मदन गद्दरखेड़ा - सादुलशहर

मदन गद्दरखेड़ा - सादुलशहर जन के सहयोग से जन तंत्र लाने का अभिनव प्रयास..

07/09/2026

4 दिन में इलेक्शन खत्म हो जाएंगे, 5 सालों के लिए दुश्मन ना बनें और ना बनाएं! मोहब्बत, प्यार बनाए रखना है!!

05/09/2026

रिजर्वेशन=रिप्रेजेंटेशन
आरक्षण सिर्फ सुविधा नहीं, प्रतिनिधित्व है। जिस वर्ग का सत्ता, शिक्षा और प्रशासन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रहा,आरक्षण उसकी भागीदारी सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है।

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एक सदी का सफर थमा, एक युग का अंत हुआ…अत्यंत दुःख एवं गहरी पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि आज हमारे बीच से एक ऐसी शख्सियत...
04/09/2026

एक सदी का सफर थमा, एक युग का अंत हुआ…

अत्यंत दुःख एवं गहरी पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि आज हमारे बीच से एक ऐसी शख्सियत विदा हो गई, जिनका नाम ही अपने आप में एक पहचान था। गांव पतली के सरदार जोगेन्द्र सिंह जी जैलदार का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत गद्दरखेड़ा, गाँव पतली और आसपास के गांवों के सामाजिक जीवन की एक सदी पुरानी विरासत का थम जाना है। लगभग 100 वर्षों का जीवन जीने वाले सरदार जोगेन्द्र सिंह जी ने अपने जीवन में कई पीढ़ियों को बदलते हुए देखा और अपने क्षेत्र में एक ऐसा रुतबा, सम्मान और सामाजिक पहचान कायम की, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। गद्दरखेड़ा और पतली ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में भी उनका नाम सम्मान और विश्वास के साथ लिया जाता था। गांव के सामाजिक विषय हों, धार्मिक आयोजन हों, जनहित के मुद्दे हों या राजनीतिक एवं पंचायत से जुड़े विषय वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते थे। उन्होंने अपने प्रभाव और अनुभव का उपयोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि गांव और गांववासियों के हित के लिए किया। उनके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा पक्ष यही था कि जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों के बीच उनकी अपनी एक अलग पहचान और पहुंच थी। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो निश्चित रूप से गद्दरखेड़ा और पतली दोनों गांवों ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया है। उनकी कमी केवल परिवार को ही नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों को महसूस होगी, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व, अनुभव, मार्गदर्शन और सामाजिक प्रभाव को करीब से देखा था। एक सदी पूरी करके विदा होना अपने आप में एक इतिहास है। सरदार जोगेन्द्र सिंह जी जैलदार ने 100 वर्षों का जीवन जिया, लेकिन उनके द्वारा बनाई गई पहचान और छोड़ी गई स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेंगी। परमपिता परमात्म दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवारजनों, रिश्तेदारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। भावपूर्ण श्रद्धांजलि, शत-शत नमन।
-मदन गद्दरखेड़ा

मज़दूर का पसीना सस्ता, किसान की फसल सस्ती, लेकिन बड़े कर्ज़दारों के लिए क्यों इतनी सरकारी मस्ती?एक देश, एक कानून, एक न्य...
28/08/2026

मज़दूर का पसीना सस्ता, किसान की फसल सस्ती, लेकिन बड़े कर्ज़दारों के लिए क्यों इतनी सरकारी मस्ती?एक देश, एक कानून, एक न्याय, किसान और गरीब मजदूर के लिए भी वही अधिकार जो बड़े कर्ज़दारों को मिलते हैं कब?

जब तक जातिय व्यवस्था, तब तक आरक्षण व्यवस्था जारी रहेगी.... आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चले आ ...
27/08/2026

जब तक जातिय व्यवस्था, तब तक आरक्षण व्यवस्था जारी रहेगी.... आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव के कारण छीने गए अवसरों का जवाब है। अगर सिर्फ आर्थिक स्थिति सुधर जाने से जाति खत्म हो जाती, तो शायद आरक्षण को लेकर बहस भी खत्म हो जाती। एक सवाल क्या आज भी समाज किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर देखना बंद कर चुका है? मेरे मुताबिक आरक्षण पर बहस करते समय सिर्फ आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव और अवसरों की असमानता को भी समझना जरूरी है। जय संविधान

26/08/2026

80 साल की आजादी, फिर भी स्कूल भवन नहीं! चांद पर पहुंचा भारत, सरकारी स्कूल अब भी भैंसों के तबेले में...
22/08/2026

80 साल की आजादी, फिर भी स्कूल भवन नहीं! चांद पर पहुंचा भारत, सरकारी स्कूल अब भी भैंसों के तबेले में...

20/08/2026

“एथेनॉल (गन्ना का तेल) ने बढ़ाई चीनी की मिठास! पहली बार चीनी का भाव ₹60 के पार”
बोलो गडकरी जिन्दाबाद

चोर घर के आगे ताला लगा रहा है...  #भाजपा सरकार का तुगलकी फरमान! अगर सरकारी स्कूलों में सब कुछ ठीक है, व्यवस्थाएं बेहतर ह...
17/08/2026

चोर घर के आगे ताला लगा रहा है... #भाजपा सरकार का तुगलकी फरमान! अगर सरकारी स्कूलों में सब कुछ ठीक है, व्यवस्थाएं बेहतर हैं, बच्चे सुविधाओं से संपन्न हैं और शिक्षा व्यवस्था शानदार है, तो फिर हकीकत सामने आने से डर कैसा? मीडिया लोकतंत्र का आईना है। स्कूलों की बदहाली, जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी, मूलभूत सुविधाओं का अभाव और बच्चों की समस्याएं सामने लाना अपराध नहीं, जनता के प्रति जवाबदेही है। सरकार को चाहिए कि आईना बंद करने के बजाय व्यवस्था सुधारे।

लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप है। सत्ता जनता ने दी है, कुर्सी जनता की है और जवाबदेही भी जनता के प्रति ही होनी चाहिए।     ...
16/08/2026

लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप है। सत्ता जनता ने दी है, कुर्सी जनता की है और जवाबदेही भी जनता के प्रति ही होनी चाहिए।

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