10/08/2026
विभिन्न सामाजिक- राजनीतिक संगठनों ने केतन हत्याकांड के मामले में पुलिस जांच की भ्रामक दिशा को दुरुस्त किये जाने को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आनंद वर्द्धन से मुलाकात की और उन्हें निम्नलिखित ज्ञापन सौंपा :
प्रति,
श्रीमान मुख्य सचिव महोदय,
उत्तराखंड, देहरादून.
महोदय,
7-8 जून 2026 की रात को टिहरी जिले के प्रतापनगर ब्लॉक के लंबगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत देवल गांव के निवासी नाबालिग युवक केतन लाल की बर्बर पिटाई की गयी, जिससे उसकी अगली सुबह मृत्यु हो गयी. उसके साथी दिवाकर डिमरी को भी बेहद बुरे तरीके से पीटा गया. यह पिटाई खोलगढ़ गांव के यशवीर पंवार और उनके परिवार द्वारा किये जाने का आरोप है. दिवंगत केतन के पिता श्री धनपाल लाल शाह ने लंबगांव कोतवाली में दर्ज एफआईआर में लिखवाया है कि यशवीर पंवार ने स्वयं फोन करके केतन को बुरे तरीके से पीटने की खबर धनपाल लाल को दी.
इस प्रकरण में दिवंगत केतन का यशवीर पंवार की पुत्री से प्रेम संबंध होना हत्या करने की हद तक पीटने का कारण बताया गया क्यूंकि दिवंगत केतन अनुसूचित जाति से था और मुख्य आरोपी व उनका परिवार तथाकथित उच्च जाति से !
महोदय, कैसी भी शिकायत या पीड़ा हो पर किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति तो कतई नहीं हो सकती है और ना ही ऐसे दुष्कृत्य को सार्वजनिक तौर पर जायज ठहराने की अनुमति किसी को दी जानी चाहिए.
इस मामले में शुरूआती तौर पर टिहरी पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एफआईआर संख्या 0009 / 2026 दर्ज की और हत्या व अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम,1989 के तहत यशवीर पंवार समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया.
लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, इस प्रकरण में हत्यारोपियों के पक्ष में गोलबंदी होने लगी और सार्वजनिक तौर पर हत्या जैसे उनके जघन्य कृत्य को जायज ठहराया जाने लगे और साथ ही सार्वजनिक रूप से जातीय घृणा भरे भाषण दिए जाने लगे.
ऐसा प्रतीत होता है कि टिहरी पुलिस इस उग्र भीड़ के दबाव में आ गयी और उसने केतन लाल हत्याकांड के एकमात्र चश्मदीद गवाह और पीड़ित को ही पोक्सो का आरोपी बना कर जेल भेज दिया.
महोदय, पुलिस की खुद की जांच रिपोर्ट कहती है कि मृतक केतन लाल और केतन की हत्या के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पुत्री के बीच अच्छी दोस्ती थी और दोनों के बीच मोबाइल पर लंबी-लंबी बातचीत होती थी. पुलिस की जांच रिपोर्ट यह भी कहती है कि 7-8 जून 2026 की रात को जब केतन व दिवाकर डिमरी को बर्बरता पूर्वक पीटा गया और केतन की मृत्यु हो गयी और उसके अगले दिन भी केतन हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पुत्री के साथ किसी तरह की यौन हिंसा या दुष्कर्म की शिकायत पुलिस को नहीं दी गयी.
महोदय, इस बीच एक व्हाट्स ऐप चैट भी सामने आई है, जो उस लड़की की बताई जा रही है, जिसकी दिवंगत केतन से मित्रता थी और यह 7 जून 2026 की रात की बताई गयी है. यह चैट एक अन्य लड़की के फोन से होना बताया गया है. इस चैट से तो साफ़ होता है कि दिवंगत केतन को खोलगढ़ बुलाया गया था. साथ ही यह चैट एक अन्य बालिग़ लड़की, जो केतन की मित्र नाबालिग लड़की की बहन है और बालिग़ है- के फोन से होना बताया गया है. इस स्थिति में उक्त लड़की को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए. साथ ही केतन हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पत्नी को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए.
महोदय, 11 जुलाई 2026 को केतन हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पत्नी द्वारा अपनी पुत्री के साथ दुष्कर्म होने की शिकायत लंबगांव थाने में दी गयी और पुलिस ने पोक्सो समेत अन्य धाराओं में एफआईआर संख्या 0014 / 2026 दिवाकर डिमरी के खिलाफ दर्ज कर ली और कुछ दिन बाद उसे गिरफ्तार करके जेल भी भेज दिया. यह उस भीड़ के दबाव में किया गया, जो खुलेआम “सौ टुकड़े करने” “थाने को मिट्टी में मिलाने ” जैसी बातें कर रही थी. भीड़ किसी भी बहाने से हत्या के कृत्य को जायज ठहराना चाहती है और जाति के नकली श्रेष्ठता बोध में उन्मत्त है , राजनीतिक प्रभाव भी उसके साथ प्रतीत होता है, लेकिन पुलिस और कानून को ऐसी भीड़ के दबाव में क्यों आना चाहिए ?
महोदय, टिहरी और खासतौर पर लंबगांव की थाने की पुलिस तो इस भीड़ के इस कदर दबाव में थी कि उसने अपनी ही तमाम रिपोर्टों को नकारते हुए इस मामले में पोक्सो (Prevention of Children from Sexual Offences Act, 2012) की धारा 5 n के तहत दिवाकर डिमरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. जबकि उक्त अधिनियम की धारा 5 n कहती है कि :
“.. whoever being a relative of the child through blood or adoption or marriage or guardianship or in foster care or having a domestic relationship with a parent of the child or who is living in the same or shared household with the child, commits penetrative sexual assault on such child; “
दिवाकर डिमरी न तो उक्त परिवार का रिश्तेदार है ना परिजन तो जाहिर है कि भीड़ के दबाव और राजनीतिक प्रभाव के चलते, हड़बड़ी में टिहरी पुलिस ने मुख्य चश्मदीद गवाह को मनमानी धारा लगाकर जेल भेज दिया.
यह केतन लाल हत्याकांड में न्याय को बेपटरी करके हत्यारोपियों को मदद पहुंचाने जैसा है.
महोदय, इस स्थिति पर तत्काल रोक लगाईं जानी चाहिए और इसमें जांच की दिशा को कानून के अनुरूप रहते हुए दिवाकर डिमरी के खिलाफ पोक्सो का मामला ख़ारिज किया जाना चाहिए.
महोदय, न्याय का यह स्थापित सिद्धांत है और पिछले दिनों माननीय उच्चतम न्यायलय ने भी माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखंड के एक न्यायाधीश के आचरण पर टिपण्णी करते हुए दोहराया कि न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए, होता हुआ दिखना भी चाहिए. दिवंगत केतन लाल के प्रकरण में भी यह बात लागू होती है. इस हत्याकांड के आरोपियों के पक्ष के प्रति यदि जरा भी नरमी या झुकाव दिखाई देगा तो यह उत्तराखंड जैसे राज्य में कानून- व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनेगा. अतः आरोपी पक्ष के किसी दबाव में जांचकर्ताओं को नहीं आना चाहिए और न्यायालय में भी केतन लाल के न्याय के लिए ठोस पैरवी हो, इसका इंतजाम किया जाना चाहिए.
महोदय, दिवंगत केतन की मित्र बताई जा रही नाबालिग लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने और यंत्रणादायी स्थितियों से उस बच्ची को उबारने के प्रभावी उपाय किये जाने की मांग भी हम करते हैं.
सधन्यवाद,
ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर्ता :
भाकपा के समर भंडारी, माकपा के राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित, भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी, उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, प्रो. एन राघवेन्द्र, त्रिलोचन भट्ट, उत्तराखंड महिला मंच के विमला कोली, स्वतंत्र स्तंभकार आरपी विशाल, सर्वोदयी कार्यकर्ता भुवन पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता रघुनाथ आर्य .