31/03/2026
बिहार के पहले जिला अस्पताल के रूप में सीतामढ़ी ने 78 वर्षीय महिला के स्टेज-4 हार्ट अटैक का सफल उपचार कर बनाया इतिहास ।
डुमरा प्रखंड की 78 वर्षीय महिला, श्रीमती अन्नपूर्णा मिश्रा,
NYHA Stage IV हृदय विफलता और LVEF 30% के साथ अत्यंत नाज़ुक अवस्था में आईं… जब उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी । 25 मार्च की रात को लगभग 01 बजे महिला को गंभीर हार्ट अटैक आया । उस समय शहर के निज़ी क्लिनिक वालो ने महिला की स्थिति को देख कर , उन्हें भर्ती नहीं लिया । तब मरीज के दामाद , हिंदुस्तान अख्तर के पत्रकार मनीष कुमार ने अस्पताल प्रबंधक विजय झा से संपर्क कर , तुरंत उन्हें सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया । रात को अस्पताल के ऑन ड्यूटी डॉक्टर - स्टाफ द्वारा सूचना मिलते ही , आईसीयू के प्रभारी डॉ मृत्युंजय कुमार , MBBS, MD क्रिटिकल केयर मेडिसिन और इंटेसिविस्ट- ICU स्पेशलिस्ट , तुरत अस्पताल पहुंचे । उन्होंने तुरंत इलाज शुरू लिया । डॉ मृत्युंजय - जो कि सीतामढ़ी शहर के ही निवासी है और मेट्रो सिटी की जिंदगी को छोड़ कर जिलावासियों की सेवा के लिए , सीतामढ़ी में आए है - ने अपना पूरा अनुभव उड़ेल दिया । उपचार में डाययूरेटिक्स (Diuretics) , हेपरिन थेरेपी (Heparinisation) , ऑक्सीजन सपोर्ट (NIV) का उपयोग आईसीयू टीम ने प्रयोग किया । इससे धीरे-धीरे सुधार हुआ , NIV सपोर्ट - साधारण ऑक्सीजन मास्क - सामान्य हवा (21%) हुआ ।
यह सफर था क्रिटिकल केयर से रिकवरी तक का , जो संभव हुआ समय पर इलाज, निरंतर प्रयास और जीवन के प्रति विश्वास से।
सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता का एक और उदाहरण सामने आया है। मार्च माह में अन्नपूर्णा मिश्रा नाम की एक महिला मरीज अत्यंत गंभीर स्थिति (स्टेज-4) में अस्पताल लाई गईं। उन्हें तेज सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और बेचैनी की शिकायत थी। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि मरीज को गंभीर हार्ट अटैक हुआ है।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया। आवश्यक जांच जैसे ECG और ब्लड टेस्ट तुरंत किए गए तथा ऑक्सीजन सपोर्ट और जीवनरक्षक दवाइयों के साथ इलाज शुरू किया गया। साथ ही, मरीज को नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (Non-Invasive Ventilation - NIV) सपोर्ट पर रखा गया, जिससे उनकी सांस लेने की स्थिति को स्थिर किया जा सका।
मरीज को 24×7 निगरानी में रखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निरंतर उपचार प्रदान किया गया। डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयास और समर्पित सेवा के परिणामस्वरूप मा 5 दिनों के भीतर मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
इलाज के दौरान नियमित मॉनिटरिंग और उचित देखभाल के कारण मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से आज 05 दिन बाद डिस्चार्ज हो गईं।
यह सफल उपचार सदर अस्पताल की तत्परता, कुशल प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि गंभीर से गंभीर स्थिति में भी समय पर उचित उपचार और टीम वर्क से मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
सदर अस्पताल लगातार आम जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।