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मध्यकालीन इतिहासकार और कवि अमीर खुसरो ने कभी कहा था कि, "सुल्तान के ताज का हर मोती गरीब किसान के गिरे आंसुओं का एक - एक ...
03/04/2024

मध्यकालीन इतिहासकार और कवि अमीर खुसरो ने कभी कहा था कि, "सुल्तान के ताज का हर मोती गरीब किसान के गिरे आंसुओं का एक - एक कतरा है।" हज़रत अमीर खुसरो को गुज़रे सात सदियां बीत चुकी हैं और झेलम में काफी पानी भी बह चुका है लेकिन आज भी घाटी के बाशिंदों की नियति वही है जो मध्यकालीन गंगा- यमुना के दोआबा में आम किसानों की थी। चार- पांच दिन किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए बहुत कम होते हैं लेकिन २१वीं सदी के हुज़ूर- ए- हिंदुस्तान को सचेत हो जाना चाहिए की पीर पंजाल और बृहद हिमालय की घाटियों में हम एक ज्वालामुखी के ऊपर बैठे हैं और अगर आप यह समझते हैं कि संगीनों के साए में उनकी आवाज को दबा सकते हैं तो इससे आप 'हर कफ़न पर लिख दो आज़ादी" या "One Solution, Gun Solution" नैरेटिव को और मजबूत कर रहे होते हैं।
अगर आपको इस देश से प्यार है तो ऐसा नहीं हो सकता की जिसको आप अपना घर कहते हैं, उसी घर के एक हिस्से के पर आप कब्ज़ा जमाया बैठे हो और वहां के स्थानीय बाशिंदों को अपने ही घर में घुसने के लिए आईडी प्रूफ दिखाना पड़ता हो।
Akhilesh Kumar

02/10/2017

।उजाले की खोज।
भविष्य की गर्त से निकलेगा एक उजाला
अंधियारों को ढँक कर रोशन होगा ये जहाँ सहारा।
हाथों में खालीपन होगा ।
आँखों मे उज्जवल स्वपन होगा।
लक्ष्य चाहे हो दूर हम पहुंचेंगे जरूर
आंधियां कब रोक सकी है उड़ते गगन को।
बेड़िया कब रोक सकी है बढ़ते कदम को।
हे ईश्वर दे शके तो एक ही वर दे
मेरे रास्तो को कंकडों से भर दे।
अग्नि में ही तप कर स्वर्ण निखरता है।
हजारो कांटो में ही उज्ज्वल भविष्य का फूल खिलता है।
कर्म का पथ कठिन होगा
लहू से लतपथ ये तन होगा।
विपत्ति विकराल मुख खोलेगी
कुछ पल भयभीत भी कर देगी।
उस पल होश में तुम रहना
उसके भुलावे में ना तुम पड़ना।
वो अपना रास्ता खुद ही चुन लेगी
तुमसे डर कर खुद ही छुप लेगी।
कसर्तव्यनिस्ट हो पथ पर तुम डटे तुम रहना।
एक शंखनाद ऐसा होगा
तेरे विजय का गुंजन
फैले वातावरण में होगा।
भविष्य की गर्त से निकलेगा एक उजाला
अँधियारे को ढँक कर रोशन होगा
ये जहाँ सारा।
-कुँवर रणविजय सिंह

29/07/2017

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29/07/2017

खुद की परछाईयों में तेरी छाया ढूंढा करता हूँ
वक्त बे वक़्त के मानसिक कोलाहलों में
गुम होकर तेरी काया ढूंढा करता हूँ.
किसी गैर की पायल की छन-छन से
क्यूँ तेरी आहट का एहसास होता है .
किसीअजनबी के चेहरे में
क्यूँ तुझे खोजने का प्रयाश होता है
छलकते हुए आँखों से कहीं
जख्म हरे ना हो जाय इसलिए
हर बार की तरह खली हथेलियों से
अपने चेहरे पर पर्दा डाला करता हूँ
वक्त-बेवक्त के मानसिक कोलाहलों में
गुम होकर तेरी काया ढूँढा करता हूँ .
खुद की परछाईयों में तेरी छाया ढूढ़ा करता हूँ
खुद की परछाइयों में तेरी छाया ढूढ़ा करता हूँ.

27/07/2017

माँ जब तेरी याद आती है
माँ जब तेरी याद आती है
एक कसक दिल को छू जाती है
दुनिया क्या क्या है ये तूने सिखलाया
संसार क्या है ये तूने बतलाया
तेरे आँचल के साये में
मैंने सारे जहां को भुलाया
तेरी बातो की ओट में
मैं सारे गमो को मिटाया
माँ जब तेरी याद आती है
एक कसक दिल को छू जाती है
मेरी गलती में मुझे फटकार लगाना
मेरे गमो में जैसे खुद ही आशु आँशु बहाना
अपनी अभिलाषा से थक कर जब
मेरे हाथ लगी निरसा
माँ तब तेरी याद आती है और
एक काशक दिल को छू जाती है....

26/07/2017

Pyaar ko dard kahu yaa
Pyaar ko marham.
Pathik tu raah bhatak gya
Yaa bhatak gyi hai raah tumse.
Kyu madhosh ho itne
Kyu behosh ho gm se.
Madhushaala ke pyaale me
Kise parkha karte ho.
Hiriday ke dhadhakte angaaro me
Kise nirekha karte ho.
Yaado ke jharokhe se kyu har baar
Gamo ko churaaya karte ho.
Khud ki shud bud ko bhul gye
Kyu har lamho me unko kubul kiye.
Kabhi aalingan me bharne ko
Aatur ho uthte ho.
Nhi dekh dhara par unko
Vyaakul ho uthte ho.
Haay pyaar ko dard kahu
Yaa pyaar ko marham.

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