IIEL Coaching Centre Sonipat

IIEL Coaching Centre Sonipat We provide best coaching for the preparation of exams like SSC, HSSC, BANK, HTET, CTET,KVS,FCI, etc. Best Faculty, AC classrooms, Free Library, Free WiFi

19/09/2019
11/09/2019

श्री मोहन भागवत जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

06/04/2019

"एक बार फिर मोदी सरकार"
सोनीपत लोकसभा से बीजेपी उमीदवार श्री रमेश कौशिक जी को भारी बहुमत से विजयी बनायें |
निवेदक :- बिजेंदर मलिक जिला उपाध्यक्ष बीजेपी सोनीपत

12/03/2019
11/06/2016

CTET Exams 2016 Study Notes :- स्टडी नोट्स- सामाजीकरण की प्रक्रिया

परीक्षा पास करने के लिए बाल अध्ययन और अध्यापन कला एक महत्वपूर्ण विषय है, इस विषय में अच्छे मार्क्स लाने के लिए आपको इस विषय के महत्वपूर्ण टॉपिक जैसे – अभिवृद्धि एवं विकास की अवस्थाएं, वैयक्तिक विभिन्नताएं, मानसिक स्वास्थ्य और अभिरूचि, पियाजे, कोहलवर्ग तथा व्योट्स्की के सिद्धांत, लिंग, समावेशी शिक्षा आदि अच्छी तरह से तैयार करने होंगे। आपकी बेहतर तैयारी के लिए हम कुछ स्टडी नोट्स आपको उपलब्ध कराएंगे, उम्मीद है कि ये स्टडी नोट्स आपको सफल बनाएँगे। आज का विषय है – सामाजीकरण की प्रक्रिया

सामाजीकरण की प्रक्रिया

सामाजीकरण का अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा व्यक्ति अन्य व्यक्तियों से अंतः क्रिया करता हुआ सामाजिक आदतों, विश्वासों, रीति रविाजों तथा परंपराओं एवं अभिवृत्तियों को सीखता है। इस क्रिया के द्वारा व्यक्ति जन कल्याण की भावना से प्रेरित होते हुए अपने आपको अपने परिवार, पड़ोस तथा अन्य सामाजिक वर्गों के अनुकूल बनाने का प्रयास करता है जिससे वह समाज का एक श्रेष्ठ, उपयोगी तथा उत्तरदायी सदस्य बन जाए तथा उक्त सभी सामाजिक संस्थाएं तथा वर्ग उसकी प्रशंसा करते रहें।

सामाजीकरण की प्रक्रिया

बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया जन्म के कुछ दिन बाद से ही प्रारंभ हो जाती हैं बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया परिवार से प्रारंभ होती हैं परिवार के सदस्य के रूप में बालक परिवार के अन्य सदस्यों से अन्तः-क्रियात्मक संबंध स्थापित करता है और उनके व्यवहारों का अनुकरण करता है। इस प्रकार अनुकरण करते हुए जाने अनजाने बालक परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका भी अदा करने लगता है। अनुकरण के आधार पर ही वह माता-पिता, भाई-बहन आदि की भूमिकाओं को सीखता है। उसके ये व्यवहार धीरे-धीरे स्थिर हो जाते हैं। धीरे-धीरे बालक अपने तथा पिता और अपने तथा माता के मध्य के अंतर को समझने लगता है कि वह स्वयं क्या है? इस प्रकार स्वयं (Self) का विकास होता है जो समाजीकरण का एक आवश्यक तत्व है।

CTET Exams 2016 Study Notes

बालक के समाजीकरण करने वाले कारक

बालक जन्म के समय कोरा पशु होता है। जैसे-जैसे वह समाज के अन्य व्यक्तियों तथा सामाजिक संस्थाओं के संपर्क में आकर विभिन्न प्रकार की सामाजिक क्रियाओं में भाग लेता रहता है वैसे-वैसे वह अपनी पार्श्विक प्रवृत्तियों को नियंत्रित करते हुए सामाजिक आदर्शों तथा मूल्यों को सीखता रहता है। बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। बालक के समाजीकरण में सहायक मुख्य कारक अथवा तत्व निम्नांकित हैं-

परिवार
आयु समूह
पड़ोस
नातेदारी समूह
स्कूल
खेलकूद
जाति
समाज
भाषा समूह
राजनैतिक संस्थाएं और
धार्मिक संस्थाएं।

बालक के समाजीकरण में बाधक तत्व

मैस्लो और मिटिलमैन (Maslow and Mittlemen) जैसे विचारकों के अनुसार बालकों के समाजीकरण में बाधा पहुंचाने वाले तत्व इस प्रकार हैं-

1. सांस्कृतिक परिस्थितियां: जैसे जाति, धर्म, वर्ग आदि से संबद्ध पूर्व धारणाएं आदि।

2. बाल्यकालीन परिस्थितियां: जैसे माता-पिता का प्यार न मिलना, माता-पिता में सदैव कलह, विधवा मां, पक्षपात, एकाकीपन तथा अनुचित दंड आदि।

3. तात्कालिक परिस्थितियां: जैसे निराशा, अपमान, अभ्यास अनियमितता, कठोरता, परिहास और भाई-बहन, मित्र, पड़ोसी आदि की ईर्ष्या।

4. अन्य परिस्थितियां: जैसे शारीरिक हीनता, निर्धनता, असफलता, शिक्षा की कमी, आत्म विश्वास का अभाव तथा आत्म-निर्भरता की कमी आदि।

समाजीकरण की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका

बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया में परिवार के बाद स्कूल और स्कूल में विशेष रूप से शिक्षक आता है। प्रत्येक समाज के कुछ विश्वास, दृष्टिकोण, मान्यताएं, कुशलताएं और परंपराएं होती हैं। जिनको ’संस्कृति’ के नाम से पुकारा जाता है। यह संस्कृति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित की जाती है और समाज के लोगों के आचरण को प्रभावित करती है। शिक्षक का सर्वश्रेष्ठ कार्य है इस संस्कृति को बालक को प्रदान करना। यदि वह यह कार्य नहीं करता है तो बालक का समाजीकरण नहीं कर सकता है। शिक्षक, माता-पिता के साथ बालक के चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने में अति महत्वपूर्ण कार्य करता है।

कक्षा में, खेल के मैदान में, साहित्यक और सांस्कृतिक क्रियाओं में शिक्षक सामाजिक व्यवहार के आदर्श प्रस्तुत करता है। बालक अपनी अनुकरण की मूल प्रवृति के कारण शिक्षक के ढंगों, कार्यों, आदतों और नीतियों का अनुकरण करता है। अतः शिक्षक को सदैव सतर्क रहना चाहिए, उसे कोई ऐसा अनुचित कार्य या व्यवहार नहीं करना चाहिए, जिसका बालक के ऊपर गलत प्रभाव पड़े।

CTET/ HTET special batch starting from 20 June  3:00 PM to 06:00 PM. Main focus will be on Psychology and English.  Call...
08/06/2016

CTET/ HTET special batch starting from
20 June 3:00 PM to 06:00 PM. Main focus will be on Psychology and English.
Call 9728654321

19/05/2016

Tomorrow 20/05/2016 is last date to apply for HSSC Clerk Posts.
Educatiin Qualification- 12th pass.
Age limit-17-41 yrs.

18/05/2016

Faculty for 'English' is required at IIEL Coaching Centre Sonipat. Interested person may contact at 9728-654321.

13/05/2016
13/05/2016

Address

Gohana Road Main Bye Pass Chowk
Sonipat
131001

Opening Hours

Monday 9am - 6pm
Tuesday 9am - 6pm
Wednesday 9am - 6pm
Thursday 9am - 6pm
Friday 9am - 6pm
Saturday 9am - 6pm

Telephone

9728654321

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when IIEL Coaching Centre Sonipat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share