Aisa srinagar-All India Student's association

Aisa srinagar-All India Student's association All India Students' Association (AISA) is a Left-wing student organization of India. It is the stude

28/08/2026

प्रसिद्ध वेब सीरीज " मिर्जापुर " का एक यह अंश तो आपने देखा ही होगा, जिसमें बाहुबली कालीन भैया का गुंडा बेटा- मुन्ना भैया अपने खिलाफ छात्र संघ चुनाव में खड़े होने वाले एक छात्र को क्लास में घुस कर पीट रहा है और कह रहा है कि - पचास बार बोलें हैं, पढ़ने- लिखने वाले छात्रों को राजनीति से दूर रहना चाहिए, अबे पढ़ाई- लिखाई में ध्यान लगाओ, आई ए- वाई ए एस बनो !

छत्तीसगढ़ भाजपा ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स और हैंडल्स पर यह वीडियो पोस्ट किया है. उसमें छत्तीसगढ़ भाजपा ने इतना काम जरूर किया है कि पिटने वाले छात्र के सिर के ऊपर - दिमागी नक्सल- लिख दिया है ! और साथ में कैप्शन लिखा है कि - दिमागी नक्सल होने के बजाय आप वो कोई हो सकते हैं, जो राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बने !

तो क्या छत्तीसगढ़ भाजपा इस तरह की गुंडई और मारपीट को राष्ट्र की प्रगति में हिस्सेदार होना समझती है और जो इस तरह की गुंडई और मारपीट नहीं करते, वे सब उनकी निगाह में दिमागी नक्सल हैं ! छत्तीसगढ़ भाजपा के ही नेता दीपक महास्के अब भाजपा के राष्ट्रीय आईटी सेल के कर्ता- धर्ता बनाए गए हैं . तो क्या महास्के की सदारत में भाजपा आईटी सेल यह खुली वकालत कर रहा है कि अपने विरोधियों को, अपने से सहमत न होने वालों पर दिमागी नक्सल का लेबल चस्पा करके सरेआम पीटा जाना चाहिए ? वीडियो में भाजपा आईटी सेल ने पिटने वाले छात्र को दिमागी नक्सल बता कर, मारपीट करने वाले को नायक की तरह पेश करने की कोशिश की है ! तो क्या ऐसे गुंडे और मारपीट करने वाले ही भाजपा के हीरो हैं ? जो वीडियो छत्तीसगढ़ भाजपा आईटी सेल ने पोस्ट किया है, उसमें उनका हीरो सामने वाले को इसीलिए पीट रहा है क्योंकि वह पढ़ने- लिखने वाला हो कर भी राजनीति से दूर नहीं रह रहा है ! क्या भाजपा यह मानती है कि पढ़ने- लिखने वालों को राजनीति से दूर रहना चाहिए और गुंडे- बदमाशों- लफंगों- मवालियों को ही राजनीति के नजदीक रहना चाहिए ?
उस समूचे जेन जी को, जिसने पेपर लीक,शिक्षा, रोजगार और जवाबदेही के मसले पर आंदोलन किया, इस पोस्ट में उस समूचे जेन जी को ऐसे ही पीटने की वकालत की जा रही है ?

इस वीडियो को भाजपा द्वारा अपने राजनीतिक विरोधियों के विरुद्ध हिंसा का खुला आह्वान क्यों नहीं समझा जाना चाहिए और विरोधियों के खिलाफ हिंसा करने का खुला आह्वान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं होनी चाहिए ?

25/08/2026

केतन के न्याय की मांग के लिए नई टिहरी कलेक्ट्रेट में केतन की परिजनों ने कल दिन और रात धरना दिया. उनकी मांग है कि केतन को घर बुलाकर हत्या करने के षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों व परिजनों को भी गिरफ्तार किया जाए.

यह अफसोस की बात है कि टिहरी प्रशासन ने धरना स्थल के नाम पर इन लोगों को ऐसे स्थान पर धकेलने की कोशिश की गयी जो गंदगी से पटा हुआ था. पूरे देश में पिछले 12 साल से स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए बहाया जा चुका है और टिहरी के कलेक्ट्रेट में जिसे धरना स्थल तय किया, उसे ही कचरे से पाटा हुआ है, यह तो दीपक तले अंधेरा से भी ऊपर की मिसाल है ! टिहरी की जिलाधिकारी और प्रशासन से कहना है कि आप की निगाह में जनता की हैसियत कचरे में रहने लायक होगी, लेकिन यह जान लीजिये कि ये जनता आप की वजह से नहीं है बल्कि ये जनता है, तभी आपका अस्तित्व है.

केतन को न्याय मिलना चाहिए और न्याय की दरकार दिवाकर को भी है, जिसे भीड़ के दबाव में झूठे आरोपों में जेल भेज दिया गया है.

एनटीए फिर फेल हो गया  ! आम तौर पर परीक्षा में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी पास या फेल होते हैं.अमृतकाल में परीक्षा कराने क...
17/08/2026

एनटीए फिर फेल हो गया !

आम तौर पर परीक्षा में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी पास या फेल होते हैं.

अमृतकाल में परीक्षा कराने के लिए एक एजेंसी बनाई गयी, जिसका नाम है- एन टी ए.

यह अजूबी एजेंसी जो परीक्षा घोषित होते ही, हर बार फेल नज़र आती.

जून में हुई नेट की परीक्षा में एक बार फिर एनटीए फेल हो गयी.

अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की नेट की परीक्षा एनटीए को रद्द करनी पड़ी !

क्यों ?

क्योंकि समाजशास्त्र के पेपर का अनुवाद गूगल ट्रांसलेट वाला था, आउट ऑफ सिलेबस था.

अंग्रेजी और कॉमर्स के पेपर में तो 2024 के ही प्रश्न दोहरा दिये गए.

जिसका नाम एनटीए यानि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है, उसे पूरे नेशन यानि समूचे भारत राष्ट्र में तीन कायदे के पेपर सेट करने वाले नहीं मिलते !

एनटीए के इस निक्कमेपन की कीमत, इस देश के छात्र- युवाओं को लगातार चुकानी पड़ रही है.

इसलिए एनटीए को भंग करना देश के युवाओं के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है.

आज़ादी के पर्व पर उन्होंने ईजाद किए - दिमागी नक्सल  !   हिंदी कवि धूमिल ने कहा  :" एक ही संविधान के नीचेभूख से रिरियाती ...
16/08/2026

आज़ादी के पर्व पर उन्होंने ईजाद किए - दिमागी नक्सल !

हिंदी कवि धूमिल ने कहा :

" एक ही संविधान के नीचे

भूख से रिरियाती हुई

फैली हथेली का नाम‘दया’ है

और

भूख में तनी हुई मुट्ठी का नाम

नक्सलबाड़ी है "

14/08/2026

पीपलकोटी में टीएचडीसी द्वारा बनाई जा रही विष्णुगाड़- पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में कल रात हुआ हादसा बेहद भयावह था. इस हादसे में सरकारी आंकड़े के अनुसार सात मजदूरों की दुखद मृत्यु हो चुकी है, 14 घायल हैं. कुछ मजदूरों के लापता होने की भी सूचना है.

कमजोर चट्टानी इलाकों में भारी- भरकम निर्माण कार्य बेहद खतरनाक है. इसके अलावा जिस तरह से वैज्ञानिक राय को परियोजना निर्माण में तवज्जो नही दी जाती, वह भी खतरे को आमंत्रण देने जैसा है. यह बार- बार देखा गया है कि सुरक्षा के समुचित प्रबंध परियोजना निर्माताओं द्वारा नहीं किये जाते, जिसकी कीमत अंततः मजदूरों को चुकानी पड़ती है.

पीपलकोटी के हादसे में भी साफ है कि परियोजना के योजनाकारों, निर्माताओं और इंजीनियरों को अंदाज तक नहीं था कि जहां उनकी सुरंग है, उसके पीछे धरती के गर्भ में इतना बड़ा पानी का सैलाब है, जो क्षण भर में ही उनके सीमेंट के ढांचे को तहस- नहस कर देगा और कई मजदूरों के लिए जानलेवा सिद्ध होगा.

यह भी सामने आया है कि सुरंग में काफी समय से लूज मलबा गिर रहा था, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. गंभीरता से लिया गया होता तो संभव है कि कुछ जांच- परख की गयी होती कि आखिर ऐसे मलबा क्यों गिर रहा है.

कमजोर चट्टानों वाले पर्वतीय क्षेत्र में विकास के नाम पर इस तरह का भारी- भरकम निर्माण किस कदर विनाशकारी है, इस हादसे ने पुनः यह दर्शाया है पर बड़ी परियोजनाओं में बड़ा मुनाफा और बड़ा कमीशन देखने वाले क्या इस चेतावनी को समझ पाने की स्थिति में हैं ?

10/08/2026

विभिन्न सामाजिक- राजनीतिक संगठनों ने केतन हत्याकांड के मामले में पुलिस जांच की भ्रामक दिशा को दुरुस्त किये जाने को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आनंद वर्द्धन से मुलाकात की और उन्हें निम्नलिखित ज्ञापन सौंपा :

प्रति,
श्रीमान मुख्य सचिव महोदय,
उत्तराखंड, देहरादून.

महोदय,
7-8 जून 2026 की रात को टिहरी जिले के प्रतापनगर ब्लॉक के लंबगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत देवल गांव के निवासी नाबालिग युवक केतन लाल की बर्बर पिटाई की गयी, जिससे उसकी अगली सुबह मृत्यु हो गयी. उसके साथी दिवाकर डिमरी को भी बेहद बुरे तरीके से पीटा गया. यह पिटाई खोलगढ़ गांव के यशवीर पंवार और उनके परिवार द्वारा किये जाने का आरोप है. दिवंगत केतन के पिता श्री धनपाल लाल शाह ने लंबगांव कोतवाली में दर्ज एफआईआर में लिखवाया है कि यशवीर पंवार ने स्वयं फोन करके केतन को बुरे तरीके से पीटने की खबर धनपाल लाल को दी.

इस प्रकरण में दिवंगत केतन का यशवीर पंवार की पुत्री से प्रेम संबंध होना हत्या करने की हद तक पीटने का कारण बताया गया क्यूंकि दिवंगत केतन अनुसूचित जाति से था और मुख्य आरोपी व उनका परिवार तथाकथित उच्च जाति से !

महोदय, कैसी भी शिकायत या पीड़ा हो पर किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति तो कतई नहीं हो सकती है और ना ही ऐसे दुष्कृत्य को सार्वजनिक तौर पर जायज ठहराने की अनुमति किसी को दी जानी चाहिए.

इस मामले में शुरूआती तौर पर टिहरी पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एफआईआर संख्या 0009 / 2026 दर्ज की और हत्या व अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम,1989 के तहत यशवीर पंवार समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया.

लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, इस प्रकरण में हत्यारोपियों के पक्ष में गोलबंदी होने लगी और सार्वजनिक तौर पर हत्या जैसे उनके जघन्य कृत्य को जायज ठहराया जाने लगे और साथ ही सार्वजनिक रूप से जातीय घृणा भरे भाषण दिए जाने लगे.

ऐसा प्रतीत होता है कि टिहरी पुलिस इस उग्र भीड़ के दबाव में आ गयी और उसने केतन लाल हत्याकांड के एकमात्र चश्मदीद गवाह और पीड़ित को ही पोक्सो का आरोपी बना कर जेल भेज दिया.

महोदय, पुलिस की खुद की जांच रिपोर्ट कहती है कि मृतक केतन लाल और केतन की हत्या के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पुत्री के बीच अच्छी दोस्ती थी और दोनों के बीच मोबाइल पर लंबी-लंबी बातचीत होती थी. पुलिस की जांच रिपोर्ट यह भी कहती है कि 7-8 जून 2026 की रात को जब केतन व दिवाकर डिमरी को बर्बरता पूर्वक पीटा गया और केतन की मृत्यु हो गयी और उसके अगले दिन भी केतन हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पुत्री के साथ किसी तरह की यौन हिंसा या दुष्कर्म की शिकायत पुलिस को नहीं दी गयी.

महोदय, इस बीच एक व्हाट्स ऐप चैट भी सामने आई है, जो उस लड़की की बताई जा रही है, जिसकी दिवंगत केतन से मित्रता थी और यह 7 जून 2026 की रात की बताई गयी है. यह चैट एक अन्य लड़की के फोन से होना बताया गया है. इस चैट से तो साफ़ होता है कि दिवंगत केतन को खोलगढ़ बुलाया गया था. साथ ही यह चैट एक अन्य बालिग़ लड़की, जो केतन की मित्र नाबालिग लड़की की बहन है और बालिग़ है- के फोन से होना बताया गया है. इस स्थिति में उक्त लड़की को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए. साथ ही केतन हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पत्नी को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए.

महोदय, 11 जुलाई 2026 को केतन हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशवीर पंवार की पत्नी द्वारा अपनी पुत्री के साथ दुष्कर्म होने की शिकायत लंबगांव थाने में दी गयी और पुलिस ने पोक्सो समेत अन्य धाराओं में एफआईआर संख्या 0014 / 2026 दिवाकर डिमरी के खिलाफ दर्ज कर ली और कुछ दिन बाद उसे गिरफ्तार करके जेल भी भेज दिया. यह उस भीड़ के दबाव में किया गया, जो खुलेआम “सौ टुकड़े करने” “थाने को मिट्टी में मिलाने ” जैसी बातें कर रही थी. भीड़ किसी भी बहाने से हत्या के कृत्य को जायज ठहराना चाहती है और जाति के नकली श्रेष्ठता बोध में उन्मत्त है , राजनीतिक प्रभाव भी उसके साथ प्रतीत होता है, लेकिन पुलिस और कानून को ऐसी भीड़ के दबाव में क्यों आना चाहिए ?

महोदय, टिहरी और खासतौर पर लंबगांव की थाने की पुलिस तो इस भीड़ के इस कदर दबाव में थी कि उसने अपनी ही तमाम रिपोर्टों को नकारते हुए इस मामले में पोक्सो (Prevention of Children from Sexual Offences Act, 2012) की धारा 5 n के तहत दिवाकर डिमरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. जबकि उक्त अधिनियम की धारा 5 n कहती है कि :

“.. whoever being a relative of the child through blood or adoption or marriage or guardianship or in foster care or having a domestic relationship with a parent of the child or who is living in the same or shared household with the child, commits penetrative sexual assault on such child; “

दिवाकर डिमरी न तो उक्त परिवार का रिश्तेदार है ना परिजन तो जाहिर है कि भीड़ के दबाव और राजनीतिक प्रभाव के चलते, हड़बड़ी में टिहरी पुलिस ने मुख्य चश्मदीद गवाह को मनमानी धारा लगाकर जेल भेज दिया.

यह केतन लाल हत्याकांड में न्याय को बेपटरी करके हत्यारोपियों को मदद पहुंचाने जैसा है.

महोदय, इस स्थिति पर तत्काल रोक लगाईं जानी चाहिए और इसमें जांच की दिशा को कानून के अनुरूप रहते हुए दिवाकर डिमरी के खिलाफ पोक्सो का मामला ख़ारिज किया जाना चाहिए.

महोदय, न्याय का यह स्थापित सिद्धांत है और पिछले दिनों माननीय उच्चतम न्यायलय ने भी माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखंड के एक न्यायाधीश के आचरण पर टिपण्णी करते हुए दोहराया कि न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए, होता हुआ दिखना भी चाहिए. दिवंगत केतन लाल के प्रकरण में भी यह बात लागू होती है. इस हत्याकांड के आरोपियों के पक्ष के प्रति यदि जरा भी नरमी या झुकाव दिखाई देगा तो यह उत्तराखंड जैसे राज्य में कानून- व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनेगा. अतः आरोपी पक्ष के किसी दबाव में जांचकर्ताओं को नहीं आना चाहिए और न्यायालय में भी केतन लाल के न्याय के लिए ठोस पैरवी हो, इसका इंतजाम किया जाना चाहिए.

महोदय, दिवंगत केतन की मित्र बताई जा रही नाबालिग लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित किये जाने और यंत्रणादायी स्थितियों से उस बच्ची को उबारने के प्रभावी उपाय किये जाने की मांग भी हम करते हैं.

सधन्यवाद,

ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर्ता :

भाकपा के समर भंडारी, माकपा के राज्य सचिव राजेन्द्र पुरोहित, भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी, उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, प्रो. एन राघवेन्द्र, त्रिलोचन भट्ट, उत्तराखंड महिला मंच के विमला कोली, स्वतंत्र स्तंभकार आरपी विशाल, सर्वोदयी कार्यकर्ता भुवन पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता रघुनाथ आर्य .

क्यों डराती है तुम्हें ?-सरला माहेश्वरी वो सच बोलती है तुम डरते हो वो प्रेम करती हैतुम डरते हो वो नारे लगाती हैतुम डरते ...
10/08/2026

क्यों डराती है तुम्हें ?
-सरला माहेश्वरी

वो सच बोलती है
तुम डरते हो

वो प्रेम करती है
तुम डरते हो

वो नारे लगाती है
तुम डरते हो

वो निर्भीक है
तुम डरते हो

वो नेता बन गयी है
तुम डरते हो

वो हक़ के लिये लड़ती है
तुम डरते हो

वो नेह की तरह बरसती है
तुम डरते हो

वो अंधेरों में दीपशिखा सी जलती है
तुम डरते हो

वो हँसते हुए, चेहरे पर फेंकी तुम्हारी स्याही से
लिखती है ,

वो तुम्हें नहीं
तुम्हारे डर को डराना चाहती है

वो चेहरे पर फेंकी तुम्हारी स्याही से
लिखती है —

मैं नहीं ,
तुम्हारा झूठ ही तुम्हें डराता है !

प्रेम ही सच है, इस सच से प्रेम करो !
जीवन से प्रेम करो !

09/08/2026

काकोरी कांड की वर्षगांठ
भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ
और
कॉमरेड नेहा के साथ हुए दुर्व्यवहार
के सवाल पर देहरादून में...

वीडियो सौजन्य : एक्टिविस्ट- पत्रकार त्रिलोचन भट्ट जी

05/08/2026

सृष्टि कंडारी के न्याय के लिए श्रीनगर (गढ़वाल) में आइसा की पहल पर छात्र- युवाओं, महिलाओं और सामाजिक- राजनीतिक संगठनों का कैंडल मार्च

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