गई है। बस पकड़ी गई।

4 – बदले का खेल पति का भी किसी के साथ सेटिंग चल रहा हो तो औरत को पता चल जाता है। पहले रोती है, फिर सोचती है – ‘तेरी भी है, मेरी भी होगी!’ फिर शुरू होता है बदला। ये वाला अफेयर सबसे खतरनाक होता है, क्योंकि इसमें औरत जिद पकड़ लेती है।

5 – पैसा, गिफ्ट और लग्जरी का लालच
पति की सैलरी 50-60 हज़ार, बाहर वाला NRI या बिजनेसमैन –आईफोन गिफ्ट करता है, हिल स्टेशनों पर घुमाने ले जाता है।
औरत सोचती है – ‘प्यार बाद में, पहले थोड़ा मज़ा तो ले लूँ।’ और अब औरतें खुद Tinder, Bumble, Gleeden पर प्रोफाइल बनाती हैं।
बायो में लिखा होता है –
‘Happily married but looking for something missing’
मतलब खुद ढूंढ रही हैं, बहकाने की जरूरत ही नहीं। आज की औरत को पता है वो क्या चाहती है, और सीधे लेने जाती है।........ ...... ......... ...... ......... ...... ..... ..... .....
अंत में एक कड़वा सच –
जो औरत सच में खुश है, जिसका पति उसका खयाल रखता है, उससे बात करता है, हंसाता है, बिमारी में देखभाल करता है, बिस्तर

संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है।  ‌जितना ज्यादा कोई मर्द सेक्स का शौक़ीन होता है, उतना...
26/06/2026

संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है। ‌जितना ज्यादा कोई मर्द सेक्स का शौक़ीन होता है, उतना ही वह बीवी के स्पर्श का आदी हो जाता है। नशेड़ी हमेशा नशा देने वाले का ग़ुलाम होता है।
लेकिन मुश्किल तब पैदा होती है जब औरत इस नशे को अपना हथियार बनाने की बजाय इसे रोककर पति को आज़माने लगती है।
वह समझती है कि बच्चे हो चुके, घर बस चुका, अब पति कहीं नहीं जाएगा। मगर यही सबसे बड़ी भूल होती है...
बीवी जब बार-बार पति की शारीरिक प्यास को टालती है, नखरे दिखाती है, तो पति को बीवी ज़हर लगने लगते हैं। यह रिश्ता धीरे-धीरे खोखला होने लगता है।
ज़्यादातर औरतें बच्चों के बाद समझती हैं कि अब उनका पति कहीं नहीं जाएगा, अब तो वह सुरक्षित हो चुकी हैं। लेकिन यही ग़लतफ़हमी अक्सर घरों की बर्बादी की शुरुआत बन जाती है।

दूसरी शादी करने वाले मर्दों की अक्सर यही औरतें बीवियाँ होती हैं जिन्होंने रिश्ते को सिर्फ़ ज़िम्मेदारी समझकर निभाया, मोहब्बत और हवस से महरूम रखा। मर्द को रोका जा सकता है, बाँधा जा सकता है... लेकिन सिर्फ़ तब, जब उसकी प्यास बीवी के स्पर्श से बुझे। वरना वह प्यास कहीं और से बुझाने का रास्ता खुद बना लेता है।
औरतें अगर सच में अपने पति को जोड़े रखना चाहती हैं पति की असली मंज़िल बन जाएँ।
घर सिर्फ़ दुआओं से नहीं चलते, बल्कि उन शारीरिक हक़ीक़तों से बंधे होते हैं जिन्हें अक्सर झिझक या शर्म के नाम पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगर बीवी खुद को पति की ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ फ़र्ज़ समझने लगे...तो एक दिन पति भी फ़र्ज़ अदा करके किसी और की हवस बनने निकल पड़ता है।

सुहागरात में पता चले कि पति तो नपुं_सक है तो तुरंत भरे समाज में इज्जत उछाल कर चली जाएंगी...तलाक के साथ शादी के खर्च का ह...
26/06/2026

सुहागरात में पता चले कि पति तो नपुं_सक है तो तुरंत भरे समाज में इज्जत उछाल कर चली जाएंगी...तलाक के साथ शादी के खर्च का हर्जाना वसूलना कानूनन हक हो जाएगा...
अब यदि किसी की पत्नी को सेक्स में रूचि नहीं या उसे पुरुष नहीं, बल्कि एक स्त्री के साथ उसकी भावनाएं मचलती है तो क्या समाज और कानून पुरूषों के पक्ष में फैसला करेगा..??
क्योंकि
करोड़ों पुरुष ऐसे है जो ऐसी पत्नी के साथ रह रहे है जिन्हें सेक्स मे कोई रुचि नहीं है…एक भी स्त्री ऐसी नहीं जो नपुंसक पति के साथ रहना पसंद करती हो !
जिस्म का भूखा कौन..??
फिर भी समाज में अफवाह उड़ा रखी है कि सभी मर्द जिस्म के भूखे हैं..!!........ ...... ......... ...... ......... ...... ..... ..... .....
हां,, मानते हैं कि समाज में कुछ मानसिक रोगी जिस्म के भूखे भेड़िए मौजूद हैं,,,,,मगर सभी पुरूषों को ग़लत कहना भी कहां तक सही है..❗
पुरुष सिर्फ पति या प्रेमी नहीं होता,, एक पुरुष किसी का पिता,भाई, किसी का बेटा भी होता है...!!
इसलिए थोड़ा पुरुष आयोग के गठन पर भी विचार करिए...!!

कुछ महिलाएं अब महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून का दुरूपयोग कर रही है और पुरूषों को झूठे मुकदमे में फंसाकर गुजाराभत्ता या एकमुश्त धन वसूल रही है..☝️
कल को कोई अपना शिकार न बने, इसलिए सोचिएगा जरूर..👍🏿

✍️

B.A. और M.A. वाली लड़कियां फिर भी सिंगल मिल जाएंगी आपको, आजकल हाईस्कूल और इंटर वाली लड़कियों के कुछ ज्यादा ही जवानी चर्र...
23/06/2026

B.A. और M.A. वाली लड़कियां फिर भी सिंगल मिल जाएंगी आपको, आजकल हाईस्कूल और इंटर वाली लड़कियों के कुछ ज्यादा ही जवानी चर्राई है..!
इसीलिए
एक बार काम , नौकरी , व्यापार धंधे से फुर्सत मिल जाये तो देख लेना कि आपकी बेटी /बेटे
1.कोचिंग ही जा रहे है न
2.मोबाइल में पासवर्ड तो नहीं है।
3.स्नेप चेट का इस्तेमाल कर रहे हो तो चेट डिलीट का आप्शन तो नहीं है।
4.घंटों अपने कमरे में या अपने दोस्तों के साथ तो समय नहीं बिता रहे है।
5. प्रोजेक्ट है, प्रोजेक्ट है कहकर दोस्तों के घर बार बार तो नहीं जा रहे
6. अगर आपकी बेटी का स्कूल आपसे सच्चाई कहे तो स्कूल की बात गंभीरतापूर्वक सुनें न कि गुस्सा हों।
7. कपडे और पहनावा मर्यादा मे तो हैं ना।
8. देर रात तक फोन का इस्तेमाल तो नही किया जा रहा है ना।
9. अगर बेटा/बेटी कंही बाहर हॉस्टल मे रहते है तो बिना बताए अचानक कभी-कभार मिलने पहुच जाए
10. बेटी के सहेलियो से बेटी के बारे मे फीडबैक लेते रहें
11.शापिंग के लिए भले ही सहेलिया साथ मे जा रही हो लेकिन परिवार का कोई न कोई सदस्य भी साथ मे जाए
12. एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर विशेष सतर्क रहें।
13. बेटा/बेटी के दोस्त और सहेलिया कौन है उनका व्यवहार चरित्र और चाल चलन कैसा है इसपर विशेष नजर रखें।

14.घर के सभी तीज त्यौहारो पूजा-पाठ और अपने -अपने धार्मिक कार्यो मे शामिल करें।
15. समाज मे घट रही निर्भया और श्रद्धा जैसी घटनाओ से उन्हे अवगत कराएं।........ ...... ......... ...... ......... ...... ..... ..... .....
अपनी लड़की को जरूर पढाएँ,आजादी दें मगर इतनी भी नहीं कि वो एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर ओयो में पुलिस के छापा में पकड़ी जाएं या जंगलों में टुकड़े हो जाए,,, आपकी सतर्कता ही बचाव है अन्यथा ये एक ऐसी उम्र होती है कि कोई भी बहक सकता है..!!
🙏🙏🌹🌹
जनहित मे जारी
✍️

1. अकेली रहती है! मतलब साथ (सेक्स) कीजरूरत तो होगी ही, ट्राय तो मार मौज़करने के लिए बेस्ट ऑप्शन है।2. बाहर रहकर पढ़ी है ...
07/06/2026

1. अकेली रहती है! मतलब साथ (सेक्स) की
जरूरत तो होगी ही, ट्राय तो मार मौज़
करने के लिए बेस्ट ऑप्शन है।

2. बाहर रहकर पढ़ी है मतलब घाट-घाट का
पानी पी हुई है। पक्का कैरेक्टरलेस है। हाथ
रखते ही तैयार हो जाएगी। ऐसों का क्या ?

3. दिल्ली में रहती है मतलब खुली होगी।
मेट्रो सिटीज़ में रहने वाली लड़कियां
तो बहुत खुली होती हैं, पता नहीं
कितनों के साथ सो जाए। यहाँ खुली
का मतलब सेक्स के लिए हमेशा आसानी से
उपलब्ध रहने से है।

3. गाँव की है, सीधी होगी। मतलब इसको
आसानी से बेवकूफ़ बनाकर यूज़ कर सकते हैं।

4. ब्रेकअप हो गया है! मतलब रोती लड़की
को विश्वास देकर सेक्स की जुगाड़ की
जा सकती है।

5. पहले बॉयफ्रेंड ने चीट किया है! ओह्ह
बेबी मैं ऐसा नहीं हूँ। दुनिया से अलग हूँ।ठ
यार चीट हुई लड़कियों को यूज़ करना औऱ
आसान है। सिली गर्ल्स......

6. नीच जात की है! यार ये छोटी जातियां
होती बहुत बेवकूफ़ हैं। मैं जाति को नहीं
मानता, शादी करूँगा बस इतने में तो तन-
मन-धन से समर्पित हो जायेंगी।

7. काली है! ओह्ह....यार रंग से कुछ नहीं
होता काला रंग तो बहुत खूबसूरत होता
है। यार उस कलूटी को ऐसे नहीं बोलूंगा
तो बिस्तर तक कैसे आएगी।

8. सेल्फ डिपेंड है! इमोशनल फूल बनाकर
सारी अय्याशी करने का बढ़िया ऑप्शन
है। इंडिपेंडस और बराबरी की बात कर देख
कैसे करती है।

9. तलाकशुदा है ! विधवा है! यार कंधा ही
तो देना है बस वो तैयार मिलेंगी।

10.अभी स्कूल में पढ़ रही है! लगती तो एकदम
माल है, गोटी सेट करनी पड़ेगी।

बातें चाहे जितने तरीके से हों.....केंद्र में बस
" सेक्स" है।

ऐसे ही नहीं हर दिन रेप हो रहे, ये रेप की तैयारी तो हरपल हो रही है।........ ...... ......... ...... ......... ...... ..... ..... .....
अगर आपको यह पढने में शर्म आ रही है तो आप भी मानसिक विकृति के शिकार हैं और आप ही ऐसी सोच ( जो ऊपर लिखा गया है) रखने वाले वह पुरुष हैं

इसलिए खुलकर रहिए खुलकर बोलिए सबके सामने बोलिए कोना मत ढूंढिए क्योंकि खुलकर और ज्यादा बोलने वाले लोग चुप रहने और कोना ढूंढने वाले लोगों की अपेक्षा ईमानदार और स्वच्छ चरित्र होते हैं ऐसा प्रकृति का नियम है......

ेटी_मेरी

पप्पू यादव के बयान पर मैडम जी को बहुत बुरा लगा था। ऐसी महिलाओं को बुरा लगना भी चाहिए जो अश्लील वीडियो वायरल वाले नेताओं ...
04/06/2026

पप्पू यादव के बयान पर मैडम जी को बहुत बुरा लगा था। ऐसी महिलाओं को बुरा लगना भी चाहिए जो अश्लील वीडियो वायरल वाले नेताओं के साथ इतनी सहजता से खिलखिलाते हुए खड़ी हो पाती हैं। यह कैसी विवशता है भाई? वाकई में महिला सम्मान इन्हें पता होता तो ऐसे नेताओं को बाहर के दरवाजे से ही धक्के मारकर निकाल दिया होता। ये नेता की बेटी हैं तो नेताइन बन गईं और बाकी महिलाओं का क्या जो ऐसे नेताओं की भेंट चढ़ जाती हैं, या फिर ऐसे गंदे माहौल के कारण उन्हें कभी राजनीति में आने ही नहीं दिया जाता है। फिर यह कैसा महिला सम्मान है?
ऐसे फर्जी और दोहरे चरित्र वाले नेताओं और नेताइनों का खुले तौर पर मैं विरोध करती हूँ।

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