With Hooda

With Hooda टीम दीपेन्द्र

09/10/2025

SRK से BRS बने गुट के नेताओं की चुनावी भूमिका और उनके पूछे गए सवालों के जवाब में ये लेख जरूर पढ़ें…

साथियों हरियाणा कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के पद ग्रहण के मौक़े पर परसों कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता इकट्ठा हुए और पार्टी के प्रभारी की मौजूदगी में सभी ने अपने अपने विचार रखें। सभी ने नए प्रदेश अध्यक्ष को शुभकामनाएं दी और भविष्य में मज़बूती से लोगों लड़ाई लड़ने की बात कही।इस दौरान पार्टी से हमेशा ही अलग चलने वाले गुट (पूर्व में SRK ) और BRS के संयोजक माने जाने वाले नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को जब बोलने का मौक़ा मिला तो उन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी के परफॉरमेंस और निर्णय पर सवाल उठाए और बोले कि

‘’ पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ाने से क्या होता है,जब सरकार नहीं बना पाये ‘’

‘पार्टी की हवा थी फिर सरकार क्यों नहीं बनी नेतृत्व की जवाबदेही बनती है ‘’

‘’पार्टी को धड़ो की कांग्रेस ना होकर एक कांग्रेस होना होगा ‘’

‘’ म्हारा तो काम चल जाएगा पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का नहीं ‘’

तो रणदीप जी बातों के हलवाई तो आप ख़ैर है ही पर कांग्रेस कार्यकर्ता आपसे उन सवालों के जवाब भी चाहता है और आपको कुछ बताना भी चाहता है तो सुने

रही बात पार्टी की हवा की तो आप बताओ आपने पार्टी की हवा बनाने में क्या योगदान दिया था ? आपने बतौर राष्ट्रीय नेता कितने जलसे किए ? कितने लोगों को पार्टी से जोड़ा ? कितने लोगों की टिकट की लड़ाई लड़ी और जिन्हे टिकट मिली ,उनमे से कितने जीते या कितनों को जीता कर लाए?

शायद आपके पास इन सवालों के जवाब नहीं ,पर सुने आपने कांग्रेस के लिए क्या किया ..

जब पार्टी की अध्यक्षा बहन कुमारी शैलजा जी थे ,तो आप और किरण मिलकर एक गुट बनाकर अलग से फ्लॉप निर्णय ले रहे थे ,पार्टी के विधायक दल के नेता के साथ सामंजस्य बैठाकर चलने में आपने कोई रुचि नहीं दिखाई, जैसा कि आपकी ख़ासियत है शैलजा,हुड्डा साहब और किरण के बीच की ट्यूनिंग तोड़कर अलग से SRK बनाने में आपकी भूमिका के काफ़ी चर्चे रहें थे,किरण गई तो फ़िर अब आप BRS बनाकर हर रोज़ सियासी जलेबी सेक रहे हैं

अब बात करें वोट प्रतिशत की तो रणदीप जी 2019 में कांग्रेस पार्टी को लोकसभा में 19.51% वोट मिला और फिर पूरे देश में राहुल गांधी जी ने कांग्रेस को एकजुट कर पैदलयात्रा निकाली ,जिसका परिणाम ये रहा कि कांग्रेस को 21.19% वोट मिला और जिस कांग्रेस को 2019 में 52 सीट मिली थी वो 99 सीट लेकर लोकसभा ने विपक्ष की सबसे पार्टी बनी। जिस बात की सराहना आप भी करते नहीं थकते। वही आपके गृह राज्य के चुनाव कि बात करें तो आप जहाँ के वोट प्रतिशत बढ़ने को कुछ नहीं मान रहें,क्योंकि आपने उसमे कोई मेहनत नहीं की ,पर फिर भी सुनिए कैसे वोट प्रतिशत बढ़ा….

जब 27 अप्रैल 2022 को उदयभान जी को अध्यक्ष बनाया गया और अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ने मिलकर काम करना शुरू किया तब से लेकर एक साल के भीतर लगभग 50 पूर्व विधायक ,विधायक और अन्य दलों से बड़े नेताओं ने पार्टी को जॉइन किया।हज़ारों कार्यकर्ता अन्य पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए और मरी हुई कांग्रेस ज़िंदा हुई ,फिर ज़िंदा कांग्रेस में असली सांस डालने का काम किया सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने ,उन्होंने लगभग 62 हल्कों में हरियाणा मांगे हिसाब पैदल यात्रा निकाली और पार्टी से जोड़े हुए लोगों में जोश भरा। नतीज़ा ये हुआ की कांग्रेस को लोकसभा में 43.8% वोट के साथ लोकसभा में 10में से 5 सीटों पर जीत हासिल हुई। आजतक कांग्रेस को इतना वोट प्रतिशत हरियाणा में कभी नहीं मिला और 2005 में भी जब हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में आई थी तो 42 प्रतिशत के लगभग ही वोट मिले थे ,जिसमें कांगेस के सभी नेता एक मंच पर थे कोई SRK/BRS जैसे गुट नहीं थे और केंद्र में भी कांगेस की सरकार थी। पर इस बार 2024 में तमाम गुटबाज़ी/बयानबाज़ी के बीच कांगेस को विधानसभा में जीत दिलाने के लिए अध्यक्ष श्री उदयभान जी,नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी और लोकसभा में सबसे ज़्यादा वोटो से जीतने वाले सांसद दीपेंद्र हुड्डा फिर जुट जाते है। हरियाणा के सभी दलों से लोग कांग्रेस में शामिल होने लग जातें और बड़ी बड़ी जनसभा और हर रोज के कार्यक्रम कर हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस की हवा बनाने में सफल रहे, हालांकि पूर्व में SRK और बीरेंद्र सिंह के आने और किरण के बीजेपी में जाने के बाद BRS गुट ने यूँही गुटबाज़ी और बयानबाजी को तवज्जो दी। फिर बात आती है चुनाव की ,चुनाव में टिकट वितरण होता है,जो काफ़ी हद तक सही था और कुछ ग़लत भी था ।सही इसलिए कह रहा हूँ कि कांग्रेस ऐलनाबाद का गढ़ तोड़ने में सफल रही ,42 साल बाद नारनौंध सीट पर जीती ,भजनलाल के गढ़ आदमपुर में कांग्रेस जीती। हालांकि कुछ ग़लत टिकट भी थी जैसे नरवाना ,अंबाला कैंट से चित्रा,बल्लभगढ़ से शारदा राठौड़ आदि कुछ और भी हो सकते हैं। इस टिकट वितरण के बाद चुनावी समर में कौन नेता उम्मीदवारों के जितवाने में जुटे और कौन हरवाने में ये क़िस्सा अहम है, तो रणदीप जी आप बताएँ की आपने कितनी जनसभा की कितने उम्मीदवारों को जितवाया या आपके BRS गुट के नेताओं ने कितने जलसे किए ,कितनो को जितवाया ? शायद आपकी पेतृक सीट नरवाना से पिछले 20 साल से आपका उम्मीदवार ही होता है,मेरी जानकारी अनुसार आजतक आप अपना उम्मीदवार नहीं जितवा पाए और पूरे चुनाव आप कैथल से बाहर नहीं निकले ,वहीं बहन शैलजा जी ने जो मेहनत की ,वो तो खैर हरियाणा जानता ही है कि कैसे एक आम बुजुर्ग की कहीं बात पर इतना बड़ा मुद्दा बनाया गया , चुनावी दौर में जब नेता अपने साथियों के लिए वोट मांग रहे थे, मैडम जी ने पूरे मीडिया जगत में भाजपा के स्क्रिप्टिड इंटरव्यू दिए और बीजेपी ने चलाए। वहीं जिनसे आप सवाल कर रहे हैं कि सरकार क्यों नी बनी , तो वो नेता लगभग हर विधानसभा में गए ,75 साल की आयु में हुड्डा जी ने अपना फ़र्ज़ निभाया लगभग 75-80 विधानसभा में गए। वहीं उनके बेटे और लोकसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सर्वाधिक लगभग 82 बड़ी जनसभाएं की ।वो भी बिना किसी गुट देखे की गई, उदाहरण के तौर पर बता दूँ सड़ौरा से किरण बाला,जगाधरी से अकरम,फतेहाबाद से बलवान सिंह दौलतपुर के लिए ,चंद्रमोहन के लिए पंचकुला में सभी को एकजुट किया गया आदि। पर इतनी मेहनत के बाद भी सरकार क्यों नहीं आई क्योंकि कुछ नेता चाहते थे कि अबकी बार कांग्रेस हार जाए तो ,अगली बारी अपनी है। हुड्डा को रोकने के लिए एक गुट दिनरात यही रणनीति बना रहा था कि कैसे इस बार रोका जाए। हुड्डा जी को टायर्ड और रिटायर्ड करने की नियति ने कांग्रेस के हर कार्यकर्ता के साथ छल किया। और आगे भी इस गुट का इसी नीति पर काम जारी है।हुड्डा और उनकी टीम ने मेहनत कर 37 विधायक तो बनाये ,पार्टी को 39.5 प्रतिशत वोट तक ले गए ,अगर हुड्डा को रोकने वाले लोग जनता की तरफ़ देखकर ,अपना लालच छोड़ पार्टी के लिए 1 प्रतिशत वोट भी जोड़ लेते तो आज कांग्रेस की सरकार होती । ख़ैर छोड़िये रणदीप जी जनता सब समझती है ,कार्यकर्ता के लिए इतनी ही पीड़ा है ,तो गुटबाज़ी की नीतियाँ बनाना बंद करिए। हरवाने की एक्स्पर्टीज़ छोड़ कर ,जितवाने की नीति पर काम करिए ! तब ही आप राजभवन में मीटिंग कर पाओगे ,अन्यथा जो दूसरे के लिए गड्डे खोदता है ,एक दिन ख़ुद उसी गड्डे में गिर जाता है..

एक संघर्ष करते कांग्रेस कार्यकर्ता की कलम से ✍️

09/10/2025

#दीपेन्द्र #हरियाणा #जननायक

08/10/2025

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है,
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है !

लड़ेंगे, लड़ेंगे, लड़ेंगे,
जीतेंगे, जीतेंगे, जीतेंगे!

08/10/2025

शहर-गांव, गलियों-चौराहों तक… अपने लोगों से मिलने आ रहे हैं, उनकी बातें सीधे दिल से सुनने। यही है सेवा, यही है जुड़ाव। – भूपेंद्र सिंह हुड्डा
#हुड्डा_साहब #मिलनसार #हितैषी

08/10/2025

विनम्रता में शक्ति, सेवा में समर्पण — यही है असली राजनीति।

वो नेता, जो दिखावे से नहीं – काम से पहचान बनाता है।
दीपेंद्र सिंह हुड्डा…
नरम स्वभाव, लेकिन जनता के हक़ पर सबसे सख़्त आवाज़।
हरियाणा के हर कोने में जनता से जुड़ाव, संघर्ष में सबसे आगे।

नए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी कहते हैं —
“दीपेंद्र जी की मेहनत ही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है!”
#दीपेन्द्र #जननायक #हरियाणा

07/10/2025

मेहनत का दूसरा नाम है दीपेंद्र।
जनता की सेवा और विकास की राह में हर संघर्ष उनका हथियार है। जब नेतृत्व में जुनून और लगन हो, तभी बदलाव असंभव को भी संभव बनाता है। यही असली राजनीति, यही असली नेता! :-
#दीपेन्द्र #जननायक #हरियाणा

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