28/01/2026
*इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी सिंगरौली एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संवेदनशील पहल*
*जिला जेल बैढ़न में सजायफ्ता कैदियों एवं महिला बंदियों के बच्चों को मिला मानवीय संबल*
दिनांक 27 जनवरी 2026 को इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी, सिंगरौली द्वारा समाज के उपेक्षित वर्गों के पुनर्वास, मानसिक शांति एवं सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला जेल बैढ़न में एक अत्यंत सराहनीय एवं मानवीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत सजायफ्ता कैदियों को भजन, कीर्तन एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में उपयोग हेतु *म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट प्रदान किए गए,* जिससे बंदियों के मानसिक तनाव में कमी आए तथा उनमें आत्मसंयम, अनुशासन एवं सकारात्मक ऊर्जा का विकास हो सके।
इसी क्रम में महिला बंदियों को शॉल प्रदान की गई। साथ ही उनके साथ रह रहे बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल सामग्री जैसे बॉल, पज़ल गेम,कलर ड्रॉइंग बुक, पेंसिल, रबर,बच्चों के खिलौने, म्यूजिकल केसियो, तथा एक वर्ष से कम आयु के बच्चों हेतु पालना (क्रैडल) एवं बच्चों के पहनने योग्य कपड़े आदि आवश्यक सामग्री इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी सिंगरौली की ओर से प्रदान की गई।
उक्त समस्त सामग्री का वितरण जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय श्री अतुल कुमार खण्डेलवाल के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर माननीय न्यायाधीश महोदय ने रेड क्रॉस सोसायटी सिंगरौली द्वारा किए जा रहे मानवीय प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल बंदियों के जीवन में सुधार, आत्मविश्वास एवं पुनर्वास की दिशा में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती है।
कार्यक्रम में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्री शिवचरण पटेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री मनोरम तिवारी,जिला विधिक अधिकारी (DLO) श्री अमित शर्मा,
जेल अधीक्षक श्री एल. के. त्रिपाठी, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी सिंगरौली के चेयरमैन श्री एस. डी. सिंह, रेडक्रॉस सचिव डॉ. ओ. पी. राय तथा रेड क्रॉस द्वारा संचालित विभिन्न इकाइयों के अधिकारी एवं कर्मचारीगण गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।
*कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कारागार में निरुद्ध बंदियों एवं उनके बच्चों को मानवीय संवेदना का अनुभव कराते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ने हेतु मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक संबल प्रदान करना रहा।*
*“जहाँ करुणा बनती है सुधार का माध्यम — वहीं से समाज में परिवर्तन की शुरुआत होती है।”*