29/03/2026
जब गैस सिलेंडर ₹400–₹500 था, तब सड़कों पर हंगामा मचाने वाले आज ₹900–₹1100 के सिलेंडर पर चुप क्यों हैं? क्या जनता की तकलीफ उस समय असली थी और आज नकली हो गई?
के नाम पर देश को बड़े सपने दिखाए गए—
👉 हर साल 2 करोड़ रोजगार
👉 महंगाई पर काबू
👉 100 स्मार्ट सिटी
👉 काला धन वापस
लेकिन जरा जमीन पर हकीकत देखिए—
बेरोजगारी: की रिपोर्ट्स के मुताबिक कई समय तक बेरोजगारी दर ऊंचे स्तर पर बनी रही। युवा आज भी नौकरी के लिए भटक रहा है।
महंगाई: खाने-पीने से लेकर गैस सिलेंडर तक—हर चीज आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। घरेलू बजट बिगड़ चुका है।
अर्थव्यवस्था: के आंकड़े भी बताते हैं कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है।
और जब इन मुद्दों पर सवाल पूछो, तो जवाब क्या मिलता है?
👉 मंदिर बनाम मस्जिद
👉 हिंदू बनाम मुस्लिम
👉 भारत बनाम पाकिस्तान
की राजनीति अब मुद्दों से नहीं, भावनाओं से चल रही है—ताकि असली सवाल दबे रहें।
और अगर कोई आवाज उठाए—
तो उसे देशद्रोही, गद्दार या “एंटी-नेशनल” का टैग दे दो।
क्या यही लोकतंत्र है?
सच्चाई कड़वी है—
जनता को मुद्दों से भटका कर सिर्फ वोट लिया जा रहा है।
अब फैसला आपके हाथ में है—
👉 सवाल पूछोगे या चुप रहोगे?
👉 अपने हक के लिए खड़े होगे या सिर्फ भीड़ का हिस्सा बनोगे?
याद रखो—
आज की चुप्पी, कल की सबसे बड़ी सजा बन सकती है।