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19/10/2026

यज्ञ एक जीवनशैली

🔥 हवन केवल यज्ञ कुंड में आहुति डालने मात्र की क्रिया नहीं है। बल्कि यह एक जीवनशैली है।

यज्ञ हमें देना सिखाता है:
हमें समाज से, राष्ट्र से, प्रकृति से, पूर्वजों से, ऋषियों से जो प्राप्त है उसके प्रति कृतज्ञ होना और उसका एक अंश वापस लौटाना।

🔥यज्ञ की क्रिया हमें सिखाती है : पारमार्थिक भाव से किया गया कोई भी कार्य यज्ञ है।

📚 श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने यज्ञ को केवल हवन या कर्मकांड तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे परम कर्तव्य, त्याग और जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला बताया है।

🚩 ॐ राष्ट्राय स्वाहा। इदं राष्ट्राय इदं न मम।

अर्थ: यह सब राष्ट्र को समर्पित है। यह सब राष्ट्र का है, मेरा नहीं है, कुछ भी मेरा नहीं है।

✅ समाज में यज्ञ भाव/जीवनशैली विकसित हो इस हेतु दिव्य बिहार मिशन के कार्यकर्ताओं के द्वारा गाँव में हवन कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें गाँव के बच्चे, बड़े, बुजुर्ग, और महिलाएं शामिल हुई।

पिछले रविवार DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे श्री जितेन्द्र तिवारी जी। आप श्री आदिशंकराचार्य फाउंडेशन के संस्थापक-सच...
20/08/2026

पिछले रविवार DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे श्री जितेन्द्र तिवारी जी। आप श्री आदिशंकराचार्य फाउंडेशन के संस्थापक-सचिव हैं।

आपने हम सभी को प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और वर्तमान शिक्षा संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन किया। आपने बताया:
➡️प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति मुख्य रूप से व्यक्ति का चारित्रिक विकास एवं जीवन के मूल्यों पर आधारित था। ऐसे शिक्षा प्राप्त करने वाले कभी भी भ्रष्टाचार के रास्ते पर नहीं चल सकता था।
➡️वर्तमान दौर में संस्कार, चरित्र और जीवन के मूल्य के साथ अपनी परम्परा और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच सार्थक संतुलन से ही हम एक समर्थ व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु: हमें धर्म पूर्वक उपभोग के साधनों को प्राप्त करते हुए अंतिम लक्ष्य (मोक्ष) की ओर की मार्ग शिक्षा ही प्रशस्त करती हैं।

जय हिंद🇮🇳

कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे डॉ विनोद कुमार जी। आप ISRO के अंतरिक्ष विभाग के तहत आने वाले स्वायत्त नोडल एजे...
10/08/2026

कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे डॉ विनोद कुमार जी। आप ISRO के अंतरिक्ष विभाग के तहत आने वाले स्वायत्त नोडल एजेंसी IN-SPACe में प्रमोशन डायरेक्टरेट के निदेशक हैं।

➡️आपने कल के सत्र में हम सभी को इसरो के स्थापना से अभी तक के सफर साझा किया जो कि बेहद ही प्रेरणादायक था।
➡️आपने डॉ विक्रम साराभाई के अंतरिक्ष विभाग में ऐतिहासिक योगदान के विषय में भी बताया, जो युवाओं को अपने देश के लिए कुछ करने हेतु उत्साह से भरने वाला था।
➡️आपने हमारे गौरवशाली इतिहास का भी जिक्र किया कैसे आर्यभट्ट ने 499 ईस्वी में ही यह बता दिया था कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। आपने भास्कराचार्य के लीलावती पुस्तक का भी जिक्र किया और बताया कि पूरी गणित को सिर्फ एक पुस्तक से भी समझा जा सकता है।
➡️आपने वर्तमान में युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने को कहा साथ ही बताया कि अभी नए नए अवसर है और कैसे सरकार एवं संस्थान मिलकर नई पीढ़ी को प्रोत्साहन दे रही हैं।

🫵🏼मुख्य बिंदु: अगर हमारा कोई लक्ष्य हो, उसे करने की जुनून हो तो रास्ता स्वतः ही बन जाता है, और सफलता जरूर मिलती हैं।

जय हिंद।🇮🇳

कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे PRAVEEN THAKUR जी। आप हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से आते हैं।👨🏼‍🎓 आपकी शैक्षणिक...
13/07/2026

कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे PRAVEEN THAKUR जी। आप हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से आते हैं।

👨🏼‍🎓 आपकी शैक्षणिक यात्रा सरस्वती विद्या मंदिर और नवोदय विद्यालय से NIT Hamirpur, IIT Kharagpur और IIT Delhi तक रहा।

आपने कल हम सभी को राजनीति, नेतृत्व, स्वयंसेवक जैसे विषयों को आसान शब्दों में बताया।
➡️आपने बताया नेतृत्व करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है समाज या जिनका हम नेतृत्व कर रहे है उनसे जुड़ाव रखना।
➡️ अगर हम वास्तव में समाज में कोई भी बदलाव चाहते है तो राजनीति एक सशक्त माध्यम हैं।
➡️आपने बताया संघ एक विशाल वृक्ष की भांति अपने छांव में व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण करके हमारे समाज को बेहतर बनाने में सहयोग कर रहा हैं।
➡️ हम आज जो भी है हम अपने समाज के ही प्रतिबिंब है, अगर हम समाज में वास्तव में बदलाव चाहते है तो हमें स्वयं व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव करना होगा।

🫵🏼मुख्य बिंदु: अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता है।

जय हिंद।🇮🇳

कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ जुड़े थे DR, PARIKSH*T PAREEK जी।आपकी शैक्षणिक यात्रा राजस्थान के टेक्निकल यूनिवर...
05/07/2026

कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ जुड़े थे DR, PARIKSH*T PAREEK जी।
आपकी शैक्षणिक यात्रा राजस्थान के टेक्निकल यूनिवर्सिटी से B-TECH , M- TECH ( IIT DELHI )और NANYANG TECHNOLIGICAL UNIVERSITY ( SINGAPORE) से Ph.d तक रही। आपको विश्व प्रसिद्ध Los Alamos Laboratory (USA) में शोध का भी अनुभव रहा ।

आपने अपने जीवन यात्रा साझा किया साथ ही कई मुद्दों पर हम सभी का मार्गदर्शन किया । आपने बताया नए पीढ़ि के बच्चों में जिज्ञासा का होना नवाचार के लिए बहुत आवश्यक है । किताबों में लिखे को आंख बंद करके विश्वाश नहीं करने बल्कि प्रश्न करके उसे समझने का प्रयास करना चाहिए। आपने शोध ( research) को बच्चों के बीच बड़े ही आसान शब्दों में समझाया।

आपने बताया कि हम जो करना चाहते है वो सिर्फ और सिर्फ हमारी जिम्मेदारी है , और हमें उसे पूरा करने के लिए कुछ भी बहाना करने से बचना चाहिए और प्रयास निरंतर जारी रखना चाहिए। साथ ही अगर हम जीवन में लक्ष्य चुनते है तो हमें पहले ही ये निर्धारित करना चाहिए कि हम इसके पीछे कितना समय व्यय कर सकते है । विफलता से घबराना नहीं चाहिए । हम सभी को अपने जीवन में अपना passion का पता करना चाहिए, और ये होगा अलग अलग कार्यों को करने से ।
और अंत में आपने हम सभी के विकसित भारत की सपने को साकार करने के लिए एक बहुत ही सरल और गहरा मंत्र दिया - ‘‘ वर्तमान में हम जो भी कार्य कर रहे है सिर्फ उसे पूर्णतः ईमानदारी से करे तो स्वतः ही विकसित भारत का सपना निश्चित समय में साकार हो जाएगा ''।
जय हिंद।

पिछले रविवार [28 जून 2026] को DBM Insight Series में हमारे बीच धर्मदास सिंह जी थे।धर्मदास जी मूलतः *ग्वालियर (मध्य प्रदे...
30/06/2026

पिछले रविवार [28 जून 2026] को DBM Insight Series में हमारे बीच धर्मदास सिंह जी थे।

धर्मदास जी मूलतः *ग्वालियर (मध्य प्रदेश)* से हैं। उन्होंने *17 वर्षों तक विवेकानन्द केन्द्र* में *जीवनव्रती प्रचारक* के रूप में कार्य करते हुए भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा का कार्य किया है।

उन्होंने अपने बचपन के अनुभव बताते हुए युवाओं को शिक्षा के साथ - साथ समाज से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया पढ़ाई के साथ - साथ समाजिक कार्यों से जुड़ना भी शिक्षा का ही अंग है।

बचपन में संघ की शाखा और विवेकानंद केंद्र के संस्कार वर्गों में जाना हुआ। फिर सामाजिक कार्यों से जुड़े और धीरे - धीरे विवेकानंद केंद्र के पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता बन गए।

स्वामी विवेकानंद जी के विचारों ने आपके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने सत्र में बताया कि कैसे विवेकानंद जी की राष्ट्र भक्ति विदेश जाने के बाद और बढ़ गई तथा भारत का कण - कण उनके लिए चन्दन बन गया था।

दक्षिण भारत में समुद्र तट के जिस स्थान पर विवेकानंद जी ने तीन दिनों तक ध्यान किया था उसी स्थान पर माननीय एकनाथ राणाडे जी के नेतृत्व में पूरे भारतवासियों के सहयोग से जीवंत शिला स्मारक बनाया गया। विवेकानंद शिला स्मारक की स्थापना के बाद माननीय एकनाथ जी ने विवेकानंद केंद्र की स्थापना की जिसका उद्देश्य राष्ट्र भक्ति, सेवाभाव और त्याग से प्रेरित युवा पीढ़ी तैयार करना है जो भारत माता को विश्व गुरु के पद पर आसीन करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।

अंत में आपने युवाओं को तीन प्रश्नों पर विचार करने के लिए कहा -

1️⃣ मैं कौन हूँ?

2️⃣ जीवन का क्या उद्देश्य है?

3️⃣ मेरा जन्म भारत में क्यों हुआ है?

इस रविवार दिनांक 21 june 2026 को DBM Insight Series के विशेष सत्र में हमारे बीच ISKCON के सम्माननीय संत सत्य स्वरूप दास ...
24/06/2026

इस रविवार दिनांक 21 june 2026 को DBM Insight Series के विशेष सत्र में हमारे बीच ISKCON के सम्माननीय संत सत्य स्वरूप दास जी उपस्थित रहे। विषय था— भक्ति योग, ज्ञान योग एवं कर्म योग।

जीवन में अधिकांश लोग शिक्षा प्राप्त करते हैं, करियर बनाते हैं, सफलता का पीछा करते हैं और समाज द्वारा निर्धारित उपलब्धियों को हासिल करने का प्रयास करते हैं। परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन सबके बीच एक प्रश्न को छोड़ नहीं पाते—
मैं कौन हूँ?
मैं यहाँ क्यों हूँ?
और जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
इन्हीं गहन प्रश्नों के उत्तर खोजने की दिशा में सत्य स्वरूप दास जी ने भक्ति योग, ज्ञान योग एवं कर्म योग के माध्यम से जीवन को समझने का सरल एवं व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि भक्ति योग ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का मार्ग है, ज्ञान योग आत्मबोध और सत्य की खोज का मार्ग है, जबकि कर्म योग निःस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है।

सत्र के दौरान उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात कही कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए जीवन का त्याग करना आवश्यक नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपने वर्तमान दायित्वों और कार्यक्षेत्र में रहते हुए भी भगवद्गीता के सिद्धांतों को अपनाकर एक सफल, संतुलित और प्रेरणादायक जीवन जी सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई किसान है, तो वह खेती करते हुए भी भगवद्गीता के ज्ञान को अपने जीवन में उतार सकता है। इससे वह न केवल अपने कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में रहते हुए आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर अपने जीवन और कार्य को अधिक सार्थक बना सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि हर व्यक्ति मोंक नहीं बन सकता, हर व्यक्ति शिक्षक नहीं बन सकता, परंतु समाज में कुछ लोगों का आध्यात्मिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के लिए समर्पित होना आवश्यक है। ऐसे ही लोग भक्ति, ज्ञान और कर्म के सिद्धांतों को समाज तक पहुँचाते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा प्रदान करते हैं।
सत्य स्वरूप दास जी ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्म योग तीन अलग-अलग मार्ग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। इन तीनों का अंतिम लक्ष्य व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाना, आत्मिक उन्नति करना तथा मानवता के कल्याण में योगदान देना है।

उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसान हो, छात्र हो, शिक्षक हो, इंजीनियर हो, व्यवसायी हो या किसी अन्य क्षेत्र में कार्यरत हो, यदि वह इन तीनों सिद्धांतों को अपने जीवन के मूल्यों और उद्देश्य का आधार बना ले, तो वह न केवल अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है, बल्कि जनकल्याण, राष्ट्रनिर्माण और मानवता की सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। ऐसे जीवन-दृष्टिकोण से व्यक्ति के भीतर निहित असीमित क्षमताएँ जागृत होती हैं और उसका जीवन स्वयं दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है।
यह सत्र केवल योग के विभिन्न मार्गों की चर्चा नहीं था, बल्कि जीवन के उद्देश्य, आत्मबोध और कर्म को आध्यात्मिकता से जोड़ने की एक प्रेरणादायक यात्रा थी।

सत्य स्वरूप दास जी के विचारों ने सभी प्रतिभागियों को यह संदेश दिया कि आध्यात्मिकता का अर्थ संसार छोड़ना नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन को उच्च मूल्यों से जोड़ना है।
जय हिन्द! 🇮🇳

31 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ डॉ॰ रोहित चौधरी जी जुड़े थे।आप की शैक्षणिक यात्रा नवोदय विद्यालय से IIT D...
24/06/2026

31 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ डॉ॰ रोहित चौधरी जी जुड़े थे।
आप की शैक्षणिक यात्रा नवोदय विद्यालय से IIT DELHI तक रहा , साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध एंव अध्यापन का अनुभव भी रहा ।

सत्र में आपने अपनी प्रेरणादायक जीवन यात्रा हम सभी के साथ साझा किया।आपकी जीवन यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणादायक के साथ-साथ उत्साह से भरने वाला था ।

आपकी जीवन यात्रा यह बताता है कि अगर लक्ष्य प्राप्ति के लिए करी मेहनत और सच्चे मन से निश्चय किया गया हो तो , कठिन से कठिन परिस्थित में भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता हैं।

मुख्य संदेश : अगर हम मन में ठान ले और कड़ी मेहनत करे तो हम अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।

जय हिंद।

24 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ मंजूकेश्वर रेड्डी जी जुड़े थे।आप हैदराबाद से है ।आपने प्रारंभिक शिक्षा सू...
24/06/2026

24 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ मंजूकेश्वर रेड्डी जी जुड़े थे।
आप हैदराबाद से है ।आपने प्रारंभिक शिक्षा सूबे में ही किया , computer science और engineering की शिक्षा Amrita Vishwa Vidyapeetham (coimbatore) से पूरा किया ।

आपने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए कई विषयों को हमारे समक्ष रखा। जिसमें मुख्य तौर से आपने भारतीय ज्ञान परंपरा (gurukulam system) पर जोर दिया । आपने वर्तमान के समय गुरुकुल की शिक्षा बहुत जरूरी बताया , कि कैसे बढ़ते विज्ञान और प्रौद्योगिकी ( technology) के पढ़ाई के साथ साथ जीवन के विषय में गहरी दर्शन, एक बेहतर जीवन जीना , और अपने मातृभूमि या देश के प्रति कुछ लौटाने का भाव सिर्फ गुरुकुल शिक्षा पद्धति द्वारा ही संभव हैं।

आपने गुरु-शिष्य परंपरा को भी बताया कि कैसे गुरु के सानिध्य में ही हम तृप्ति का अनुभूति कर सकते हैं, और हमारे भीतर कुछ देने का भाव उत्पन हो सकता हैं।

आप वर्तमान समय में ANAADI FOUNDATION के साथ जुड़े हैं । जहां योगा, आयुर्वेद, भारतीय गणित और भारतीय ज्ञान परंपरा को Advance research और technology के माध्यम से future generations के लिए तैयार किया जा रहा है , साथ ही वर्तमान में कार्यरत हैं।

राधे राधे 🙏🏼

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