29/08/2021
पत्नी के यार का जन्मदिन
थोड़ा अजीब लगता है सुनने और पढ़ने में लेकिन ऐसे कई लोग होंगे जिनके जीवन में ये दिन आता होगा।
हां जी पत्नी के पहले आशिक का जन्मदिवस।
आपकी पत्नी तो वो बाद में बनी है जनाब लेकिन उससे पहले वो किसी की प्रेमिका थी। आपके आने से पहले वो आज के दिन की तैयारी पहले से ही करने लगती थी।खुद को संवारने लगती थी, अपने यौवन को आशिक के जन्म दिवस पर उपहार स्वरूप देने के लिए। वो आज के दिन के लिए पहले से ही बधाई देने के लिए नए नए तरीके खोज के रखती थी। वो अपने यार के लिए कुछ नया करने की पूरी कोशिश करती थी, और ये रात उसके जीवन की लंबी रातों में से एक हुआ करती थी, वो एक एक पल का इंतजार करती थी की कब सूरज अपनी किरणों को बिखेरे और कब उसके कैद के दरवाजे खुले और वो अपने यार की बाहों में जा लिपटे और उसे अहसास दिलाए की इस जीवन में वो सिर्फ और सिर्फ मन से उसकी ही है और उसका यार भी अपने लबों को उसके लबों से मिलाते हुए उसे संपूर्णता का आश्वासन दे की वो हमेशा उसके साथ रहेगा । वो दिन उनके जीवन के यादगार दिनों में से एक हुआ करते थे। शहर की भागम भाग से दूर आज के दिन को यादगार बनाने के लिए वो एकांत की तलाश करते थे, कुछ पल सिर्फ एक दूसरे में समा जाने के लिए खोजते थे। आज वो अपने यार को इतना पूर्ण कर देती थी की यदि मैं तुम्हारे जीवन में किसी कारणवश ना रह पाई तो हमारी ये मोहब्बत भरी यादों को जीवन भर अपने साथ रखना। तुम भले किसी के हो जाना लेकिन आज के दिन को अपने यादों के सुनहरे पन्नो में समेट कर रखना। मैं भले किसी और की जीवन संगिनी बन जाऊ लेकिन तुम हमेशा मेरे प्यार के महक को अपने दिल की धड़कनों में रखना, मैं भले किसी और के नाम का सिंदूर अपनी मांग में भरू लेकिन मेरे यौवन पर पहला नाम तुम्हारा ही रहेगा। मैं भले किसी और के नाम की मेंहदी अपने हाथो में लगाऊं लेकिन उस मेंहदी का रंग तुम्हारे ही प्यार से गाढ़ा होगा। वो कोशिश करती थी की आज के दिन सूर्यदेव अपनी चाल धीरे कर लें या कुछ पल वही ठहर जाए और उनके प्यार के साक्षी बने, जैसे उसे पता था कि ये सब क्षणिक है, कुछ ही दिनों में उसे किसी और के घर की रानी बनना है, कोई और है जो उसका इंतजार कर रहा है। और अंत में कुछ मनमोहक उपहारों के साथ आज के दिन को दोनो विदा करते थे। वो उसको घर के पास वाली गली के पहले तक छोड़ देता था, प्यार के मिठास को याद दिलाने के लिए एक चॉकलेट देता था और वो आपके जीवन में मधुरता लाने के लिए अपने पिता जी की इज्जत का ख्याल करते हुए उससे विदा लेती थी।
आज के दिन वो भगवान से मन ही मन ये प्रार्थना करती है की हे प्रभु मेरे पहले प्यार का ख्याल रखना और उसे दुनिया की सारी खुशियां देना। अपने मन के भाव को छिपाते हुए पूरे घर का ख्याल अन्य दिनों की तरह ही रखती है और शाम को जब आप दफ्तर से वापस आते है
तो आपसे धीमी आवाज में कहती है आज कही बाहर घूमने चलें, घर में मन नहीं लग रहा।
किसी की प्रेमिका का पति होना आपके धैर्य की परीक्षा है भाईसाहब !!