08/04/2025
हैदराबाद में जंगल कटाई का मुद्दा हाल के दिनों में काफी चर्चा में रहा है, खासकर कांचा गचीबावली क्षेत्र में। यहाँ इस मामले का पूरा सच और तथ्य निष्पक्ष रूप से समझने की कोशिश करते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
कांचा गचीबावली, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) के पास का एक क्षेत्र है, जहाँ लगभग 400 एकड़ का हरा-भरा जंगल मौजूद था। इसे स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् हैदराबाद के "फेफड़े" के रूप में देखते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र न केवल जैव-विविधता से भरपूर है, बल्कि शहर के पर्यावरण संतुलन में भी योगदान देता है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे, पक्षी, और छोटे-बड़े वन्यजीव (जैसे मोर, हिरण, सांप आदि) पाए जाते हैं।
तेलंगाना सरकार ने इस जमीन को IT पार्क और बुनियादी ढांचा विकास के लिए आवंटित करने का फैसला किया। सरकार का दावा है कि इससे 50,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और 5 लाख नौकरियाँ पैदा होंगी। इसके लिए मार्च 2025 के अंत में पेड़ों की कटाई शुरू की गई। भौगोलिक विश्लेषण के अनुसार, 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच लगभग 2 वर्ग किलोमीटर जंगल और वनस्पति नष्ट हो चुकी थी।
विरोध और आंदोलन
छात्रों और पर्यावरणविदों का विरोध: हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस कटाई का जमकर विरोध किया। उनका कहना है कि यह जंगल 450 से अधिक प्रजातियों का घर है, और इसे काटने से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी, जैसे भूजल स्तर में कमी, तापमान में वृद्धि (अनुमानित 4 डिग्री सेल्सियस तक), और वन्यजीवों का विस्थापन।
2 अप्रैल की घटना: विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ा। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कम से कम 20 छात्र घायल हुए। कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल दावे: इस दौरान कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जैसे जानवरों के भागने या बुलडोजर से लड़ते हाथी की क्लिप। बाद में पता चला कि कुछ तस्वीरें AI-जनरेटेड थीं, और हाथी वाला वीडियो पश्चिम बंगाल का पुराना था, जिसे गलत तरीके से हैदराबाद से जोड़ा गया।
कानूनी हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और 4 अप्रैल 2025 को कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के मुख्य सचिव को कड़ी चेतावनी दी, यह पूछते हुए कि बिना पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और अनुमति के कटाई कैसे शुरू हुई। कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को क्षेत्र का दौरा कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया। रिपोर्ट में पाया गया कि बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए, और क्षेत्र में मोर, हिरण जैसे वन्यजीव मौजूद थे।
हाई कोर्ट की भूमिका: तेलंगाना हाई कोर्ट ने भी पहले विकास कार्यों पर रोक लगाई थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सरकार का पक्ष
तेलंगाना सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि यह जमीन आधिकारिक तौर पर "जंगल" नहीं है और HCU कैंपस का हिस्सा नहीं है। यह 2,300 एकड़ जमीन का हिस्सा है, जो 1974 में यूनिवर्सिटी को दी गई थी, लेकिन कानूनी रूप से राज्य सरकार की संपत्ति है। पहले भी इस जमीन के हिस्सों पर बस डिपो, स्पोर्ट्स स्टेडियम, और IIIT कैंपस जैसे प्रोजेक्ट बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि कटाई से वन्यजीवों को नुकसान नहीं हुआ, और विकास जरूरी है। हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि बिना EIA के इतने बड़े पैमाने पर कटाई गैरकानूनी है।
विपक्ष और राजनीति
विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। BRS नेता केटी राव (KTR) ने दावा किया कि उनकी सरकार ने हैदराबाद को हरा-भरा बनाया था, और इस कटाई से पर्यावरण को नुकसान होगा। उन्होंने इस जमीन को ईको-पार्क में बदलने की मांग की।
वास्तविक प्रभाव
पर्यावरणीय नुकसान: अभी तक लगभग 100-150 एकड़ जंगल काटा जा चुका है। इससे स्थानीय जैव-विविधता को नुकसान हुआ, और कई वन्यजीव बेघर हुए। भूजल स्तर और तापमान पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
सामाजिक प्रभाव: स्थानीय लोग और ग्रामीण भी विरोध में शामिल हुए, क्योंकि जंगल उनके लिए संसाधनों का स्रोत था।
वर्तमान स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक कटाई पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई जारी है, और कोर्ट ने सरकार से पर्यावरण प्रभाव आकलन और कटाई की अनुमति जैसे सवालों पर जवाब मांगा है l