Sadar Hospital Sitamarhi

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Sadar Hospital Sitamarhi Government Hospital Sitamarhi

03/08/2026

*आईसीयू*, *सदर* *अस्पताल*, *सीतामढ़ी* में पहली बार सफल ट्रेकियोस्टॉमी (*Tracheostomy*) की गई। 62 वर्षीय मरीज श्रुबैदा खातून को गंभीर अस्थमा (Bronchial Asthma/COPD के कारण श्वास लेने में अत्यधिक कठिनाई (*Severe* *Respiratory* *Distress*) थी । इन्हें लंबे समय तक *वेंटिलेटर* सहायता की आवश्यकता थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जीवनरक्षक ट्रेकियोस्टॉमी , एनेस्थेथिक्स डॉक्टर *मृत्युंजय* *कुमार* ( एमडी क्रिटिकल केयर , मेडिसिन ) द्वारा सफलतापूर्वक रविवार 02 अगस्त को की गई। इस दौरान मरीज के गर्दन से एक सर्जरी कर के सांस की नली में एक *ट्यूब* डाला गया । ताकि मरीज को सांस लेने में दिक्कत नहीं हो । फिर ट्यूब को वेंटीलेटर से लगाकर जीवन रक्षक प्रक्रिया की गई । एक इस जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया में *डीएनबी* प्रथम वर्ष के छात्र डॉक्टर अविनाश सहयोगी की भूमिका में रहे । एक तरफ़ यह जटिल प्रक्रिया को *जिला* *अस्पताल* *लेवल* पर करके जहाँ राज्य सरकार के नई *रेफ़रल* नीति में अपना योगदान दिया है , राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी योजना *आईसीयू* के सफ़र *संचालन* को भी नई गति दी है वही *डीएनबी* *कोर्स* संचालन *की* *महत्ता* को भी मोटे अक्षरों में रेखांकित किया है । डीएनबी कोर्स संचालन की सार्थकता भी सिद्ध की है ।
*जिला* *पदाधिकारी* डॉक्टर रिची पांडे के मार्गदर्शन , सिविल सर्जन डॉक्टर आर के यादव के नेतृत्व और डीएस डॉक्टर मनोज कुमार के सतत् मॉनिटरिंग से ही या संभव हो पाया है ।
जिला अस्पताल के स्तर पर यह जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया करने वाला संभवतः सीतामढ़ी सदर अस्पताल पहला ही होगा ।
**जो कि यह दर्शाती है कि जिला में ही उन्नत और जीवन रक्षक क्रिटिकल केयर सेवाये उपलब्ध है । **

*आईसीयू*, *सदर* *अस्पताल*, *सीतामढ़ी* में पहली बार सफल ट्रेकियोस्टॉमी (*Tracheostomy*) की गई। 62 वर्षीय मरीज श्रुबैदा खा...
03/08/2026

*आईसीयू*, *सदर* *अस्पताल*, *सीतामढ़ी* में पहली बार सफल ट्रेकियोस्टॉमी (*Tracheostomy*) की गई। 62 वर्षीय मरीज श्रुबैदा खातून को गंभीर अस्थमा (Bronchial Asthma/COPD के कारण श्वास लेने में अत्यधिक कठिनाई (*Severe* *Respiratory* *Distress*) थी । इन्हें लंबे समय तक *वेंटिलेटर* सहायता की आवश्यकता थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जीवनरक्षक ट्रेकियोस्टॉमी , एनेस्थेथिक्स डॉक्टर *मृत्युंजय* *कुमार* ( एमडी क्रिटिकल केयर , मेडिसिन ) द्वारा सफलतापूर्वक रविवार 02 अगस्त को की गई। इस दौरान मरीज के गर्दन से एक सर्जरी कर के सांस की नली में एक *ट्यूब* डाला गया । ताकि मरीज को सांस लेने में दिक्कत नहीं हो । फिर ट्यूब को वेंटीलेटर से लगाकर जीवन रक्षक प्रक्रिया की गई । एक इस जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया में *डीएनबी* प्रथम वर्ष के छात्र डॉक्टर अविनाश सहयोगी की भूमिका में रहे । एक तरफ़ यह जटिल प्रक्रिया को *जिला* *अस्पताल* *लेवल* पर करके जहाँ राज्य सरकार के नई *रेफ़रल* नीति में अपना योगदान दिया है , राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी योजना *आईसीयू* के सफ़र *संचालन* को भी नई गति दी है वही *डीएनबी* *कोर्स* संचालन *की* *महत्ता* को भी मोटे अक्षरों में रेखांकित किया है । डीएनबी कोर्स संचालन की सार्थकता भी सिद्ध की है ।
*जिला* *पदाधिकारी* डॉक्टर रिची पांडे के मार्गदर्शन , सिविल सर्जन डॉक्टर आर के यादव के नेतृत्व और डीएस डॉक्टर मनोज कुमार के सतत् मॉनिटरिंग से ही या संभव हो पाया है ।
जिला अस्पताल के स्तर पर यह जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया करने वाला संभवतः सीतामढ़ी सदर अस्पताल पहला ही होगा ।
**जो कि यह दर्शाती है कि जिला में ही उन्नत और जीवन रक्षक क्रिटिकल केयर सेवाये उपलब्ध है । **

24/05/2026

सदर अस्पताल में डायग्नोस्टिक की लापरवाही से मरीज परेशान, CT स्कैन सेंटर पर पावर बैकअप न होने से अक्सर होता है हंगामा
​सीतामढ़ी। सदर अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर संचालित CT स्कैन सेंटर के प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल उपाधीक्षक (DS) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बिजली कटने की स्थिति में सेंटर के पास अपना कोई पावर बैकअप (जेनरेटर) उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण आए दिन मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन जाती है।
​दर्जनों बार पत्र भेजने के बाद भी एजेंसी मौन
​अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार PPP मोड पर चल रहे CT स्कैन सेंटर, डायलिसिस सेंटर और निजी एजेंसी द्वारा संचालित एक्स-रे सेंटर, सभी को अपना अलग बिजली कनेक्शन और पावर बैकअप रखना अनिवार्य है। जहां एक ओर डायलिसिस और एक्स-रे सेंटर नियमों का पालन कर रहे हैं, वहीं CT स्कैन का संचालन करने वाली एजेंसी 'स्पंदन डायग्नोस्टिक' ने अब तक जेनरेटर की व्यवस्था नहीं की है।
​अस्पताल उपाधीक्षक ने बताया कि इस संबंध में संबंधित एजेंसी को अब तक दर्जनों बार पत्र भेजा जा चुका है और मामले की गंभीरता से वरीय अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। इसके बावजूद एजेंसी द्वारा अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
​अस्पताल प्रशासन करेगा कड़ी कार्रवाई
​बिजली गुल होने पर CT स्कैन सेवाएं ठप होने से दूर-दराज से आने वाले आम मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश पनप रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इस स्थिति को बेहद गंभीरता से लिया है। उपाधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी के इस अड़ियल रुख और लापरवाही के खिलाफ जल्द ही पुनः एक बार उच्च अधिकारियों को कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।

24/05/2026

स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ।

बिहार के पहले जिला अस्पताल के रूप में सीतामढ़ी ने 78 वर्षीय महिला के स्टेज-4 हार्ट अटैक का सफल उपचार कर बनाया इतिहास । ड...
31/03/2026

बिहार के पहले जिला अस्पताल के रूप में सीतामढ़ी ने 78 वर्षीय महिला के स्टेज-4 हार्ट अटैक का सफल उपचार कर बनाया इतिहास ।

डुमरा प्रखंड की 78 वर्षीय महिला, श्रीमती अन्नपूर्णा मिश्रा,
NYHA Stage IV हृदय विफलता और LVEF 30% के साथ अत्यंत नाज़ुक अवस्था में आईं… जब उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी । 25 मार्च की रात को लगभग 01 बजे महिला को गंभीर हार्ट अटैक आया । उस समय शहर के निज़ी क्लिनिक वालो ने महिला की स्थिति को देख कर , उन्हें भर्ती नहीं लिया । तब मरीज के दामाद , हिंदुस्तान अख्तर के पत्रकार मनीष कुमार ने अस्पताल प्रबंधक विजय झा से संपर्क कर , तुरंत उन्हें सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया । रात को अस्पताल के ऑन ड्यूटी डॉक्टर - स्टाफ द्वारा सूचना मिलते ही , आईसीयू के प्रभारी डॉ मृत्युंजय कुमार , MBBS, MD क्रिटिकल केयर मेडिसिन और इंटेसिविस्ट- ICU स्पेशलिस्ट , तुरत अस्पताल पहुंचे । उन्होंने तुरंत इलाज शुरू लिया । डॉ मृत्युंजय - जो कि सीतामढ़ी शहर के ही निवासी है और मेट्रो सिटी की जिंदगी को छोड़ कर जिलावासियों की सेवा के लिए , सीतामढ़ी में आए है - ने अपना पूरा अनुभव उड़ेल दिया । उपचार में डाययूरेटिक्स (Diuretics) , हेपरिन थेरेपी (Heparinisation) , ऑक्सीजन सपोर्ट (NIV) का उपयोग आईसीयू टीम ने प्रयोग किया । इससे धीरे-धीरे सुधार हुआ , NIV सपोर्ट - साधारण ऑक्सीजन मास्क - सामान्य हवा (21%) हुआ ।
यह सफर था क्रिटिकल केयर से रिकवरी तक का , जो संभव हुआ समय पर इलाज, निरंतर प्रयास और जीवन के प्रति विश्वास से।
सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता का एक और उदाहरण सामने आया है। मार्च माह में अन्नपूर्णा मिश्रा नाम की एक महिला मरीज अत्यंत गंभीर स्थिति (स्टेज-4) में अस्पताल लाई गईं। उन्हें तेज सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और बेचैनी की शिकायत थी। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि मरीज को गंभीर हार्ट अटैक हुआ है।

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया। आवश्यक जांच जैसे ECG और ब्लड टेस्ट तुरंत किए गए तथा ऑक्सीजन सपोर्ट और जीवनरक्षक दवाइयों के साथ इलाज शुरू किया गया। साथ ही, मरीज को नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (Non-Invasive Ventilation - NIV) सपोर्ट पर रखा गया, जिससे उनकी सांस लेने की स्थिति को स्थिर किया जा सका।

मरीज को 24×7 निगरानी में रखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निरंतर उपचार प्रदान किया गया। डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयास और समर्पित सेवा के परिणामस्वरूप मा 5 दिनों के भीतर मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

इलाज के दौरान नियमित मॉनिटरिंग और उचित देखभाल के कारण मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से आज 05 दिन बाद डिस्चार्ज हो गईं।
यह सफल उपचार सदर अस्पताल की तत्परता, कुशल प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि गंभीर से गंभीर स्थिति में भी समय पर उचित उपचार और टीम वर्क से मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
सदर अस्पताल लगातार आम जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

30/03/2026
30/03/2026

For the first time in Bihar, a patient with heart failure was successfully managed at Sadar Hospital, Sitamarhi, using state-of-the-art facilities.”

This achievement highlights the growing capability of Sadar Hospital Sitamarhi in delivering advanced critical care services, ensuring that patients receive high-quality treatment closer to home without needing referral to distant tertiary centers.

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Sitamarhi
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