13वीं शताब्दी तक वर्तमान सुल्तानपुर जनपद का नाम जनपद के संस्थापक भगवान् श्री राम के पुत्र के नाम पर कुशपुरा या कुशभवनपुर था | जिसका नाम बाद में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा परिवर्तित करके सुल्तानपुर रख दिया गया| सुल्तानपुर जनपद पवित्र गोमती नदी के दोनों तटों पर स्थित है| इस्क्के पडोसी जनपदों में उत्तर में फैजाबाद(अयोध्या), पूर्व में जौनपुर, आजमगढ़, दक्षिण में प्रतापगढ़ तथा रायबरेली और बाराबंकी पश्चिम और उ
त्तर-पश्चिम में स्थित हैं|
ऐतिहासिक दृष्टि से जनपद कुशभवनपुर का अतीत अत्यंत गौरवशाली और महिमामंडित रहा है । पुरातात्विक, ऐतिहासिक , सांस्कृतिक , भौगोलिक तथा औध्योगिक दृष्टि से कुशभवनपुर का अपना विशिष्ट स्थान है । महर्षि बाल्मीकी ,दुर्वासा वशिष्ठ आदि ऋषि मुनियो की तपोस्थली का गौरव इसी जिले को प्राप्त है ।परिवर्तन के शाश्वत नियम के अनेक झंझवातों के बावजूत इसका अस्तित्व अक्षुण्य् रहा है।
अयोध्या और प्रयाग के मध्य गोमती नदी के दाये बाये हाथ की तरह सई और तमसा के बीच कभी यह भूभाग कुश काश के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है , कुश काश से बनने वाले बाध की प्रसिद्ध मंडी यही पर है । । मोहम्म्द गोरी के आक्रमण के पूर्व यह राजभरो के अधिपत्य मे था , जिनके जनपद मे तीन राज्य इसौली , कुलपुर व दादर थे ,आज भी उनके किलो मे भग्न अवशेष विद्यमान है , जो तत्कालीन गौरव व समृद्धि को मुखरित करते है जनश्रुति के अनुसार कुड्वार राज्य के पश्चिम मे स्थित आज का गढ़ा ग्राम , बौद्ध धर्म ग्रंथो मे वर्णित दस गणराज्यो मे एक था , यहा के राजा कलामबंशी क्षत्रिय थे । इसका प्राचीन नाम केशीपुत्र था जिसका अस्तित्व ईसा की तेरहवी शताब्दी तक कायम था।
राष्ट्रीय चेतना के विकास मे सुल्तानपुर का ऐतिहासिक योगदान रहा है । सन 1857 के स्वाधीनता संग्राम मे क्रांतकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद को उखाड़ कर फेकने मे जान की बाजी लगाकर अंग्रेज़ो से मोर्चे लिए । सन 1921 के किसान आंदोलन मे यह जनपद खुलकर भाग लेता रहा है और सन 1930 से 1942 तक एवं बाद के सभी आंदोलनो मे यहा के स्वतंत्रा सेनानियो ने जिस शौर्य एवं वीरता का परिचय दिया ,वो ऐतिहासिक है । किसान नेता बाबा राम चंद्र और बाबा राम लाल इस संदर्भ मे उल्लेखनीय है , जिनके त्याग का वर्णन प. जवाहर लाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा मे किया है ।
जनपद मे बहनेवाली नदी गोमती नदी प्रकृतिक दृष्टि से जनपद को दो भागो मे बाटती है । गोमती नदी उत्तर पश्चिम के समीप इस जिले मे प्रवेश करती है और टेठी मेढ़ी बहती हुई दक्षिण पूर्व द्वारिका के निकट जौनपुर मे प्रवेश करती है । इसके अतरिक्त यहा गभड़िया नाला , मझुई नाला , जमुरया नाला , तथा भट गाव ककरहवा , सोभा महोना आदि झीले है ।जनपद की भूमि मुख्य रूप से मटियार है । प्रशासनिक दृष्टि से जनपद सुल्तानपुर चार तहसील - सदर , जयसिंहपुर , कादीपुर और लंभुवा है व 14 विकास खंड - अखंड नगर , दोस्तपुर , करौदी कला , कादीपुर , मोतिगरपुर , जयसिंहपुर , कुरेभार , प्रतापपुर कमैचा , लंभुवा , भदैया , दूबेपुर , धनपतगंज , कुड़वार व बल्दीराय है ।