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जब गैस सिलेंडर ₹400–₹500 था, तब सड़कों पर हंगामा मचाने वाले आज ₹900–₹1100 के सिलेंडर पर चुप क्यों हैं? क्या जनता की तकली...
29/03/2026

जब गैस सिलेंडर ₹400–₹500 था, तब सड़कों पर हंगामा मचाने वाले आज ₹900–₹1100 के सिलेंडर पर चुप क्यों हैं? क्या जनता की तकलीफ उस समय असली थी और आज नकली हो गई?

के नाम पर देश को बड़े सपने दिखाए गए—
👉 हर साल 2 करोड़ रोजगार
👉 महंगाई पर काबू
👉 100 स्मार्ट सिटी
👉 काला धन वापस

लेकिन जरा जमीन पर हकीकत देखिए—

बेरोजगारी: की रिपोर्ट्स के मुताबिक कई समय तक बेरोजगारी दर ऊंचे स्तर पर बनी रही। युवा आज भी नौकरी के लिए भटक रहा है।

महंगाई: खाने-पीने से लेकर गैस सिलेंडर तक—हर चीज आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। घरेलू बजट बिगड़ चुका है।

अर्थव्यवस्था: के आंकड़े भी बताते हैं कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है।

और जब इन मुद्दों पर सवाल पूछो, तो जवाब क्या मिलता है?

👉 मंदिर बनाम मस्जिद
👉 हिंदू बनाम मुस्लिम
👉 भारत बनाम पाकिस्तान

की राजनीति अब मुद्दों से नहीं, भावनाओं से चल रही है—ताकि असली सवाल दबे रहें।

और अगर कोई आवाज उठाए—
तो उसे देशद्रोही, गद्दार या “एंटी-नेशनल” का टैग दे दो।

क्या यही लोकतंत्र है?

सच्चाई कड़वी है—
जनता को मुद्दों से भटका कर सिर्फ वोट लिया जा रहा है।

अब फैसला आपके हाथ में है—
👉 सवाल पूछोगे या चुप रहोगे?
👉 अपने हक के लिए खड़े होगे या सिर्फ भीड़ का हिस्सा बनोगे?

याद रखो—
आज की चुप्पी, कल की सबसे बड़ी सजा बन सकती है।

कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए महापुरुषों और सम्मानित नेताओं पर अनर्गल टिप्पणी करते हैं। हाल ही में  द्वारा बहुजन ...
24/03/2026

कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए महापुरुषों और सम्मानित नेताओं पर अनर्गल टिप्पणी करते हैं। हाल ही में द्वारा बहुजन समाज की महान नेता जी के सम्मान में बने स्थलों पर की गई टिप्पणी न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि उनकी संकीर्ण सोच को भी दर्शाती है।

को शायद यह समझ नहीं है कि ये स्थल केवल “पत्थर” नहीं हैं, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं। ये प्रेरणा स्थल उन करोड़ों बहुजनों की भावनाओं का केंद्र हैं, जिन्होंने सदियों के अन्याय के बाद सम्मान पाना शुरू किया।

कोई साधारण राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक मिशन है — समाज के दबे-कुचले वर्गों को उनका हक दिलाने का मिशन। ऐसे में इस मिशन और इसके प्रतीकों का अपमान करना बेहद निंदनीय है।

पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ और चमचागिरी में सच्चाई से भटक जाता है, तो उसकी विश्वसनीयता अपने आप खत्म हो जाती है। पहले भी गलत खबरों के कारण सवालों में घिरे लोगों को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।

हम बहुजन समाज के लोग अपने मार्ग और अपने महापुरुषों के सम्मान को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं। हमें किसी के भटकाने की आवश्यकता नहीं है।
#लखनऊचलो

✍️ अंकेश कुमार

10/03/2026

बहन कुमारी मायावती जी ज़िंदाबाद 🙏
BSP ज़िंदाबाद

मान्यवर कांशीराम जी केवल एक नाम नहीं, बल्कि बहुजन समाज की चेतना, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक हैं।एक साधारण परिवार में ...
10/03/2026

मान्यवर कांशीराम जी केवल एक नाम नहीं, बल्कि बहुजन समाज की चेतना, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक हैं।

एक साधारण परिवार में जन्म लेकर उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण शोषित, वंचित और बहुजन समाज को जागरूक करने और उन्हें सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने संगठन बनाया, लोगों को जोड़ा और समाज को यह विश्वास दिलाया कि अगर बहुजन एकजुट हो जाएं तो वे अपनी किस्मत खुद बदल सकते हैं।

मान्यवर जी ने अपना पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया। न उन्होंने परिवार बसाया और न ही व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को महत्व दिया। उनका एक ही लक्ष्य था — बहुजन समाज को उसका हक और सम्मान दिलाना।

आज उनकी जयंती पर हम सभी यह संकल्प लें कि उनके विचारों, उनके संघर्ष और उनके मिशन को आगे बढ़ाते रहेंगे।

मान्यवर कांशीराम जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। 🙏

#लखनऊचलो

माननीय प्रदेश अध्यक्ष जी ने जो जिम्मेदारी हम सभी कार्यकर्ताओं को सौंपी है, उसे हम पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ...
08/03/2026

माननीय प्रदेश अध्यक्ष जी ने जो जिम्मेदारी हम सभी कार्यकर्ताओं को सौंपी है, उसे हम पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का संकल्प लेते हैं।

आज के दौर में जब सच को दबाने और भ्रम फैलाने की कोशिशें होती हैं, तब हमारे प्रदेश अध्यक्ष जी का यह कथन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि "बसपा के कार्यकर्ता ही बसपा की असली मीडिया हैं।"

इसका अर्थ है कि हम सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि बहुजन समाज पार्टी की नीतियों, विचारधारा और जनहित में किए गए कार्यों को जन-जन तक पहुँचाएँ। हम सच्चाई को समाज के सामने रखें और संगठन की आवाज़ बनकर हर मंच पर मजबूती से खड़े रहें।

हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य करते रहेंगे।
बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।


वीर कभी मैदान से भागते नहीं, उनकी मौत को इतिहास 'वीरगति' लिखता है!" ✊🏾🔥दुनिया के सबसे बड़े और खूंखार शोषकों (अमेरिका और ...
03/03/2026

वीर कभी मैदान से भागते नहीं, उनकी मौत को इतिहास 'वीरगति' लिखता है!" ✊🏾🔥

दुनिया के सबसे बड़े और खूंखार शोषकों (अमेरिका और इजरायल) के सामने आज के इस दौर में अच्छे-अच्छे देशों और हुक्मरानों की रूह कांप जाती है। लेकिन अली ख़ामेनेई वह नाम है, जिसने इस जालिम और अहंकारी व्यवस्था की आंखों में आंखें डालकर आखिरी सांस तक बगावत की!

आज यह मैटर नहीं करता कि वह बंदा ज़िंदा है या नहीं। इतिहास यह देखेगा कि वह जिया कैसे! जब आसमान से मौत बरस रही थी, तब वह कायरों की तरह न किसी बंकर में छिपा, न अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़कर भागा।

दुनिया के सबसे बड़े हथियारों और गीदड़भभकियों के सामने वह ना झुका, ना रुका!
उसने दुनिया को दिखा दिया कि जब ज़ालिम सत्ता आप पर हावी होना चाहे, तो घुटने टेकने और समझौते करने से बेहतर है अपनी कौम के लिए लड़ते हुए शहीद हो जाना।

हथियार और मिसाइलें सिर्फ शरीर को मिटा सकते हैं, उस हौसले को नहीं जो अपने लोगों की खातिर कुर्बान होना जानता है। ऐसे योद्धा मरते नहीं, अमर हो जाते हैं!

इतिहास हमेशा याद रखेगा कि एक शेर था, जिसने मौत चुनी, लेकिन गुलामी नहीं! 🩸🔥

बीफ एक्सपोर्ट कंपनी Allana Group ने BJP को 30 करोड़ रुपए का चंदा दिया     #
28/02/2026

बीफ एक्सपोर्ट कंपनी Allana Group ने BJP को 30 करोड़ रुपए का चंदा दिया


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आज मैं आप सभी के सामने भारत के विकास से जुड़ी उस सच्चाई को रखने आया हूँ, जिसे हम जानते तो हैं, लेकिन मानने से कतराते हैं...
28/02/2026

आज मैं आप सभी के सामने भारत के विकास से जुड़ी उस सच्चाई को रखने आया हूँ, जिसे हम जानते तो हैं, लेकिन मानने से कतराते हैं।
भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा कोई विदेशी ताकत नहीं, बल्कि हमारी अपनी बनाई हुई व्यवस्था — जातिवाद है।

साथियो,
जब दुनिया विज्ञान, तकनीक और शिक्षा में आगे बढ़ रही थी, तब हमारा समाज यह तय करने में लगा रहा कि कौन ऊँच है और कौन नीच।
हमने इंसान को इंसान नहीं, जाति में बाँटकर देखा।
नतीजा यह हुआ कि प्रतिभा दब गई, मेहनत हार गई और भाईचारा टूट गया।

सोचिए,
क्या एक गरीब का दर्द उसकी जाति देखकर कम या ज़्यादा होता है?
क्या एक होनहार बच्चे की प्रतिभा उसकी जाति से तय होती है?
नहीं!
फिर भी हमने सदियों तक यही अन्याय किया।

बंधुओ और बहनो,
जातिवाद ने हमें आपस में लड़ाया,
राजनीति ने इसे हथियार बनाया,
और विकास पीछे छूटता चला गया।

जब समाज बँटा होता है,
तो देश मज़बूत नहीं बन सकता।
जब एक हाथ दूसरे हाथ को काटने लगे,
तो शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता।

आज ज़रूरत है कि हम
जाति नहीं, इंसान देखें।
नाम नहीं, काम देखें।
जन्म नहीं, योग्यता देखें।

साथियो,
जातिवाद से निजात केवल कानून से नहीं आएगी,
यह सोच बदलने से आएगी।
यह तब आएगी जब हम अपने बच्चों को यह सिखाएँगे कि
सभी इंसान बराबर हैं।

भाईचारा कोई कमज़ोरी नहीं,
भाईचारा ही सबसे बड़ी ताकत है।
जिस दिन हम एक-दूसरे का हाथ थाम लेंगे,
उस दिन भारत को कोई रोक नहीं पाएगा।

आइए, आज संकल्प लें—
न हम भेदभाव करेंगे,
न भेदभाव सहेंगे।
न जाति के नाम पर नफ़रत फैलाएँगे,
न फैलने देंगे।

एक भारत, श्रेष्ठ भारत
का सपना तभी साकार होगा
जब हर भारतवासी कहेगा—

मेरी पहचान मेरी जाति नहीं, मेरा देश है।

इन्हीं शब्दों के साथ
मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
जय भीम
जय भारत🇮🇳





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ये जो दिव्यज्ञानी लोग ज्ञान झाड़ते है कि बहन मायावती जी ने 2007 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में जब से बहुजन हिताय से...
25/02/2026

ये जो दिव्यज्ञानी लोग ज्ञान झाड़ते है कि बहन मायावती जी ने 2007 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में जब से बहुजन हिताय से सर्वजन हिताय पर अपना फोकस शिफ्ट किया है तब से बहुजन समाज पार्टी से मिशनरी लोग टूटने शुरू हों गए बसपा आज प्रदेश में जीरो लोकसभा और एक विधानसभा सीट तक सिमट चुकी है चलिये पड़ताल करते कि 2002 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव से 2014 के लोकसभा चुनाव तक फिर 2014 के चुनाव से 2019 के लोकसभा चुनावों तक फिर 2019 के लोकसभा चुनावों से 2024 के लोकसभा चुनाव तक पार्टी के वोटर बहुजन हिताय से सर्वजन हिताय के कारण कम हुए है याफिर संविधान बचाओं के नाम पर मुर्ख बने 2002 उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में मिले वोट 1.24 करोड़ 2004 में मिले वोट 1.31 करोड़ 2007 में मिले वोट 1.59 करोड़ 2009 में मिले वोट 1.52 करोड़ 2012 में मिले वोट 1.96 करोड़ 2014 में मिले वोट 1.59 करोड़ 2017 में मिले वोट 1.93 करोड़ 2019 में मिले वोट 1.67 करोड़ 2022 और 2024 के चुनावों में दलितों को संविधान बचाना था याफिर सपा और कांग्रेस बचानी थी ये तो वही जाने लेकिन ये सच कि 2007 में बसपा को 1.59 करोड़ वोट आए थे ये 2012 में 1.96 करोड़ थे 2014 के लोकसभा चुनावों में भी 2007 से कम वोट नहीं थे 2017 में फिर 1.93 करोड़ वोट आए जब 2019 में सपा और बसपा ने गठबंधन में चुनाव लड़ा तब भी 1.67 करोड़ वोट आए थे यानि बहुजन हिताय से सर्वजन हिताय नारे के 2007 से 2019 तक 12 सालों में भी खासकर अंबेडकरवादी दलितों ने बहनजी का साथ कभी नहीं छोड़ा था भले ही 2014 में हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद नरेटिव में फंसकर बसपा से भी कुछ वोट सपा और भाजपा की तरफ गए लेकिन इनका कोर वोटर उसके ही साथ रहा है इसके बाद कोरोनाकाल के बाद 2022 उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव हुआ जिसमें वो कही भी नहीं दिखती जैसे मनुवादी मीडिया के षड़यंत्रों ने तगड़ा नुकसान पहुँचाया बहुत से दलित के दिमाग में भी ये बात बैठ गई कि बसपा अब मुकाबले में नहीं है जो संविधान बचाने के नाम पर जाल में फंसे वो फर्जी समाजवादी नेता अखिलेश यादव को अपना माई-बाप बनालिया जो समाजवाद (यादववद) राज में हुई गुण्डागर्दी से डरते थे वो भाजपा और मोदी को वोट करने निकल लिए लेकिन जो मीडिया के चुनावी पंडयंत्रों से नहीं डरे वो बहनजी को ही अपना सच्चा नेता मानती रही ऐसी षडयंत्रकारी परिस्थितियों में भी बसपा को 2022 विधानसभा चुनावों मे 1.19 करोड़ वोट आए थे 2024 लोकसभा चुनाव में तो संविधान बचाने के नाम पर दलित 2022 से भी ज्यादा बौरा गए थे अब खुलकर बता भी नहीं सकते कि कैसे दोनो गुटो वाली मनुवादी मीडियाओं उनको फुटबाल बनाकर खुब लाते मार मारकर खेले है मुर्खता पर हमने जबरदस्ती कब्जा कररखा चाहेंगे तो मुर्खता से बाहर भी आ सकते 2027 के विधानसभा में वो दलित जिनकी समझ में आ गया कि उनको सपा/कांग्रेस/भाजपा ने मिलकर सही मुर्ख बनाया है वो 8-9% दलित वोटर बसपा में वापसी करचुके लगता मुस्लिम जो सपा के असली चाल चरित्र को समझ चुके वो बसपा या मजलिस की तरफ जाने को मन बना रहे है जो पिछड़ा और सवर्ण वोटर भाजपा से खफा हों चुका वो सपा के राज की गुण्डागर्दी याद करके सपा में जाना नहीं चाहता कांग्रेस वैसे उत्तरप्रदेश में यातो सपा की बैसाखियों पर नजर आती है याफिर वेंटीलेटर पर ऐसे में वो भी विकल्प नहीं बन पा रही अन्तिम उम्मीद सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय नारे के साथ बहनजी पर ही उम्मीदें लगाकर बैठे है बसपा से छिटका हुआ दलित वोटर वापस उससे जुड़े तो 22% दलित बेस वोट ए 5-6% मुस्लिम 5-6 % पिछड़े 3-4% सवर्ण मिलकर भी आसानी से सत्ता परिवर्तन करवा सकते है बहनजी एकला चलो की नीति पर इसीलिए भी रहती क्योंकि अन्दरूनी छल कपट वो नहीं करती।

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हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लड़की द्वारा बहुजन समाज की वरिष्ठ नेता Mayawati जी के खिलाफ अश्लील और अपमानजनक गीत गाया गया...
13/02/2026

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लड़की द्वारा बहुजन समाज की वरिष्ठ नेता Mayawati जी के खिलाफ अश्लील और अपमानजनक गीत गाया गया है। यह केवल एक व्यक्ति विशेष का अपमान नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का प्रयास है, जो उन्हें सम्मान और आदर्श के रूप में देखते हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को है, लेकिन यह अधिकार किसी भी समुदाय, वर्ग या नेता के खिलाफ अशोभनीय और अश्लील भाषा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता। लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, आलोचना भी हो सकती है, लेकिन अश्लीलता और सामुदायिक अपमान स्वीकार्य नहीं है।
यदि किसी के द्वारा जानबूझकर किसी समुदाय की भावनाओं को आहत किया गया है, तो कानून के तहत निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए। समाज में शांति, सम्मान और आपसी सद्भाव बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
हम सभी से अपील है कि इस मुद्दे पर संयम रखें, लेकिन कानूनसम्मत कार्रवाई की मांग जरूर करें, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश न करे।



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